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पिता की सिलाई मशीन से बुना सपना, बेटी शाजिया ने किया साकार: आर्ट्स में बिहार की तीसरी टॉपर बनकर रचा इतिहास

Bihar Board 12th Result 2026: नालंदा जिले की शाजिया अंसारी ने इंटरमीडिएट 2026 में आर्ट्स संकाय में पूरे बिहार में तीसरा स्थान हासिल कर साबित कर दिया कि मेहनत और लगन से सीमित संसाधनों में भी बड़े मुकाम हासिल किए जा सकते हैं। यह कहानी छोटे गांव की बेटी

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 23, 2026, 5:26:40 PM

पिता की सिलाई मशीन से बुना सपना, बेटी शाजिया ने किया साकार: आर्ट्स में बिहार की तीसरी टॉपर बनकर रचा इतिहास

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Bihar Board 12th Result 2026: कहते हैं कि मेहनत और हौसले के आगे कोई भी मुश्किल बड़ी नहीं होती। अगर इरादे मजबूत हों, तो सीमित संसाधनों में भी आसमान छुआ जा सकता है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी बिहार के नालंदा जिले से सामने आई है, जहां एक दर्जी पिता की बेटी ने अपनी काबिलियत से पूरे राज्य में नाम रोशन कर दिया।


बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा इंटरमीडिएट 2026 का परिणाम घोषित होते ही जहां पूरे प्रदेश में खुशी की लहर दौड़ गई, वहीं नालंदा जिले के एक छोटे से गांव करायपरसुराय में जश्न का माहौल बन गया। यहां की रहने वाली शाजिया अंसारी ने आर्ट्स संकाय में पूरे बिहार में तीसरा स्थान हासिल कर एक नई मिसाल कायम की है।


शाजिया ने कुल 477 अंक प्राप्त किए हैं, जो कि 95.40 प्रतिशत है। इस शानदार प्रदर्शन के साथ उसने टॉप-3 में अपनी जगह बनाई और यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी शहर या बड़े संसाधनों की मोहताज नहीं होती।


शाजिया की सफलता इसलिए और भी खास हो जाती है क्योंकि उसका परिवार आर्थिक रूप से बेहद साधारण है। उसके पिता कर्नाटक में सिलाई का काम करते हैं और दिन-रात मेहनत करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं। मां शहनाज बानो एक गृहिणी हैं, जो घर संभालते हुए बेटी को पढ़ाई के लिए प्रेरित करती रहीं। सीमित आमदनी के बावजूद माता-पिता ने कभी भी शाजिया की पढ़ाई में कमी नहीं आने दी।


शाजिया ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के ही मध्य विद्यालय डियामा से की और आगे की शिक्षा प्लस टू स्कूल करायपरसुराय से पूरी की। खास बात यह है कि उसने कभी शहर जाकर पढ़ाई करने की जरूरत नहीं समझी। गांव में रहते हुए ही उसने अपनी मेहनत और लगन से यह मुकाम हासिल किया।


शाजिया बताती हैं कि बचपन से ही उनका मन पढ़ाई में लगता था। वह नियमित रूप से पढ़ाई करती थीं और समय का सही उपयोग करती थीं। उनका मानना है कि अगर लक्ष्य साफ हो, तो रास्ते खुद बन जाते हैं। पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें दूसरों को पढ़ाना भी पसंद है और यही वजह है कि वह आगे चलकर एक शिक्षक बनना चाहती हैं, ताकि समाज में शिक्षा का उजाला फैला सकें।


इस उपलब्धि का श्रेय शाजिया अपने माता-पिता और शिक्षकों को देती हैं। उनका कहना है कि पिता ने कठिन परिस्थितियों में भी कभी हिम्मत नहीं हारी और हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वहीं शिक्षकों ने सही मार्गदर्शन देकर उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया।


शाजिया की इस सफलता से उनके परिवार में खुशी का माहौल है। गांव के लोग भी इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं। हर कोई उसकी मेहनत और लगन की तारीफ कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सफलता उन लोगों के लिए एक सीख है, जो यह सोचते हैं कि अच्छी पढ़ाई के लिए शहर जाना जरूरी है।