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Court Order: सिर्फ 14 हजार में मिलेगी करोड़ों की जमीन, 62 साल बाद कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

Court Order: 62 साल पुरानी कानूनी लड़ाई का अंत, फरीदाबाद में जमीन वादी को केवल कुछ हजार रुपये में मिलेगी; हाईकोर्ट ने मूल खरीददार के अधिकार को बरकरार रखा।

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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Court Order: एक कानूनी लड़ाई, जो 1962 में शुरू हुई थी, 62 साल बाद फरीदाबाद में समाप्त हो गई। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मूल खरीददार के अधिकार को बरकरार रखते हुए पूरी तरह विवाद का निपटारा कर दिया। कोर्ट के फैसले के बाद वादी को 5103 वर्ग फुट जमीन केवल कुछ हजार रुपये में मिलेगी, जबकि जमीन की वर्तमान बाजार कीमत लगभग 7 करोड़ रुपये है।


फरीदाबाद में यह जमीन पहले 14 हजार रुपये से भी कम कीमत में खरीदी गई थी। अब वादी को केवल 25 प्रतिशत अतिरिक्त नॉमिनल लागत चुकाकर यह संपत्ति हस्तांतरित की जाएगी। संपत्ति के इकलौते उत्तराधिकारी 80 वर्ष से अधिक आयु के सीके आनंद हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिल्डर ने जानबूझकर जमीन वादी को ट्रांसफर नहीं की थी और अब यह तर्क नहीं मान्य होगा कि जमीन की कीमत बढ़ गई है।


इस विवाद की शुरुआत 1963 में हुई थी, जब आरसी सूद एंड कंपनी लिमिटेड ने फरीदाबाद के सूरजकुंड में इरोस गार्डन रिहायशी कॉलोनी शुरू की और सीके आनंद की मां नंका देवी से जमीन का अग्रिम भुगतान लिया। कंपनी ने उन्हें 350 और 217 वर्ग गज के दो प्लॉट बेचने पर सहमति दी थी। नंका देवी ने बिक्री राशि का करीब आधा हिस्सा जमा भी करा दिया था।


हालाँकि, मामला कानूनी अड़चनों और प्रशासनिक देरी के कारण पीढ़ियों तक लंबित रहा। बुकिंग के तुरंत बाद पंजाब शेड्यूल्ड रोड्स एंड कंट्रोल्ड एरियाज एक्ट, 1963 और हरियाणा डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन ऑफ अर्बन एरियाज एक्ट, 1975 लागू हो गए। डिवेलपर ने इनका हवाला देकर कब्जा देने में देरी की और बार-बार भरोसा दिलाया कि मंजूरी मिलने के बाद प्लॉट ट्रांसफर कर दिए जाएंगे।


1980 के दशक के मध्य तक वादी ने आशंका जताई कि प्लॉट किसी तीसरे को न बेच दिए जाएँ और कोर्ट का रुख किया। कोर्ट के आदेश के बावजूद जमीन ट्रांसफर नहीं हुई। अब पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पीड़ित को न्याय प्रदान करते हुए जमीन उनके नाम करने का आदेश दिया।

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता