1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 08, 2026, 5:08:49 PM
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UPSC CSE JOINING PROCESS: हर साल लाखों युवा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा पास करके देश की प्रशासनिक सेवाओं में जाने का सपना देखते हैं। कई वर्षों की कड़ी मेहनत और तैयारी के बाद जब उम्मीदवार इस परीक्षा को पास करते हैं, तो उनके मन में यह सवाल भी होता है कि क्या परीक्षा पास करते ही उन्हें तुरंत नौकरी मिल जाती है। दरअसल, UPSC CSE पास करने के बाद उम्मीदवारों को सीधे नौकरी जॉइन नहीं करनी होती। इसके बाद कई जरूरी प्रक्रियाएं और ट्रेनिंग पूरी करनी होती है। आइए जानते हैं पूरा प्रोसेस पॉइंट्स में।
फाइनल मेरिट लिस्ट और सर्विस अलॉटमेंट
UPSC परीक्षा के तीनों चरण (प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू) पूरा होने के बाद आयोग फाइनल मेरिट लिस्ट जारी करता है। इसी मेरिट के आधार पर उम्मीदवारों को अलग-अलग सेवाएं जैसे IAS, IPS, IFS, IRS या अन्य केंद्रीय सेवाओं में नियुक्ति दी जाती है। उम्मीदवार की रैंक, पसंद और सीटों की उपलब्धता के आधार पर सर्विस तय होती है।
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन
चयनित उम्मीदवारों के सभी शैक्षणिक और व्यक्तिगत दस्तावेजों की जांच की जाती है। इसमें उम्मीदवारों को अपने मूल प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने होते हैं ताकि उनकी योग्यता और अन्य विवरणों की पुष्टि की जा सके।
मेडिकल परीक्षा
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद उम्मीदवारों की मेडिकल जांच कराई जाती है। इसमें यह देखा जाता है कि उम्मीदवार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रशासनिक जिम्मेदारियों को निभाने के लिए पूरी तरह फिट हैं या नहीं।
मसूरी में फाउंडेशन कोर्स (Foundation Course)
सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद चयनित उम्मीदवारों को उत्तराखंड के मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में ट्रेनिंग के लिए बुलाया जाता है। यहां लगभग 15 सप्ताह का फाउंडेशन कोर्स कराया जाता है, जिसमें प्रशासन, कानून, नीति निर्माण और नेतृत्व से जुड़ी बुनियादी जानकारी दी जाती है।
स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग
फाउंडेशन कोर्स के बाद अलग-अलग सेवाओं के अधिकारियों को उनकी सर्विस के अनुसार विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। उदाहरण के लिए IAS अधिकारियों की ट्रेनिंग LBSNAA में विभिन्न चरणों में लगभग दो साल तक चलती है। वहीं IPS, IFS और अन्य सेवाओं के अधिकारियों को उनके संबंधित प्रशिक्षण संस्थानों में भेजा जाता है।
फील्ड ट्रेनिंग
बेसिक ट्रेनिंग पूरी होने के बाद खासतौर पर IAS अधिकारी प्रशिक्षुओं को उनके आवंटित राज्य में भेजा जाता है। वहां वे जिला प्रशासन में काम करते हुए फील्ड ट्रेनिंग लेते हैं और एसडीएम या सहायक कलेक्टर के रूप में प्रशासनिक कामकाज को करीब से समझते हैं।
ट्रेनिंग के दौरान स्टाइपेंड
ट्रेनिंग के दौरान उम्मीदवारों को नियमित वेतन नहीं दिया जाता, बल्कि उन्हें स्टाइपेंड मिलता है। आमतौर पर यह टेक-होम स्टाइपेंड लगभग 35,000 से 40,000 रुपये तक होता है।
इस तरह UPSC CSE पास करने के बाद उम्मीदवार सीधे अधिकारी के रूप में काम शुरू नहीं करते, बल्कि एक लंबी ट्रेनिंग और विभिन्न प्रक्रियाओं से गुजरते हैं। यही प्रक्रिया उन्हें एक सक्षम और जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए तैयार करती है।