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मोबाइल की EMI नही भरा तो युवक को उठा ले गए रिकवरी एजेंट, ब्लड बैंक ले जाकर खून निकालकर बेचा

लखनऊ के निगोहां में मोबाइल की 2,799 रुपये की बकाया किस्त वसूलने के लिए युवक को कथित तौर पर अगवा कर पांच दिन तक बंधक बनाने का आरोप लगा है। परिजनों ने रिकवरी एजेंटों पर मारपीट करने और ब्लड बैंक ले जाकर एक यूनिट खून निकलवाने का भी गंभीर आरोप लगाया है।

Mobile EMI Dispute
प्रतिकात्मक तस्वीर
© Google
Mukesh Srivastava
4 मिनट

Mobile EMI Dispute: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। निगोहां थाना क्षेत्र में मोबाइल की एक किस्त की वसूली को लेकर एक युवक को कथित तौर पर अगवा कर करीब पांच दिनों तक बंधक बनाकर रखने और उसके साथ मारपीट करने का आरोप मोबाइल रिकवरी एजेंटों पर लगा है। परिवार ने यह भी दावा किया है कि आरोपियों ने युवक को एक ब्लड बैंक ले जाकर उसका एक यूनिट खून निकलवाया और उसे बेच दिया। हालांकि, खून बेचने के आरोप की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।



परिजनों के मुताबिक, नवल नाम के युवक ने सितंबर 2025 में करीब 21 हजार रुपये का मोबाइल जीरो डाउन पेमेंट पर फाइनेंस कराया था। उसकी करीब 2,799 रुपये की एक मासिक किस्त बकाया थी। आरोप है कि इसी रकम की वसूली के लिए रिकवरी एजेंट शुभम सिंह और उसका एक साथी पहले नवल के घर पहुंचे थे।



परिवार का आरोप है कि इसके बाद मंगलवार को दोनों नवल को स्कूटी पर बैठाकर अपने साथ ले गए। आरोपियों ने उसे एक स्थान पर कथित तौर पर बंधक बनाकर रखा और उसके साथ मारपीट की। इस दौरान उसके मोबाइल से परिवार का नंबर लेकर आरोपियों ने परिजनों से संपर्क किया और बकाया किस्त के पैसे मांगे।



परिजनों के अनुसार, आरोपियों ने नवल को जान से मारने की धमकी भी दी। डर के चलते परिवार ने UPI के जरिए 2,799 रुपये आरोपियों को ट्रांसफर किए। नवल के घर लौटने के बाद उसने कथित तौर पर परिजनों को बताया कि बंधक बनाए जाने के दौरान उसे खाना तक नहीं दिया गया। प्यास लगने पर पानी नहीं देने का भी आरोप लगाया गया है।



परिवार के मुताबिक, आरोपियों ने अगले दिन दोबारा फोन कर 12,500 रुपये की मांग की। इसके बाद परिजनों ने निगोहां थाने पहुंचकर दरोगा मोहित को पूरे मामले की जानकारी दी। इस पूरे मामले में सबसे गंभीर आरोप ब्लड बैंक से जुड़ा है। परिवार का दावा है कि आरोपियों ने नवल को एक ब्लड बैंक ले जाकर उसका एक यूनिट खून निकलवाया। परिजनों ने आरोप लगाया है कि इस खून को बेच दिया गया।



हालांकि, पुलिस जांच में अभी यह स्पष्ट होना बाकी है कि युवक को वास्तव में ब्लड बैंक ले जाया गया था या नहीं और यदि ऐसा हुआ तो खून निकलवाने की वजह क्या थी। यदि जांच में परिवार के आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला कथित जबरन वसूली और अपहरण के अलावा युवक को शारीरिक नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोपों तक पहुंच सकता है।



परिवार के अनुसार, शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपियों से संपर्क कर नवल को छोड़ने के लिए कहा। इसके बाद शनिवार शाम नवल को ऑटो से थाने भेज दिया गया। परिजनों का आरोप है कि नवल के थाने पहुंचने के बाद भी पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं किया। इसके बाद परिवार ने डीसीपी दक्षिणी मो. मुश्ताक से शिकायत की।



डीसीपी के निर्देश के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। मामले की जांच के लिए तीन पुलिस टीमें आरोपियों की तलाश में लगाई गई हैं। वहीं, डीसीपी ने थाने की पुलिस पर लगे कथित लापरवाही के आरोपों की भी जांच के निर्देश दिए हैं। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और आरोपियों की तलाश जारी है।

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता