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बिजली बचाने पर भी नहीं मिलेगा राहत! सरकार के नए प्रस्ताव से हर महीने देना पड़ेगा ज्यादा पैसा, जानें कैसे

देश में बिजली बिल को लेकर बड़ा बदलाव प्रस्तावित है, जिससे उपभोक्ताओं की जेब पर असर पड़ सकता है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के नए सुझाव के तहत फिक्स्ड चार्ज बढ़ाने की बात कही जा रही है, जिससे कम बिजली इस्तेमाल करने पर भी मासिक बिल ज्यादा आ सकता

बिजली बचाने पर भी नहीं मिलेगा राहत! सरकार के नए प्रस्ताव से हर महीने देना पड़ेगा ज्यादा पैसा, जानें कैसे
Ramakant kumar
4 मिनट

देशभर के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आयाा है। अगर सबकुछ प्रस्ताव के मुताबिक लागू हुआ, तो आने वाले समय में लोगों का बिजली बिल सिर्फ इस्तेमाल की गई यूनिट पर नहीं, बल्कि तय मासिक शुल्क पर ज्यादा निर्भर करेगा। यानी अब कम बिजली खर्च करने के बावजूद भी लोगों को हर महीने मोटा बिल चुकाना पड़ सकता है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की ओर से दिए गए नए प्रस्ताव ने आम लोगों के बीच चिंता बढ़ा दी है।


दरअसल, सीईए ने बिजली टैरिफ व्यवस्था में बदलाव का सुझाव दिया है। इस प्रस्ताव के तहत बिजली कंपनियों द्वारा वसूले जाने वाले “फिक्स्ड चार्ज” यानी स्थायी शुल्क को बढ़ाने की बात कही गई है। अभी तक उपभोक्ताओं का ज्यादातर बिल बिजली की खपत पर आधारित होता है, लेकिन नए सिस्टम में हर महीने तय शुल्क का हिस्सा काफी ज्यादा हो सकता है। इसका मतलब साफ है कि अगर कोई परिवार बिजली की बचत भी करता है, तब भी उसे एक निश्चित रकम हर महीने चुकानी ही पड़ेगी।


आखिर क्यों लाया जा रहा है यह प्रस्ताव?

सरकारी बिजली वितरण कंपनियों की आर्थिक हालत लंबे समय से खराब बताई जा रही है। बिजली कंपनियों का कहना है कि उन्हें ट्रांसमिशन लाइन, बिजली ग्रिड, कर्मचारियों के वेतन, रखरखाव और बिजली उत्पादन कंपनियों को भुगतान जैसे कई स्थायी खर्च उठाने पड़ते हैं। लेकिन वर्तमान व्यवस्था में ये खर्च पूरी तरह वसूल नहीं हो पा रहे हैं।


बताया जा रहा है कि बिजली कंपनियों का कुल खर्च का बड़ा हिस्सा स्थायी होता है, जबकि आमदनी मुख्य रूप से बिजली की खपत पर निर्भर करती है। ऐसे में जब लोग कम बिजली इस्तेमाल करते हैं या सोलर सिस्टम अपनाने लगते हैं, तो कंपनियों की कमाई घट जाती है और घाटा बढ़ने लगता है।


सोलर लगाने वालों से भी बढ़ी परेशानी

रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोग अब अपने घरों और फैक्ट्रियों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगा रहे हैं। इससे वे सरकारी बिजली पर कम निर्भर हो रहे हैं। हालांकि जरूरत पड़ने पर वे फिर भी बिजली ग्रिड का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में कंपनियों को पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर चालू रखना पड़ता है, लेकिन कम बिजली खपत की वजह से उनकी आय घट जाती है।


आम लोगों पर कितना पड़ेगा असर?

अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली बिल में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सीईए ने सुझाव दिया है कि साल 2030 तक घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं के कुल बिजली बिल में फिक्स्ड चार्ज का हिस्सा बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक किया जाए।


वहीं दुकानों, फैक्ट्रियों और व्यावसायिक संस्थानों के लिए यह हिस्सा 100 प्रतिशत तक बढ़ाने की सिफारिश की गई है। यानी ऐसे उपभोक्ताओं को हर महीने भारी स्थायी शुल्क देना पड़ सकता है।

इतना ही नहीं, सोलर पैनल लगाने वाले उपभोक्ताओं के लिए भी अलग बिलिंग व्यवस्था तैयार करने की बात कही गई है। ऐसे लोगों को भी ज्यादा फिक्स्ड चार्ज देना पड़ सकता है।


बिजली बचाने का फायदा होगा कम

अब तक लोग कम बिजली इस्तेमाल कर अपने बिल में कटौती कर लेते थे, लेकिन नए प्रस्ताव के लागू होने के बाद यह फायदा काफी हद तक कम हो सकता है। क्योंकि बिल का बड़ा हिस्सा तय शुल्क के रूप में आएगा, जिसे हर हाल में देना पड़ेगा।


इस प्रस्ताव को अब नियामक संस्थाओं के पास भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद इसे अलग-अलग राज्यों में लागू किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो आने वाले वर्षों में बिजली बिल की पूरी व्यवस्था बदल सकती है और इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा।