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पिता के साथ पान बेचता था अरविंद कुमार, बीडीओ बनकर जब गांव लौटा तब हुआ भव्य स्वागत

KHAGARIA: मेले में पिता के साथ पान बेचने वाले अरविंद कुमार ने अपनी मेहनत के बदौलत आज जो मुकाम हासिल किया उसकी चर्चा पूरे खगड़िया जिले में हो रही है। अरविंद कुमार अब बीडीओ यानी

पिता के साथ पान बेचता था अरविंद कुमार, बीडीओ बनकर जब गांव लौटा तब हुआ भव्य स्वागत
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

KHAGARIA: मेले में पिता के साथ पान बेचने वाले अरविंद कुमार ने अपनी मेहनत के बदौलत आज जो मुकाम हासिल किया उसकी चर्चा पूरे खगड़िया जिले में हो रही है। अरविंद कुमार अब बीडीओ यानी प्रखंड विकास पदाधिकारी बन चुके हैं। बीडीओ बनने के बाद जब अरविंद गांव लौटे तब उनके स्वागत में पूरा गांव सामने आ गये। बैंड बाजों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया गया। 


गौरतलब है कि बीपीएससी में 278वीं रैंक लाकर अरविंद कुमार प्रखंड विकास पदाधकारी के पद पर चयनित हुए हैं। वे खगड़िया के गोगरी प्रखंड के गौछारी गांव के रहने वाले हैं। पिता नेपाली चौरसिया के साथ वे मेले में पान की दुकान लगाते थे। आज जब वे बीडीओ बनकर गांव लौटे तब ग्रामीणों ने उनका बैंड बाजों के साथ जोरदार स्वागत किया। 


आज अरविंद युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बन गये हैं। खेदन बद्री चौरसिया स्कूल से उन्होंने पढ़ाई की थी। स्कूल में सम्मान समारोह आयोजित किया गया जहां स्कूल के प्राचार्य और शिक्षकों ने उनका स्वागत किया। उनकी सफलता को लेकर उन्हें बधाई दी गयी। इस मौके पर कई ग्रामीण और छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। 


ग्रामीण, स्कूल के प्राचार्य और शिक्षकों द्वारा बेटे को सम्मान मिलने से अरविंद के पिता काफी खूश हैं। उनका कहना है कि मजदूरी कर उन्होंने अपने बेटे को पढ़ाया है। मेले में पान की दुकान लगाकर उन्होंने बेटे की पढ़ाई के लिए पैसे जुटाए। उनकी हर जरूरतों को पूरा किया। 


उनके काम में बेटा भी हाथ बंटाया करता था। वही अरविंद की मां मीरा देवी ने बताया कि वह घर पर कपड़े सिला करती थी। अरविंद बचपन से ही पढ़ने में बहुत तेज था। उसकी पढाई में किसी तरह की कोई कमी ना रहे इसके लिए मां भी सिलाई कढ़ाई किया करती थी।  


वही खेदन बद्री चौरसिया उच्च विद्यालय के पूर्व प्राचार्य दिवाकर प्रसाद दिलेरी ने बताया कि अरविंद पढ़ने में बहुत तेज था उसकी प्रतिभा को देखकर ही उन्हें पहले ही लग रहा था कि एक ना एक दिन वह अधिकारी बनेगा और आज उनका यह अनुमान सही हो गया। अरविंद की इस सफलता से दिवाकर प्रसाद दिलेरी भी काफी खुश है। 


अरविंद जब अपने गांव पहुंचे तब परिवार के सदस्यों के साथ गांव के दुर्गा मंदिर में पहुंचकर उन्होंने पूजा अर्चना की। इसके बाद स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने अरविंद को पूरे गांव में भ्रमण कराया। इस दौरान जगह जगह उनका भव्य स्वागत किया गया।



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