Bihar Bhumi News: बिहार में सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन लेने की प्रक्रिया अब आसान हो सकती है. राज्य सरकार ने बिहार रैयती भूमि क्रय नीति-2026 को मंजूरी दे दी है. नई नीति के तहत सरकारी परियोजनाओं के लिए निजी जमीन मालिकों से आपसी सहमति के आधार पर जमीन खरीदी जा सकेगी. जमीन के बदले मिलने वाले मुआवजे के अलावा भू-स्वामियों को 10 फीसदी अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी.
नई नीति का सबसे बड़ा फायदा ग्रामीण क्षेत्रों के जमीन मालिकों को मिल सकता है. ग्रामीण क्षेत्र में जमीन के बाजार मूल्य या सर्किल रेट, जो भी अधिक होगा, उसके चार गुना तक मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है. वहीं शहरी क्षेत्र में जमीन के बाजार मूल्य या सर्किल रेट के दोगुने तक मुआवजा दिया जा सकेगा.
इसके अलावा जमीन मालिकों को तय मुआवजे के ऊपर 10 फीसदी अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि मिलेगी. सरकारी परियोजनाओं के लिए खरीदी जाने वाली जमीन पर स्टांप शुल्क और निबंधन शुल्क भी नहीं देना होगा. इससे जमीन मालिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा.
जमीन मालिकों की सहमति से होगी खरीद
नई नीति में जमीन की खरीद आपसी सहमति के आधार पर करने पर जोर दिया गया है. सरकार सीधे जमीन मालिकों से बातचीत कर जमीन खरीद सकेगी. इसका उद्देश्य जमीन अधिग्रहण से जुड़े लंबे कानूनी विवादों को कम करना और सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन जुटाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है.
सरकारी परियोजनाओं में सड़क, पुल, रेलवे, अस्पताल समेत कई तरह की विकास योजनाएं शामिल हो सकती हैं. नई व्यवस्था के तहत जमीन खरीद की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने की कोशिश की गई है.
100 करोड़ तक की परियोजना पर डीएम की समिति लेगी फैसला
जमीन खरीद से जुड़े फैसलों के लिए परियोजना की लागत के आधार पर अलग-अलग समितियां बनाई जाएंगी. 100 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं के लिए जिला स्तरीय समिति फैसला लेगी. इस समिति की अध्यक्षता जिलाधिकारी करेंगे.
वहीं 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली परियोजनाओं के लिए प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति निर्णय लेगी. इससे बड़ी और छोटी परियोजनाओं के लिए जमीन खरीद से जुड़े फैसले अलग-अलग स्तर पर लिए जा सकेंगे.
जमीन लेने के तीन विकल्प होंगे
सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन जुटाने के लिए सरकार के पास तीन विकल्प होंगे. इनमें बिहार रैयती भूमि क्रय नीति-2026, सीधे भूमि अधिग्रहण और लैंड पुलिंग शामिल हैं.
पहले विकल्प के तहत जमीन मालिकों की सहमति से जमीन खरीदी जाएगी. दूसरे विकल्प में सरकार भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपना सकती है. इसमें ग्रामीण क्षेत्र के भू-स्वामियों के लिए चार गुना और शहरी क्षेत्र के भू-स्वामियों के लिए दोगुना मुआवजा देने का प्रावधान है.
तीसरे विकल्प के तौर पर लैंड पुलिंग की व्यवस्था होगी. इसमें जमीन मालिकों से जमीन लेकर उस क्षेत्र का विकास किया जाएगा. इसके बाद विकसित जमीन का 55 फीसदी हिस्सा भू-स्वामियों को वापस दिया जाएगा. इस हिस्से में सड़क, बिजली, पानी और सीवर जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी.
लैंड पुलिंग व्यवस्था में जमीन मालिकों को उनकी जमीन के बदले विकसित जमीन का हिस्सा वापस मिलेगा. विकास के बाद उस क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी और सीवर जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने से जमीन की उपयोगिता और कीमत बढ़ने की संभावना रहती है.
इस व्यवस्था में जमीन का एक हिस्सा विकास कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि बाकी विकसित हिस्सा जमीन मालिकों को लौटाया जाएगा. सरकार का उद्देश्य टाउनशिप और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराने के साथ जमीन मालिकों को भी उसका लाभ देना है.
नई नीति को मंजूरी मिलने के बाद नगर विकास एवं आवास विभाग ने पटना के पाटलिपुत्र और गया में प्रस्तावित टाउनशिप के लिए किसानों से बातचीत शुरू कर दी है. किसानों को जमीन देने के तीनों विकल्पों के बारे में जानकारी दी जा रही है.





