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Ajit Pawar plane crash : जानिए कौन थे महाराष्ट्र डिप्टी CM अजीत पवार, कहां से शुरू हुई थी राजनीतिक सफ़र; प्लेन हादसे में हुई मौत

अजित पवार, महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता और उपमुख्यमंत्री, बारामती में विमान हादसे में निधन। पढ़ें उनके जीवन, राजनीतिक सफर और महाराष्ट्र पर उनका प्रभाव।

Ajit Pawar plane crash : जानिए कौन थे महाराष्ट्र डिप्टी CM अजीत पवार, कहां से शुरू हुई थी राजनीतिक सफ़र; प्लेन हादसे में हुई मौत
Tejpratap
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6 मिनट

आज सुबह महाराष्ट्र के बारामती (पुणे जिला) में चार्टर्ड विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। घटना के समय विमान रनवे पर उतरने की कोशिश कर रहा था और हादसा तभी हो गया। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार विमान पूरी तरह नियंत्रण खो बैठा और क्रैश हो गया, जिससे विमान का मलबा इधर‑उधर बिखर गया और आग लग गई। प्रारंभिक खबरों में बताया गया कि विमान में चार से पाँच लोग सवार थे, जिनमें से सभी की मृत्यु की पुष्टि हुई है, जिसमें उपमुख्यमंत्री अजित पवार भी शामिल हैं।


अफसरों के अनुसार हादसा संभवतः लैंडिंग के समय एयरक्राफ्ट में तकनीकी खराबी या रनवे पर नियंत्रण खो जाने की वजह से हुआ। विस्तृत जांच अब भारतीय नागर विमानन प्राधिकरण (DGCA) और अन्य संबंधित एजेंसियों द्वारा शुरू कर दी गई है।


अजित पवार कौन थे?

अजित अनंतराव पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को महाराष्ट्र के देओलाली प्रवरा नामक गांव में हुआ था। वे एक किसान परिवार से आते थे और युवावस्था में ही उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियाँ सँभालीं, जिससे उन्हें ग्रामीण और किसानों की समस्याओं की गहरी समझ विकसित हुई। राजनीति में आने से पहले उन्होंने मिल्क यूनियनों, सहकारी समितियों, शुगर फैक्ट्रियों और बैंकों से जुड़कर अपने नेतृत्व कौशल को निखारा। इन्हीं ऐतिहासिक अनुभवों ने उन्हें राजनीति के लिए तैयार किया।


राजनीतिक सफर की शुरुआत

अजित पवार ने 1982 में राजनीति की शुरुआत एक सहकारी संस्था के चुनाव जीतकर की, जो महाराष्ट्र की राजनीति में एक पारंपरिक प्रवेश मार्ग माना जाता है। उनका पहला बड़ा राजनीतिक कदम 1991 में आया जब वे बारामती लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। हालांकि बाद में उन्होंने यह सीट खाली कर दी, लेकिन उसी वर्ष वे विधानसभा सदस्य (MLA) के तौर पर बारामती में चुने गए और महाराष्ट्र की राजनीति में मजबूती से उभर आए।


अजित पवार महाराष्ट्र के डिप्टी चीफ मिनिस्टर (उपमुख्यमंत्री) कई बार रहे — इनकी संख्या इतिहास में छह बार तक पहुँच चुकी थी, जो राज्य में किसी भी नेता की टेक्निकल सर्विस का बड़ा रिकॉर्ड माना जाता है। वे अलग‑अलग समय पर विभिन्न मुख्यमंत्री (Chief Ministers) के तहत उपमुख्यमंत्री रहे — जिसमें देवेंद्र फडणवीस, उद्धव ठाकरे, एकनाथ शिंदे जैसी प्रमुख शख़्सियतें शामिल हैं। पवार ने वित्त, योजना, जल संसाधन, ऊर्जा, सिंचाई और अन्य महत्वपूर्ण विभागों को संभाला। विशेष रूप से उन्हें महाराष्ट्र के बजट और वित्तीय रणनीति का मुख्य सूत्रधार माना जाता था। उनके नेतृत्व में राज्य के बजट और नीतिगत निर्णयों का निर्माण हुआ और आर्थिक योजनाओं को आगे बढ़ाया गया।


अजित पवार को महाराष्ट्र के प्रमुख राजनेताओं में से एक माना जाता था। उनका सियासी अनुभव लगभग चार दशकों से ज्यादा का था और वे NCP के सबसे अधिक सम्मानीय नेताओं में से थे। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, पवार का आर्थिक क्षेत्रों पर अधिकार और गहरी समझ थी, जिसे उन्होंने अपने कई कार्यकालों के दौरान साबित किया। उनका नाम अक्सर राज्य के वार्षिक बजट, योजनाओं और वित्तीय नीतियों के संदर्भ में लिया जाता रहा। उनकी लोकप्रियता सिर्फ पार्टी या सरकार तक सीमित नहीं थी; आम जनता में भी उन्हें एक दृढ़, व्यवहारिक और संवेदनशील नेता के रूप में जाना जाता था।


 2019 के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उथल‑पुथल हुआ। पवार ने उस समय अपने चाचा शरद पवार के नेतृत्व से अलग कदम उठाया और भाजपा‑नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होकर उपमुख्यमंत्री का पद स्वीकार किया। इस फैसले से NCP में विभाजन हुआ। बाद में भाजपा‑शिंदे गठबंधन में उनके नेतृत्व वाले NCP समूह को सांकेतिक “क्लॉक” चिन्ह और नाम निर्वाचन आयोग द्वारा अधिकारिक रूप से दिया गया। इन घटनाओं ने महाराष्ट्र की सियासी दिशा को बदल दिया और पवार को पार्टी के मुखिया के रूप में विस्तृत राजनीतिक पहचान दी।


व्यक्तिगत जीवन और छवि

अजित पवार को अपने समर्थक और आम जनता में “दादा” (बड़ा भाई) के नाम से जाना जाता था। वे जनता से सीधे संपर्क रखकर उनके प्रश्नों का समाधान और जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देते थे — जो उनकी लोकप्रियता का बड़ा कारण था। वे परिवार में विवाहित थे और दो बच्चे थे, तथा राजनीतिक जीवन के साथ‑साथ सामाजिक गतिविधियों में भी रुचि रखते थे।


राजनीतिक जीवन में पवार के निर्णय हमेशा विवादों से मुक्त नहीं रहे। विशेष रूप से 2019 के बाद उनके भाजपा‑सहयोगी कदम ने पार्टी के भीतर और बाहर बहसें छेड़ीं। आलोचक कहते थे कि उन्होंने अपने राजनीतिक दृष्टिकोण पर पारिवारिक और पारंपरिक राजनीति की अपेक्षाओं के खिलाफ निर्णय लिया। उनकी नीतियों और भाषणों पर भी समय‑समय पर आलोचनाएँ और चर्चा रही — जो एक बड़े प्रभावशाली नेता के लिए रणनीतिक राजनीति का हिस्सा मानी जाती हैं।

अजित पवार सिर्फ एक नेता नहीं थे — वे महाराष्ट्र के राजनैतिक परिदृश्य के एक महत्वपूर्ण स्तंभ थे। उनके राजनीतिक अनुभव, नेतृत्व में बहुमुखी भूमिका और संवेदनशीलता ने उन्हें जनता के बीच एक खास सम्मान दिलाया। उनकी अचानक मृत्यु ने राज्य की राजनीति में एक बड़ा शून्य छोड़ दिया है।