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Bihar Election 2025 : महागठबंधन में सीटें तय, फिर भी 11 सीटों पर होगी फ्रेंडली फाइट; नामांकन नहीं वापस हुए

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन के घटक दलों के बीच 11 सीटों पर दोस्ताना मुकाबला तय, कांग्रेस, राजद, सीपीआई और वीआईपी के उम्मीदवार आमने-सामने।

Bihar Election 2025 : महागठबंधन में सीटें तय, फिर भी 11 सीटों पर होगी फ्रेंडली फाइट; नामांकन नहीं वापस हुए
Tejpratap
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Bihar Election 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में महागठबंधन के घटक दलों के बीच सीटों को लेकर जारी विवाद ने राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री के चेहरे पर सहमति बन जाने के बावजूद, घटक दलों के बीच 11 सीटों पर आपसी मुकाबला होना तय है। इसमें पांच सीटों पर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और कांग्रेस के उम्मीदवार आमने-सामने होंगे, जबकि अन्य सीटों पर कांग्रेस, सीपीआई, वीआईपी और आईआईपी के उम्मीदवारों के बीच भी दोस्ताना संघर्ष देखने को मिलेगा।


महागठबंधन की साझा प्रेस वार्ता के दौरान गुरुवार को इस मामले पर पूछे गए सवाल पर सीपीआई माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि “कुछ सीटों पर आपस में रणनीतिक मुकाबला होना कोई बड़ी बात नहीं है। एक-दो प्रतिशत वोट इधर-उधर होने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। चुनाव जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, एक-दो प्रत्याशी पीछे हट सकते हैं।” इस बयान से यह साफ हो गया कि महागठबंधन के दल आपसी तालमेल को बनाए रखने के लिए रणनीतिक दृष्टि से ऐसे मुकाबलों को स्वीकार कर रहे हैं।


विश्लेषकों के अनुसार, आगामी चुनाव में कांग्रेस सबसे ज्यादा चुनौती का सामना करेगी। राजद और कांग्रेस के बीच 5 सीटों पर आमने-सामने मुकाबला होगा। वहीं, कांग्रेस और सीपीआई के बीच चार सीटों पर टक्कर होगी। इसके अलावा, राजद और वीआईपी के बीच एक और कांग्रेस और आईआईपी के बीच एक सीट पर प्रतिद्वंद्विता होगी। इस तरह से कुल मिलाकर कांग्रेस को नौ सीटों पर सहयोगी दलों के खिलाफ मुकाबला करना पड़ेगा।


दूसरे चरण के नामांकन वापसी की तारीख गुरुवार को समाप्त हो गई, जिससे महागठबंधन प्रत्याशियों की तस्वीर साफ हो गई। हालांकि, कुछ सीटों पर प्रत्याशियों ने नाम वापस ले लिया, जिससे दो सीटों पर दोस्ताना संघर्ष टल गया। कांग्रेस ने वारिसलीगंज और वीआईपी ने बाबूबरही सीट से अपने उम्मीदवारों का नाम वापस लिया।


राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले मुकाबलों की बात करें तो कहलगांव में राजद के रजनीश भारती और कांग्रेस के प्रवीण कुशवाहा आमने-सामने हैं। वैशाली में कांग्रेस के संजीव सिंह और राजद के अजय कुशवाहा के बीच दोस्ताना टक्कर देखने को मिलेगी। नरकटियागंज में राजद के दीपक यादव और कांग्रेस के शाश्वत केदार पांडेय एक-दूसरे के विरोधी हैं। सिकंदरा में राजद के उदय नारायण चौधरी और कांग्रेस के विनोद चौधरी आमने-सामने हैं, जबकि सुल्तानगंज में राजद के चंदन सिन्हा और कांग्रेस के ललन कुमार के बीच मुकाबला होगा।


सीपीआई और कांग्रेस के बीच भी कड़ा मुकाबला होगा। बछवाड़ा में सीपीआई के अवधेश कुमार राय और कांग्रेस के गरीब दास के बीच संघर्ष है। राजापाकर (सु.) में कांग्रेस विधायक प्रतिमा दास और सीपीआई के मोहित पासवान आमने-सामने हैं। बिहारशरीफ में कांग्रेस के ओमैर खान और सीपीआई के शिवप्रकाश यादव की टक्कर है, जबकि करगहर में कांग्रेस के संतोष मिश्रा और सीपीआई के महेंद्र गुप्ता आमने-सामने हैं।


अन्य सीटों की बात करें तो चैनपुर में राजद के ब्रजकिशोर बिंद और वीआईपी के बालगोविंद बिंद के बीच मुकाबला है। बेलदौर में कांग्रेस के मिथिलेश निषाद और आईआईपी की तनीषा चौहान के बीच भी टक्कर देखने को मिलेगी। इस प्रकार, महागठबंधन के भीतर सहयोगी दलों के बीच दोस्ताना संघर्ष पूरे चुनावी माहौल को रोचक और चुनौतीपूर्ण बनाएगा।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये दोस्ताना टकराव मतदाताओं की प्राथमिकताओं और स्थानीय मुद्दों पर असर डाल सकते हैं। इसके बावजूद महागठबंधन की रणनीति यह रही है कि कुल मिलाकर मुख्यधारा में किसी सीट पर नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। इस प्रकार, महागठबंधन के लिए यह चुनौतीपूर्ण दौर है, लेकिन उन्होंने इसे रणनीतिक दृष्टि से नियंत्रित करने का प्रयास किया है।


इस स्थिति में आगामी चुनाव में प्रत्येक सीट पर उम्मीदवारों की रणनीतियाँ और स्थानीय समीकरण निर्णायक साबित होंगे। महागठबंधन के लिए यह जरूरी है कि वह सहयोगी दलों के बीच संतुलन बनाए रखे और मतदाताओं को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करे। बिहार विधानसभा चुनाव के इस चरण में दोस्ताना संघर्ष के बावजूद महागठबंधन की ताकत का परीक्षण होगा, और यह देखने वाली बात होगी कि ये मुकाबले किस तरह के परिणाम लेकर आते हैं।

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