Bihar News: बिहार की शराबबंदी को सरकारी सिस्टम ही विफल कर रहा. उत्पाद विभाग के अधिकारी माफियाओं से अधिक खतरनाक साबित हो रहे. हालांकि सब कुछ जानते हुए भी सरकार अनजान बनी रहती है. उत्पाद अधीक्षक के कारनामों से मद्य निषेध विभाग पूरी तरह से वाकिफ है. इसके बाद भी कोई असर नहीं. शराब के अवैध कारोबार में लिप्त उत्पाद अधीक्षक बक्सर से जहानाबाद पहुंच गए. यहां भी शराब से वसूली का खेल सामने आ गया. बड़ी मुश्किल से मैनेज किया गया.
जिला चाहे जो हो..वसूली की चर्चा में रहते हैं उत्पाद अधीक्षक
उत्पाद विभाग के एक अधिकारी की खूब चर्चा हो रही. चर्चा अच्छे कामों में नहीं बल्कि वसूली में हो रही है. बक्सर में शराब के अवैध कारोबार में संलिप्तता सामने आने पर 2024 में चर्चा हुई. तब वे बक्सर जिले में उत्पाद अधीक्षक के पद पर पदस्थापित थे. शराब माफियाओं से सेटिंग कर यूपी से बिहार में शराब की खेप पहुंचाने में उत्पाद अधीक्षक का नाम आया. बक्सर पुलिस ने जांच में आरोपों को सही पाया. इसके बाद पुलिस अधीक्षक के आदेश पर अप्राथमिक अभियुक्त बनाए गए. गिरफ्तारी के डर से भागे रहे. फऱार रहने और शराब कांड में नाम आने के बाद उत्पाद विभाग ने आरोपी उत्पाद अधीक्षक को सस्पेंड कर दिया. 2-3 महीनों के बाद निलंबन टूटा तो मद्य निषेध विभाग ने शराब कांड के आरोपी अफसर को जहानाबाद का उत्पाद अधीक्षक बना दिया. हम बता कर रहे हैं जहानाबाद के वर्तमान उत्पाद अधीक्षक दिलीप कुमार पाठक की.
बक्सर के बाद जहानाबाद में वसूली कांड की चर्चा
बक्सर में शराब कांड में नाम आने के बाद जहानाबाद में आम लोगों को शराब पीने का आरोप लगाकर अपहरण कर लाखों की वसूली के आरोप लगे. आरोप जहानाबाद के उत्पाद अधीक्षक दिलीप कुमार पाठक के मातहत (इंस्पेक्टर और दारोगा) पर लगे. शिकायत के बाद जबरन वसूली गई राशि (2.10 लाख) वापस करना पड़ा. तब जाकर बड़ी मुश्किल से मामले को रफा-दफा किया जा सका.
टॉर्चर के बाद 2.10 लाख की हुई थी वसूली
घटना 9 मार्च 2026 की है. जहानाबाद उत्पाद अफसरों ने दो लोगों को पकड़कर टॉर्चर किया था. इसके बाद 2.10 लाख की वसूली की गई थी. पीड़ित ने जहानाबाद के जिलाधिकारी से शिकायत कर दी. साथ ही पीड़ित के पिता ने बयान जारी कर उत्पाद विभाग के अफसरों के कारनामों को सामने ला दिया. उन्होंने बताया कि हमने जहानाबाद के उत्पाद अधीक्षक दिलीप पाठक से शिकायत की. इसके बाद जिलाधिकारी के पास पहुंचे. जिलाधिकारी ने अधीक्षक को इस मामले में या तो पैसा वापस करे या फिर आगे की कार्रवाई करने को कहा. बताया जाता है कि शिकायत के बाद उत्पाद अधीक्षक जहानाबाद ने मैनेज करने का काम शुरू किया. खुद पीड़ित अम्पू कुमार के पिता मिथिलेश सिंह ने बयान दिया था कि, मैडम के आदेश और अधीक्षक की पहल पर पहले 1.50 लाख वापस किया गया इसके बाकी का 60 हजार. इस तरह से रिहाई के बदले वसूली गई राशि कुल 2 लाख 10 हजार रू वापस किया गया.
शपथ पत्र देने से वसूली गैंग का पाप धूल जाएगा ?
रिश्वत की रकम वापसी के बाद शिकायत वापस लेने का खेल रचा गया. दोनों पीड़ितों ने कार्यपालक दंडाधिकारी के समक्ष शपथ पत्र कर शिकायत वापस लेने की गुहार लगाई. शपथ पत्र में पीड़ित अम्पू कुमार और श्यामसुंदर शर्मा ने बयान दिया कि हम लोगों ने उत्पाद विभाग के निरीक्षक मुकेश कुमार, अवर निरीक्षक रणजीत सिंह, सहायक अवर निरीक्षक संतोष कुमार एवं सहायक अवर निरीक्षक नरदीप सिंह पर मारपीट करने एवं 2 लाख 10 हजार रुपया लेने के संबंध में शिकायत किया था . यह सत्य नहीं है. दरअसल, हम लोग सख्त जांच के कारण आवेश में आकर उक्त आवेदन को दिया था. उक्त आवेदक को हम लोग स्वेच्छा से बिना किसी दबाव में वापस ले रहे हैं. इस तरह से मामले को रफा-दफा किया गया.
अधीक्षक दिलीप पाठक ने बक्सर में क्या खेल किया था....
