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Bihar Election 2025: 95 साल के उम्र में जज्बा, ई-रिक्शा से मतदान करने आ रही बुजूर्ग की हसरत रह गई अधूरी; जानिए क्या हुआ?

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण के मतदान के दौरान रोहतास जिले के सासाराम विधानसभा क्षेत्र से एक हृदयविदारक खबर सामने आई। करसेरुआ पंचायत के खैरा गांव में 95 वर्षीय की मौत मतदान केंद्र से कुछ ही ही दूरी पर हो गई।

Bihar Election 2025
बिहार चुनाव 2025
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PRIYA DWIVEDI
3 मिनट

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे चरण के मतदान के दौरान रोहतास जिले के सासाराम विधानसभा क्षेत्र से एक हृदयविदारक खबर सामने आई। करसेरुआ पंचायत के खैरा गांव में 95 वर्षीय हरिहर सिंह उर्फ हरिद्वार सिंह की मौत मतदान केंद्र से कुछ ही दूरी पर हो गई। लोकतंत्र के इस महापर्व में शामिल होने की उनकी तीव्र इच्छा थी, लेकिन मतदान केंद्र तक पहुंचने से पहले ही उनकी जीवन यात्रा समाप्त हो गई।


परिवार और ग्रामीणों के अनुसार, हरिहर सिंह सेवानिवृत्त पंचायत सेवक थे और अपने जीवन के अंतिम दिनों में भी लोकतंत्र के प्रति उनकी आस्था अटूट थी। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और बिस्तर पर ही थे। बावजूद इसके, उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों से कहा था कि वे 11 नवंबर को मतदान अवश्य करेंगे। परिवार ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए उन्हें ई-रिक्शा पर सहारा देकर मतदान केंद्र की ओर रवाना किया, लेकिन मतदान केंद्र से करीब 100 मीटर पहले ही उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्होंने वहीं अंतिम सांस ली।


ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कुछ दिनों पहले कहा था कि “मैं वोट डालने के बाद ही इस दुनिया को अलविदा कहूंगा।” यह वाक्य अब पूरे गांव में लोगों की जुबान पर है और हर कोई उनकी लोकतंत्र के प्रति निष्ठा की प्रशंसा कर रहा है। उनकी मौत की खबर फैलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई। मतदान केंद्र पर मौजूद अधिकारी और ग्रामीण दोनों ही इस घटना से भावुक हो उठे।


इस घटना ने न केवल लोगों को गहराई से झकझोर दिया है बल्कि यह भी दिखाया है कि लोकतंत्र के प्रति जनता की भावना कितनी प्रबल है। 95 वर्ष की उम्र में भी हरिहर सिंह ने यह साबित कर दिया कि वोट देना केवल अधिकार नहीं, बल्कि कर्तव्य भी है।


चुनाव आयोग के स्थानीय अधिकारियों ने भी इस घटना पर संवेदना व्यक्त की है। मतदान कर्मियों का कहना है कि हरिहर सिंह जैसे मतदाता लोकतंत्र की असली ताकत हैं, जिन्होंने अपने जीवन के अंतिम क्षण तक मतदान करने का संकल्प नहीं छोड़ा। उनकी अंतिम इच्छा भले अधूरी रह गई हो, लेकिन उनकी निष्ठा और लोकतंत्र के प्रति आस्था हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। इस घटना ने न केवल पूरे गांव को बल्कि पूरे जिले को भावुक कर दिया है। लोग अब उन्हें “लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी” के रूप में याद कर रहे हैं, जिन्होंने अपनी अंतिम सांस तक वोट देने के महत्व को जीकर दिखाया।