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Success Story: कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती, कॉल सेंटर में नौकरी से लेकर IPS बनने तक का सफर

यूपी के जौनपुर के रहने वाले सूरज सिंह परिहार ने आर्थिक तंगी, असफलताओं और संघर्षों के बावजूद हार नहीं मानी। कॉल सेंटर और बैंक की नौकरी करने के बाद उन्होंने चौथे प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर 189वीं रैंक हासिल की और IPS अधिकारी बने।

बिहार न्यूज
IPS सूरज सिंह परिहार की कहानी
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

Success Story: देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शामिल UPSC को पास करना हर किसी के बस की बात नहीं होती। कई अभ्यर्थी वर्षों तक तैयारी करते हैं, लेकिन सफलता नहीं मिलती। वहीं कुछ लोग कठिन परिस्थितियों और लगातार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानते और आखिरकार अपने सपनों को हासिल कर लेते हैं। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी IPS अधिकारी सूरज सिंह परिहार की है, जिन्होंने संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर सफलता हासिल की।


उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के एक छोटे से गांव में जन्मे सूरज सिंह परिहार की शुरुआती पढ़ाई गांव के स्कूल से हुई। पांचवीं कक्षा के बाद वह कानपुर के जाजमऊ इलाके में आ गए, जहां हिंदी माध्यम से उनकी आगे की शिक्षा पूरी हुई। बचपन से ही मेधावी रहे सूरज को वर्ष 2000 में तत्कालीन राष्ट्रपति के.आर. नारायणन द्वारा राष्ट्रीय बाल श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। हालांकि इस सम्मान समारोह के दौरान उन्हें एक कमी का एहसास हुआ। कार्यक्रम में अन्य बच्चों को धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलते देख उनका आत्मविश्वास डगमगा गया। वह अंग्रेजी पढ़ और लिख तो लेते थे, लेकिन बोलने में परेशानी होती थी। इसके बाद उन्होंने अपनी इस कमजोरी को दूर करने के लिए लगातार मेहनत शुरू कर दी।


12वीं की परीक्षा में सूरज ने 81 प्रतिशत अंक हासिल किए, लेकिन इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई। ऐसे में उन्होंने एक दोस्त के साथ मिलकर छोटा कोचिंग सेंटर शुरू किया। बाद में उन्हें एक कॉल सेंटर में नौकरी मिल गई। शुरुआत में वॉयस और एक्सेंट टेस्ट में फेल होने के कारण उन्हें नौकरी छोड़ने तक के लिए कहा गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अनुरोध के बाद उन्हें एक और मौका मिला और बाद में वह कंपनी के टॉप परफॉर्मर बन गए। इसके बावजूद सूरज का सपना सिविल सेवा में जाने का था। इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी और यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली चले गए। हालांकि दिल्ली में रहना आसान नहीं था। कुछ ही महीनों में उनकी सारी बचत खत्म हो गई, लेकिन उन्होंने संघर्ष जारी रखा। आर्थिक स्थिति संभालने के लिए उन्होंने कई बैंकों की प्रोबेशनरी ऑफिसर परीक्षा दी और सभी में सफलता हासिल की।


इसके बाद उन्होंने बैंक ऑफ महाराष्ट्र और फिर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी की। वह बैंक मैनेजर के पद तक पहुंचे, लेकिन उनका लक्ष्य अभी भी यूपीएससी ही था। आखिरकार उन्होंने नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गए। साल 2011 में सूरज सिंह यूपीएससी इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका। 2012 में वह मेंस परीक्षा भी पास नहीं कर पाए। इसके बाद 2013 में तीसरे प्रयास में उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के लिए हो गया। हालांकि उनका सपना आईपीएस बनने का था। इसी बीच सरकार ने यूपीएससी प्रयासों की संख्या बढ़ा दी, जिससे उन्हें एक और मौका मिला। सूरज ने इस अवसर का पूरा फायदा उठाया और चौथे प्रयास में 189वीं रैंक हासिल कर आईपीएस अधिकारी बनने का सपना पूरा कर लिया। आज सूरज सिंह परिहार की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों और असफलताओं के बावजूद अपने सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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