बक्सर के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक दिलीप कुमार पाठक (वर्तमान में जहानाबाद के उत्पाद अधीक्षक) के खिलाफ बक्सर के जिलाधिकारी ने 21 जून 2025 को विभाग को रिपोर्ट किया था. जिसमें जानकारी दी गई थी, इन्हें बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद (संशोधन) अधिनियम, 2018 के तहत अप्राथमिकी अभियुक्त बनाया गया है. साथ ही पुलिस अधीक्षक, बक्सर के प्रतिवेदन के अनुसार कांड के पर्यवेक्षण में दिलीप पाठक के खिलाफ प्रमाण मिले, जिस आधार पर इन्हें बक्सर के औद्योगिक थाना कांड में अप्राथमिक अभियुक्त बनाया गया. इस आरोप में मद्य निषेध विभाग ने 20 अगस्त 2025 को विभागीय कार्यवाही चलाने का आदेश जारी किया. रेणू कुमारी सिन्हा, उपायुक्त मद्यनिषेध को संचालन पदाधिकारी नियुक्त किया गया था.
आरोपी को बचाया...अप्रमाणित रिपोर्ट देकर सेवानिवृत हो गई रेणू सिन्हा....
संचालन पदाधिकारी रेणु कुमारी सिन्हा जो वर्तमान में सेवानिवृत हो गई हैं, इन्होंने 27 फरवरी 2026 को अंतिम जाँच प्रतिवेदन समर्पित किया. जिसमें तथ्यों, गवाहों एवं तत्समय संयुक्त आयुक्त मद्यनिषेध के जाँच के आलोक में बक्सर के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक दिलीप कुमार पाठक के खिलाफ अनाधिकृत उपस्थिति एवं शराब तस्करों से सांठ-गांठ कर शराब परिवहन वाले वाहन की जांच किये बिना चेकपोस्ट से जाने देने का आरोप अप्रमाणित पाया.
माफियाओं से सांठगांठ करने वाले उत्पाद अधीक्षक को बचाने की कोशिश
संचालन पदाधिकारी ने शराब माफिया से सांठगांठ करने के आरोपी अधीक्षक दिलीप पाठक को क्लिनचिट देने वाली रिपोर्ट की समीक्षा विभाग के स्तर पर की गई। समीक्षा में पाया गया कि आरोप पत्र के चौथे भाग के 'ख' में अंकित साक्ष्य जिनकी रिपोर्ट के आधार पर आरोप पत्र गठन किया गया था, उसका नियमानुसार परीक्षण /प्रतिपरीक्षण नहीं किया गया.
संचालन पदाधिकारी ने आरोपों की नहीं की सघन जांच
संचालन पदाधिकारी (रेणू कुमारी सिन्हा) द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट में SDPO डुमरॉव द्वारा केस से संबंधित साक्ष्य 23 फरवरी 2026 तक उपलब्ध नहीं कराने की बात कही गयी है. यह कहकर जाँच प्रतिवेदन विभाग को समर्पित कर दिया गया. मद्य निषेध विभाग ने समीक्षा में पाया कि, जिस प्रतिवेदन पर दिलीप पाठक के खिलाफ आरोप पत्र गठित किया गया था, उसकी गहन समीक्षा संचालन पदाधिकारी द्वारा नहीं की गई।
बक्सर में कैसे हुआ था मामला उजागर ?
बक्सर के तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक दिलीप कुमार पाठक का शराब माफियाओं से सांठगांठ के इस राज़ से पर्दा उस वक्त उठा, जब 21 जून 2024 को बक्सर औद्योगिक थाना की पुलिस ने वीर कुंवर सिंह सेतु से यूपी के रास्ते बिहार में प्रवेश कर रही तीन गाड़ियों को गुप्त सूचना के आधार पर धर दबोचा, जिसमें शराब माफियाओं के साथ साथ होमगार्ड के दो जवान भी पुलिस के हत्थे चढ़े. इनसे पूछताछ के दौरान एक ऐसे शराब माफिया का नाम सामने आया, जो 2022 में बक्सर जिले के मुरार थाना क्षेत्र के अंमसारी गांव में हुए जहरीली शराब कांड में मुख्य आरोपी रहा था. उस जहरीली शराब कांड में पांच लोगों की मौत हो चुकी थी. हालांकि जब पुलिस ने जब उस आरोपी मुन्ना सिंह से पूछताछ की तो उसने उत्पाद अधीक्षक दिलीप पाठक की संलिप्तता बताते हुए कहा कि 2016 से ही दिलीप पाठक हम लोगों से मोटी रकम लेकर यूपी से बिहार में शराब की बड़ी-बड़ी खेप पहुंचाते थे.
तब बक्सर एसपी ने क्य़ा कहा था.....
बता दें, तत्कालीन उत्पाद अधीक्षक दिलीप पाठक लंबे समय से बक्सर में पदस्थापित रहे. 2016 में बक्सर उत्पाद विभाग में निरीक्षक के पद पर तैनात थे, बक्सर जिले में तीसरी बार में उनकी पोस्टिंग उत्पाद अधीक्षक के तौर पर हुई थी. इस मामले में पुलिस के बारिकी से अनुसंधान कर करने पर पता चला कि उत्पाद अधीक्षक दिलीप पाठक की शराब माफियाओं के सांठगांठ है, जिसके पुलिस को पुख्ता सबूत भी मिले. इस पुख्ता सबूत के आधार पर पुलिस ने गिरफ्तारी का आदेश जारी किया था.
तब पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार ने बताया था कि 21 जून 2024 को औद्योगिक थाना क्षेत्र अंतर्गत NH 922 पर शराब लदी तीन गाड़ियां पकड़ी गई थीं, जिसमें कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया था. इनसे पूछताछ के दौरान कई अहम पुख्ता सबूत मिले. इस आधार पर उत्पाद अधीक्षक के खिलाफ गिरफ्तारी का आदेश निर्गत किया गया.





