ब्रेकिंग
इलाज के नाम पर हैवानियत, बीमार बच्चों को पैरो से पकड़कर ज़मीन पर पटकता रहा तांत्रिक... वीडियो देख कांप जाएगी रूह✦कानाफूसी: सचिवालय के 'साहेब' का वसूली गैंग! बॉडीगार्ड-रिश्तेदार से लेकर स्वधर्म वाले शख्स को दिया जिम्मा, सिफारिशी पोस्टिंग वाले निशाने पर...'लक्ष्मी' रिलीज करने का भारी दबाव✦‘तटबंध का पक्कीकरण नहीं हुआ तो अगला चुनाव नहीं लड़ूंगा’, बीजेपी विधायक ने कर दिया एलान✦UG Admission से चूके छात्रों को मिला एक और मौका! बिहार के कॉलेजों में स्पॉट एडमिशन शुरू, यह है आखिरी तारीख✦दिवाली-छठ पर दिल्ली से पटना के लिए चलेगी वंदे भारत स्पेशल? रेलवे ने भेजा प्रस्ताव, जानें रूट और शेड्यूल✦इलाज के नाम पर हैवानियत, बीमार बच्चों को पैरो से पकड़कर ज़मीन पर पटकता रहा तांत्रिक... वीडियो देख कांप जाएगी रूह✦कानाफूसी: सचिवालय के 'साहेब' का वसूली गैंग! बॉडीगार्ड-रिश्तेदार से लेकर स्वधर्म वाले शख्स को दिया जिम्मा, सिफारिशी पोस्टिंग वाले निशाने पर...'लक्ष्मी' रिलीज करने का भारी दबाव✦‘तटबंध का पक्कीकरण नहीं हुआ तो अगला चुनाव नहीं लड़ूंगा’, बीजेपी विधायक ने कर दिया एलान✦UG Admission से चूके छात्रों को मिला एक और मौका! बिहार के कॉलेजों में स्पॉट एडमिशन शुरू, यह है आखिरी तारीख✦दिवाली-छठ पर दिल्ली से पटना के लिए चलेगी वंदे भारत स्पेशल? रेलवे ने भेजा प्रस्ताव, जानें रूट और शेड्यूल

दिल्ली से दिव्यांग ट्राई साइकिल चलाकर आ रहा बिहार, दो सप्ताह में पहुंचा 900 KM

DESK: लॉकडाउन में फंसे दिव्यांग के पास कोई घर जाने के लिए चारा नहीं बचा तो उसने हिम्मत की और वह ट्राई साइकिल से दिल्ली से बिहार के लिए चल पड़ा. दो सप्ताह तक ट्राई साइकिल चलाते

FirstBihar
Manish Kumar
2 मिनट

DESK: लॉकडाउन में फंसे दिव्यांग के पास कोई घर जाने के लिए चारा नहीं बचा तो उसने हिम्मत की और वह ट्राई साइकिल से दिल्ली से बिहार के लिए चल पड़ा. दो सप्ताह तक ट्राई साइकिल चलाते हुए वह करीब 900 किमी की दूरी तय कर यूपी के गाजीपुर पहुंच गया. 

500 किमी से अधिक की दूरी और करना है तय

दिव्यांग के हिम्मत और हौसले को देख सभी दंग है. दिव्यांग बिहार के अररिया जिले का रहने वाला है. उसको घर जाने के लिए अभी 500 किमी की दूरी और तय करना है. जब युवक दिल्ली से निकला था तो उस समय न तो श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने की घोषणा हुई थी और न ही कोई भरोसा मिला था. ऐसे में यह युवक अपने दम पर ही दिल्ली से निकल पड़ा. 

रोज 60 से 65 किमी चलाई सााइकिल

जुबैर बताते हैं कि वह बचपन से ही दिव्यांग है. घर जाने के लिए रोज करीब 60 से 65 किमी तक ट्राई साइकिल चलाया. वह दिल्ली से निकलने से पहले वह गाजीपुर में मछली बेचा करता था, लेकिन दो साल पहले वह दिल्ली नौकरी के लिए चला गया, लेकिन वहां पर कोई नौकरी नहीं मिली और उल्टे ही वह लॉकडाउन में फंस गया. परेशान होकर कुछ भूजा का पैकेट और नमकीन लेकर ही वह गांव के लिए निकल पड़ा. बता दें कि इससे पहले भी कई बिहारी रिक्शा, ठेला और साइकिल से बिहार आ चुके हैं. लेकिन किसी दिव्यांग की दिल्ली से आने का यह संभवत: पहला मामला है. बता दें कि लॉकडाउन के कारण बिहार के लाखों मजदूर दूसरे राज्यों में फंसे हैं. श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने से पहले हजारों पैदल ही अपने घर पहुंच गए. उसके बाद श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला लिया गया. इन ट्रेनों से भी हजारों मजदूरों को अब तक बिहार लाया जा चुका है. 

टैग्स