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होली के दिन इस गांव में सिर्फ महिलाओं का रहता है राज, इनकी डर से कोई भी मर्द नहीं रखता गांव में कदम

DESK: अब बात एक ऐसे गांव की करते है जहां होली के मौके पर पूरे गांव के मर्द औरतों से डरते हैं। होली के दिन कोई पुरुष गांव में पैर तक नहीं रख सकता। यदि भूलवश कोई गांव में रह जाए

होली के दिन इस गांव में सिर्फ महिलाओं का रहता है राज, इनकी डर से कोई भी मर्द नहीं रखता गांव में कदम
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

DESK: अब बात एक ऐसे गांव की करते है जहां होली के मौके पर पूरे गांव के मर्द औरतों से डरते हैं। होली के दिन कोई पुरुष गांव में पैर तक नहीं रख सकता। यदि भूलवश कोई गांव में रह जाए तो महिलाएं कोड़े मारकर उन्हें बाहर निकालती है। 


होली की यह अनूठी परंपरा राजस्थान के टोंक जिले के नगर गांव की है। इस गांव में यह परंपरा करीब 400 साल पुरानी है। होली के दिन गांव में सिर्फ महिलाओं का ही राज रहता है एक भी पुरुष गांव में नजर नहीं आते हैं।


गांव के लोगों ने बताया कि उनके पूर्वजों के समय पर्दा प्रथा का चलन अधिक था। महिलाएं घर से बाहर नहीं निकलती थी। फाल्गुन मास का सबसे खास त्योहार होली के मौके पर भी महिलाएं बाहर नहीं आती। इस बात की जानकारी जब तत्कालीन महाराज को पता हुई तब दरबार बुलाया गया।


दरबार में यह बात रखी गई कि क्यों न होली के दिन सभी पुरुष गांव के बाहर चले जाएं? ताकि गांव की महिलाएं बिना किसी शर्म और लोक-लाज के होली के त्यौहार का आनंद ले सके। इस पर सभी की सहमति बनी। इसके बाद से पिछले 400 साल से यह परंपरा चली आ रही है। आज भी होली के दिन पुरुष गांव के बाहर बने माता जी के मंदिर में रहते हैं और महिलाओं का राज पूरे गांव पर होता है।


होली के दिन सुबह में ही सभी मर्दो को गांव से बाहर निकाल दिया जाता है। लेकिन इससे पहले गांव की महिलाएं चौक में मिलती हैं। लोक गीतों के साथ पुरुषों को महिलाएं गांव से बाहर करती है। जिसके बाद गांव से करीब 3 किलोमीटर दूर स्थित मंदिर में गांव के सारे मर्द चले जाते हैं। 


मंदिर में रहने के दौरान वे होली भी नहीं खेलते हैं। जबकि होली के दिन महिलाएं  कौड़ा मार होली भी खेलती है। गलती से यदि पुरुष गांव में दिख भी जाए तो उसे कोड़े मार-मार कर गांव से बाहर निकाल देती है। होली खेलने के बाद गुड़ भी बांटा जाता है। वही दिनभर मर्द मंदिर परिसर में ही रहते हैं और शाम को गाजे-बाजे के साथ गांव में आते हैं। इस गांव में यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है।  



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