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JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, CBI जांच और दोबारा परीक्षा कराने की मांग

JPSC Exam Controversy: JPSC प्रारंभिक परीक्षा 2025 में कथित गड़बड़ी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। याचिकाकर्ता ने परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने, CBI जांच और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की निगरानी में स्वतंत्र जांच कमेटी गठित करने की मांग की है।

JPSC Exam Controversy
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

JPSC Exam Controversy: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 2025 प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। हरिशरण देवगन नाम के याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर परीक्षा को रद्द कर नए सिरे से आयोजित कराने और पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग की है। 



याचिका में जांच की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की एक स्वतंत्र कमेटी गठित करने की मांग भी की गई है। यह याचिका अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मामले में हस्तक्षेप करते हुए परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र और विस्तृत जांच कराने का अनुरोध किया है।



JPSC की 2025 प्रारंभिक परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप उस समय सामने आए, जब 2 जुलाई को एक सफल अभ्यर्थी की OMR कार्बन कॉपी वायरल हुई थी। आरोप लगाया गया कि संबंधित अभ्यर्थी ने पेपर-1 में केवल 48 प्रश्न हल किए थे, इसके बावजूद उसे अगली परीक्षा के लिए योग्य घोषित कर दिया गया।



मामला सामने आने के बाद अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ गई और छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। राज्य सरकार ने मामले की जांच CID को सौंप दी, लेकिन आंदोलन कर रहे छात्र इससे संतुष्ट नहीं हैं। छात्र 25 जुलाई से रांची में प्रदर्शन कर रहे हैं।



याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से JPSC प्रारंभिक परीक्षा-2025 से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर कई मांगें की हैं। इनमें प्रमुख रूप से JPSC प्रारंभिक परीक्षा-2025 को रद्द कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के साथ दोबारा आयोजित कराया जाए। कथित अनियमितताओं की CBI से विस्तृत और समयबद्ध जांच कराई जाए। सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश या झारखंड के बाहर किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच कमेटी गठित की जाए।



इसके साथ ही OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। यह जांच की जाए कि कथित अनियमितता में शामिल अभ्यर्थियों और निर्दोष अभ्यर्थियों की अलग-अलग पहचान संभव है या नहीं। मूल OMR शीट, कार्बन कॉपी, प्रश्नपत्र, आंसर-की, उपस्थिति और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा जाए। परीक्षा केंद्रों के CCTV फुटेज, डिस्पैच रजिस्टर, स्कैनिंग रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को संरक्षित किया जाए। परीक्षा से जुड़े सभी डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, ताकि जांच के दौरान किसी भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ न हो सके।



JPSC परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों के विरोध और कथित अनियमितताओं के बीच अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट में दाखिल इस याचिका पर टिकी हैं। छात्रों की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठाई जा रही है।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता