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फ्लिपकार्ट को लाखों का चूना लगाने वाले 5 शातिर गिरफ्तार, डिलीवरी बॉय के साथ मिलकर कर रहे थे बड़ा खेल

रोहतास के डेहरी में फ्लिपकार्ट से महंगे सामान मंगाकर उनकी जगह नकली उत्पाद लौटाने वाले गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। मामले में मास्टरमाइंड समेत 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। उनके पास से कैमरा, मोबाइल, लैपटॉप और कार बरामद हुई है।

बिहार न्यूज
पुलिस की बड़ी कार्रवाई
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

ROHTAS: रोहतास जिले के डेहरी से ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो डिलीवरी बॉय की मिलीभगत से महंगे सामान मंगवाकर उनकी जगह नकली या कम कीमत वाले सामान रखकर वापस कर देता था। इस तरह आरोपी कंपनी को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचा रहे थे।


मामले में पुलिस ने पांच शातिर जालसाजों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान समस्तीपुर जिले के उजियारपुर निवासी सत्यकाम चौधरी, अमर राजा, चंदन कुमार, प्रदीप कुमार और हर्षल कुमार के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, सत्यकाम चौधरी इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड है।


शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

बताया जा रहा है कि फ्लिपकार्ट के स्थानीय संचालक को लगातार महंगे उत्पादों की संदिग्ध रिटर्निंग की शिकायतें मिल रही थीं। जांच में यह सामने आया कि कुछ ग्राहक महंगे इलेक्ट्रॉनिक और अन्य कीमती सामान ऑर्डर करते थे, लेकिन रिटर्न के समय असली उत्पाद की जगह नकली या कम कीमत वाला सामान भेज देते थे। लगातार बढ़ती शिकायतों के बाद फ्लिपकार्ट प्रबंधन ने पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने तकनीकी और स्थानीय स्तर पर जांच शुरू की, जिसमें इस पूरे गिरोह का खुलासा हुआ।


डिलीवरी बॉय की मिलीभगत से होता था खेल

पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी डिलीवरी बॉय की मिलीभगत से इस ठगी को अंजाम देते थे। पहले महंगे उत्पाद मंगवाए जाते थे, फिर उन्हें अपने पास रखकर रिटर्न प्रक्रिया के दौरान नकली या सस्ते सामान पैक कर वापस भेज दिया जाता था। इस तरह कंपनी को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था।


महंगे सामान और कार बरामद

पुलिस ने आरोपियों के पास से एक महंगा कैमरा, सात मोबाइल फोन, दो लैपटॉप और एक कार बरामद की है। बरामद सामानों की जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि इनमें से कितने उत्पाद धोखाधड़ी के जरिए हासिल किए गए थे।


40 हजार रुपये महीने पर रखा था एक्सपर्ट

जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। गिरोह ने इस पूरे फर्जीवाड़े को संचालित करने के लिए 40 हजार रुपये मासिक वेतन पर एक विशेषज्ञ को भी रखा था, जो उन्हें तकनीकी और अन्य स्तर पर मदद करता था तथा धोखाधड़ी के तरीकों की जानकारी देता था।


अन्य कड़ियों की तलाश में जुटी पुलिस

डेहरी के एएसपी अतुलेश झा ने बताया कि गिरफ्तार सभी आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह का नेटवर्क बिहार के अन्य जिलों या राज्यों तक फैला हुआ है या नहीं। मामले में और भी लोगों की संलिप्तता की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और इस धोखाधड़ी से जुड़े अन्य लोगों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

RANJAN

FirstBihar संवाददाता