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1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sun, 31 Aug 2025 09:00:16 PM IST
भारत के महत्वपूर्ण पनडुब्बी सौदे - फ़ोटो Google
India Submarine Deals: चीन व अन्य देशों की बढ़ती नौसैनिक ताकत और हिंद महासागर में बदलते सामरिक समीकरणों के बीच भारत अपनी समुद्री युद्ध क्षमताओं को और मजबूत करने के लिए तेजी से कदम उठा रहा है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, अगले साल की पहली छमाही तक 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के दो बड़े पनडुब्बी सौदों को अंतिम रूप दिया जा सकता है। पहला सौदा तीन स्कॉर्पीन क्लास पनडुब्बियों का है जो लगभग 36,000 करोड़ रुपये का होने जा रहा, जबकि दूसरा छह डीजल-इलेक्ट्रिक स्टील्थ पनडुब्बियों का 65,000 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है। ये सौदे भारतीय नौसेना की क्षमताओं को बढ़ाएंगे और 'मेक इन इंडिया' पहल को भी मजबूती देंगे। कुल मिलाकर, ये प्रोजेक्ट्स 1.06 लाख करोड़ रुपये से अधिक के होंगे, यह भारत के सबसे बड़े रक्षा सौदों में से एक है।
पहला सौदा स्कॉर्पीन क्लास पनडुब्बियों का अनुवर्ती आदेश है और प्रोजेक्ट-75 का हिस्सा है। इसमें मझगांव डॉक लिमिटेड और फ्रांस की नेवल ग्रुप के सहयोग से तीन अतिरिक्त पनडुब्बियां बनाई जाएंगी। रक्षा मंत्रालय ने दो साल पहले इसे मंजूरी दी थी, लेकिन तकनीकी और वाणिज्यिक वार्ताओं में देरी हुई। अब वाणिज्यिक बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है और अनुबंध अगले साल की शुरुआत में साइन हो सकता है। पहली पनडुब्बी अनुबंध साइन होने के छह साल बाद डिलीवर होगी। एमडीएल ने पहले ही प्रोजेक्ट-75 के तहत छह कलवरी क्लास पनडुब्बियां बना ली हैं, जिनमें से पांच डिलीवर हो चुकी हैं। ये नई पनडुब्बियां एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन सिस्टम से लैस होंगी, इस सिस्टम की वजह से उनकी पानी के नीचे रहने की क्षमता 48 घंटे से बढ़कर 14-21 दिन हो जाएगी।
इधर दूसरा सौदा प्रोजेक्ट-75 इंडिया का है जो करीब 70,000 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है और जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स के साथ एमडीएल की साझेदारी में छह एडवांस्ड डीजल-इलेक्ट्रिक स्टील्थ पनडुब्बियां बनाई जाएंगी। 2021 में मंजूर इस प्रोजेक्ट में 100% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा और पहली पनडुब्बी में 45% से लेकर छठी में 60% स्वदेशी सामग्री होगी। कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी ने 23 अगस्त 2025 को नेगोशिएशंस की मंजूरी दे दी है और यह इस महीने के अंत तक शुरू होंगी। इसके लिए TKMS का टाइप-214 डिजाइन चुना गया है जो AIP से लैस होगा और स्टील्थ फीचर्स के साथ लंबी दूरी की स्ट्राइक कैपेबिलिटी देगा। स्पेन की नावांतिया को डिसक्वालिफाई कर दिया गया है क्योंकि उनका AIP सिस्टम ऑपरेशनल नहीं था। पहली पनडुब्बी साइनिंग के सात साल बाद डिलीवर होगी और बाकी सालाना एक-एक कर के।
ये आने वाले महत्वपूर्ण सौदे भारत की नौसेना के लिए जरूरी हैं, क्योंकि वर्तमान में हमारे पास 16 कन्वेंशनल पनडुब्बियां हैं, जिनमें से कई पुरानी हो चुकी हैं। चीन की 355 जहाजों वाली नेवी और पाकिस्तान की चाइनीज हंगोर क्लास पनडुब्बियों के बीच भारत को और मजबूत होना पड़ेगा। नेवी चीफ एडमिरल ने इस बारे में बात करते हुए कहा है कि इंडो-पैसिफिक में सिक्योरिटी डायनामिक्स को देखते हुए ये पनडुब्बियां क्रिटिकल हैं। ब्रह्मोस मिसाइल और टॉरपीडो से लैस ये पनडुब्बियां अंडरवाटर सर्विलांस और स्ट्राइक कैपेबिलिटी बढ़ाएंगी।