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मिडल ईस्ट युद्ध के बीच भारत ने बढ़ाई खुद की सुरक्षा, अब गोला-बारूद ही नहीं इस टेक्नोलॉजी से भी दुश्मन को मिलेगा करारा जवाब

भारत में रक्षा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। सेना, नेवी और DRDO अब AI और मशीन लर्निंग को प्रशिक्षण और ऑपरेशन्स में शामिल कर रहे हैं ताकि भविष्य के युद्ध में रणनीति और निर्णय क्षमता मजबूत हो।

मिडल ईस्ट युद्ध के बीच भारत ने बढ़ाई खुद की सुरक्षा, अब गोला-बारूद ही नहीं इस टेक्नोलॉजी से भी दुश्मन को मिलेगा करारा जवाब
Tejpratap
Tejpratap
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दुनियाभर में बदलते युद्ध के स्वरूप के बीच अब सिर्फ गोले-बारूद ही नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी भी जंग का अहम हिस्सा बनती जा रही है। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी Artificial Intelligence (AI) का इस्तेमाल अब तेजी से बढ़ रहा है। मिडिल ईस्ट और पाकिस्तान जैसे क्षेत्रों में बढ़ते तनाव के बीच भारत भी अपनी रक्षा तैयारियों को आधुनिक बना रहा है। 


भारतीय सेना में अब AI का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ट्रेनिंग से लेकर ऑपरेशन तक, हर स्तर पर इस नई तकनीक को शामिल किया जा रहा है। National Defence Academy (NDA) जैसे प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों में भी AI की एंट्री हो चुकी है। यहां अब भविष्य के युद्ध को ध्यान में रखते हुए नई पीढ़ी के अफसरों को तकनीकी रूप से तैयार किया जा रहा है।


साल 2022-23 में NDA के सिलेबस में बड़ा बदलाव किया गया, जिसमें AI और मशीन लर्निंग, साइबर वॉरफेयर, स्पेस वॉरफेयर और इंफॉर्मेशन वॉर जैसे आधुनिक विषयों को शामिल किया गया। इसके साथ ही नेटवर्क सेंट्रिक वॉरफेयर जैसे चैप्टर भी जोड़े गए हैं, जो आधुनिक युद्ध की रीढ़ माने जाते हैं। इसमें विभिन्न सैन्य यूनिट्स को एक मजबूत नेटवर्क से जोड़कर तेज और सटीक फैसले लेने की क्षमता विकसित की जाती है।


आज की सेना के लिए मिलिट्री एक्सरसाइज भी पहले से ज्यादा एडवांस हो गई है। अब इन अभ्यासों में AI का इस्तेमाल कर जटिल और मल्टी-रीजनल युद्ध परिस्थितियों का सिमुलेशन किया जाता है। इससे कमांडरों को तेज फैसले लेने, अनिश्चित परिस्थितियों से निपटने और तकनीकी चुनौतियों को समझने में मदद मिलती है।


Indian Navy ने भी इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मार्च 2025 में नेवी ने अपने पहले AI डेटा सेंटर ‘क्रिस्टल’ (CRITAL) का उद्घाटन किया, जो एडवांस AI सिस्टम विकसित करने के लिए हाई-लेवल कंप्यूटिंग सुविधा प्रदान करता है। इससे रक्षा क्षेत्र में नई तकनीकों के विकास को और गति मिलेगी।


वहीं Defence Research and Development Organisation (DRDO) भी AI को लेकर लगातार काम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI की मदद से युद्ध के दौरान रियल-टाइम डेटा का विश्लेषण कर तुरंत निर्णय लिया जा सकता है। इससे संभावित खतरों का पहले ही पता लगाया जा सकता है और उन्हें समय रहते रोका जा सकता है।


अब युद्ध केवल मैदान में लड़ने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह डेटा, तकनीक और नेटवर्क पर भी निर्भर हो गया है। ऐसे में AI भारत की रक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।


आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदलने वाला है, जहां सैनिकों के साथ-साथ मशीनें और AI सिस्टम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। भारत इस बदलाव के लिए खुद को तेजी से तैयार कर रहा है, ताकि किसी भी चुनौती का सामना मजबूती से किया जा सके।