Vikramshila Setu: भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर प्रस्तावित कार्य के कारण आने वाले दिनों में आवागमन प्रभावित होने की आशंका को लेकर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने चिंता जताई है। पूर्व सांसद अनिल यादव के तिनटंगा दियारा स्थित आवास पर विभिन्न पंचायतों के मुखिया, पूर्व मुखिया, सरपंच, पूर्व सरपंच और वार्ड सदस्यों की बैठक हुई। इसमें क्षेत्र की समस्याओं और संभावित परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में जनप्रतिनिधियों ने कहा कि विक्रमशिला सेतु सिर्फ भागलपुर और नवगछिया को जोड़ने वाला पुल नहीं है, बल्कि यह पूरे उत्तरी बिहार के आवागमन और व्यापार-व्यवसाय की महत्वपूर्ण जीवनरेखा है। पुल पर लंबे समय तक आवागमन प्रभावित होने से भागलपुर, नवगछिया समेत उत्तरी बिहार के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसका सीधा असर व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ने की आशंका जताई गई।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि आने वाले दो-तीन महीने बेहद महत्वपूर्ण हैं। एक ओर क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति बनी रहती है, वहीं दूसरी ओर पर्व-त्योहारों का दौर भी शुरू होने वाला है।ऐसे समय में अगर पुल पर आवागमन बाधित होता है तो लोगों को घर, बाजार, अस्पताल, स्कूल-कॉलेज और अन्य जरूरी कामों के लिए आने-जाने में काफी कठिनाई हो सकती है।
बैठक में यह भी कहा गया कि बाढ़ के दौरान नाव का परिचालन हर समय संभव नहीं होता। ऐसी स्थिति में रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे सामान की उपलब्धता के साथ-साथ उसकी कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
जनप्रतिनिधियों ने मांग की कि विक्रमशिला सेतु पर प्रस्तावित आवश्यक कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाए। इसके साथ ही आम लोगों और व्यापारियों के लिए मजबूत और स्थायी वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन इसकी वजह से आम जनता और व्यापारिक गतिविधियों पर अनावश्यक असर नहीं पड़ना चाहिए।
बैठक में तय किया गया कि इस मुद्दे को केवल स्थानीय समस्या तक सीमित नहीं रखा जाएगा। जनप्रतिनिधि मुख्यमंत्री के समक्ष भी मामले को उठाएंगे और जनहित में उचित वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग करेंगे। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि पुल पर होने वाले कार्य के दौरान लोगों की सुविधा, व्यापार और जरूरी सेवाओं की निरंतरता को ध्यान में रखते हुए पहले से प्रभावी व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए।





