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SIM बाइंडिंग नियमों में बदलाव करने जा रही सरकार? इन ऐप्स को मिल सकती है राहत; जानिए

SIM Binding: केंद्र सरकार ने मोबाइल सिम कार्ड से जुड़े सिम बाइंडिंग नियमों की समीक्षा फिर से शुरू कर दी है। दूरसंचार विभाग ने दिसंबर 2025 में नए साइबर सुरक्षा नियम प्रस्तावित किए थे, लेकिन टेक कंपनियों की आपत्तियों के बाद अब

SIM बाइंडिंग नियमों में बदलाव करने जा रही सरकार? इन ऐप्स को मिल सकती है राहत; जानिए
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

SIM Binding: मोबाइल फोन में इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड से जुड़े नियमों को लेकर केंद्र सरकार के स्तर पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार सिम बाइंडिंग (SIM Binding) से जुड़े प्रस्तावित नियमों में कुछ बदलाव या नरमी लाने पर विचार कर सकती है। कई टेक कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने इन नियमों को लेकर चिंता जताई है, जिसके बाद सरकार इस पूरे मामले की दोबारा समीक्षा कर रही है।


दरअसल, दूरसंचार विभाग (DoT) ने दिसंबर 2025 में टेलीकम्युनिकेशन साइबर सिक्योरिटी अमेंडमेंट रूल्स, 2025 के तहत कुछ नए नियम प्रस्तावित किए थे। इन नियमों के अनुसार मैसेजिंग ऐप्स को उपयोगकर्ताओं के मोबाइल सिम से लगातार जुड़े रहना जरूरी होगा। यानी जिस सिम नंबर से यूजर ने ऐप पर अकाउंट बनाया है, उसी सिम वाले डिवाइस से उस ऐप का इस्तेमाल किया जा सकेगा।


नियमों में यह भी प्रावधान रखा गया था कि यदि कोई उपयोगकर्ता इन ऐप्स का इस्तेमाल वेब या डेस्कटॉप वर्जन के जरिए करता है, तो उसे हर छह घंटे के भीतर अपने आप लॉगआउट कर दिया जाएगा। सरकार का कहना था कि यह कदम साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है।


हालांकि इन प्रस्तावित नियमों पर कई टेक कंपनियों ने आपत्ति जताई है। कंपनियों का कहना है कि यह नियम केवल उन प्लेटफॉर्म्स पर लागू होने चाहिए जिनका मुख्य उद्देश्य मैसेजिंग सेवा देना है। उनका तर्क है कि कई बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में मैसेजिंग केवल एक फीचर के रूप में मौजूद होता है, जबकि उनकी मुख्य सेवाएं अलग होती हैं। ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर सिम बाइंडिंग नियम लागू करना व्यावहारिक नहीं होगा।


रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार अब ऐसे प्लेटफॉर्म्स को आंशिक छूट देने पर विचार कर रही है जिनका मुख्य काम केवल मैसेजिंग नहीं है। सूत्रों के मुताबिक इन नियमों का मूल उद्देश्य कम्युनिकेशन ऐप्स को नियंत्रित करना था, इसलिए कुछ मामलों में लचीलापन दिखाया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।


इस बीच कुछ मैसेजिंग ऐप्स ने संभावित नियमों को ध्यान में रखते हुए अपनी तकनीकी तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। उदाहरण के तौर पर WhatsApp, JioChat और Arattai जैसे प्लेटफॉर्म्स अपने यूजर अकाउंट को सिम कार्ड से जोड़ने वाली तकनीक पर काम कर रहे हैं, ताकि भविष्य में नियम लागू होने पर उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।


सरकार का मानना है कि सिम से जुड़े बिना डिवाइसों के जरिए ऐप्स का इस्तेमाल करने से साइबर अपराधों की आशंका बढ़ सकती है। खासकर विदेशों में बैठकर किए जाने वाले टेलीकॉम फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी को रोकने के लिए ऐसे नियम जरूरी माने जा रहे हैं। इसी वजह से वेब या डेस्कटॉप लॉगिन को सीमित समय तक ही सक्रिय रखने का प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया था।


हालांकि टेक उद्योग से जुड़े कई संगठनों ने इन नियमों पर चिंता भी जताई है। ब्रॉडबैंड इंडिया फोरम का कहना है कि इस तरह के नियम दूरसंचार विभाग के अधिकार क्षेत्र से बाहर हो सकते हैं और इससे कानूनी जटिलताएं भी पैदा हो सकती हैं। संगठन ने सुझाव दिया है कि साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सिम-केवाईसी प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया जाए। साथ ही टेलीकॉम कंपनियों, बैंकों और जांच एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल से भी साइबर अपराधों पर लगाम लगाई जा सकती है।