1st Bihar Published by: First Bihar Updated Thu, 26 Feb 2026 01:47:57 PM IST
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E20 Petrol Mandate India 2026: केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए 1 अप्रैल से पूरे देश में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल यानी E-20 की बिक्री अनिवार्य कर दी है। इस ईंधन के लिए न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) 95 तय किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम पर्यावरण संरक्षण, किसानों की आय बढ़ाने और पेट्रोल आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
क्या है E-20 पेट्रोल
E-20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत तक एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। एथेनॉल गन्ना, मक्का और अन्य अनाज से तैयार किया जाता है और इसे नवीकरणीय ईंधन माना जाता है। यह पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में अधिक साफ तरीके से जलता है, जिससे प्रदूषण कम होता है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार देश के अधिकांश राज्यों में पहले से ही E-20 पेट्रोल की बिक्री शुरू हो चुकी है। 2023 से 2025 के बाद निर्मित ज्यादातर वाहन E-20 के अनुकूल डिजाइन किए गए हैं, इसलिए इसके लागू होने में ज्यादा तकनीकी दिक्कत नहीं आएगी।
क्या होता है RON 95
रिसर्च ऑक्टेन नंबर यानी RON पेट्रोल की गुणवत्ता को मापने का पैमाना है। यह बताता है कि ईंधन इंजन में नॉकिंग यानी समय से पहले प्रज्वलन को कितनी अच्छी तरह रोक सकता है। सामान्य तौर पर पेट्रोल की RON रेटिंग 91 से 98 के बीच होती है।
उच्च RON का मतलब है कि ईंधन इंजन में ज्यादा नियंत्रित तरीके से जलेगा और इंजन की गड़गड़ाहट या नुकसान की संभावना कम होगी। सरकार ने E-20 के साथ न्यूनतम RON 95 की शर्त इसलिए जोड़ी है ताकि इंजन की उम्र और प्रदर्शन पर नकारात्मक असर न पड़े।
नई कारों पर क्या होगा असर
अगर आपकी कार 2023 के बाद बनी है या आधुनिक पेट्रोल इंजन वाली है, तो E-20 पेट्रोल से कोई बड़ी समस्या नहीं होगी। ऐसे इंजन हाई कम्प्रेशन टेक्नोलॉजी पर आधारित होते हैं और उच्च ऑक्टेन ईंधन पर बेहतर प्रदर्शन करते हैं।
कुछ मामलों में इंजन की आवाज कम हो सकती है और चलने में स्मूदनेस बढ़ सकती है। कई कंपनियों ने पहले ही अपनी गाड़ियों को E-20 अनुकूल बना दिया है।
पुराने वाहनों के लिए क्या स्थिति
विशेषज्ञों के अनुसार पुराने पेट्रोल वाहनों में माइलेज में तीन से सात प्रतिशत तक हल्की कमी आ सकती है। हालांकि यह गिरावट बहुत ज्यादा नहीं मानी जा रही है।
यदि वाहन बहुत पुराना है और E-20 के लिए अनुकूल नहीं है, तो मालिकों को समय-समय पर सर्विस और मेंटेनेंस पर ध्यान देना होगा।
बाइक और स्कूटर पर असर
अधिकांश दोपहिया वाहन RON 95 वाले पेट्रोल से सुरक्षित रूप से चल सकते हैं। हालांकि हर बाइक या स्कूटर में प्रदर्शन में बड़ा अंतर दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है।
अगर इंजन में नॉकिंग या रफ रनिंग जैसी समस्या आती है, तो उच्च ऑक्टेन ईंधन से कुछ हद तक सुधार देखा जा सकता है।
किसानों और अर्थव्यवस्था को फायदा
सरकार का मानना है कि एथेनॉल की मांग बढ़ने से गन्ना और मक्का जैसे कृषि उत्पादों की खपत बढ़ेगी। इससे किसानों की आय में इजाफा हो सकता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2014-15 से अब तक एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के कारण देश ने विदेशी मुद्रा में 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत की है। इससे पेट्रोल आयात पर निर्भरता भी कम हुई है।
पर्यावरण के लिए सकारात्मक कदम
E-20 पेट्रोल ज्यादा नियंत्रित और स्वच्छ तरीके से जलता है। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आ सकती है। उच्च ऑक्टेन रेटिंग के कारण इंजन में ईंधन का दहन बेहतर होता है, जिससे प्रदूषण घटाने में मदद मिलती है।