Vikramshila Setu: भागलपुर की लाइफलाइन माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु के बंद होने की तारीख नजदीक आने के साथ भागलपुर-नवगछिया के बीच आवागमन को लेकर चिंता बढ़ गई है। एक ओर सेतु बंद होने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे जलयान सेवा भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और सरकार की ओर टिकी हैं कि सेतु बंद होने के बाद आवागमन के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
भागलपुर और नवगछिया के बीच प्रतिदिन हजारों स्वास्थ्यकर्मी, शिक्षक, विद्यार्थी, व्यापारी और नौकरीपेशा लोग आवागमन करते हैं। इन लोगों के लिए विक्रमशिला सेतु सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है। सेतु बंद होने और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर अब तक स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आने से लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
गंगा का जलस्तर बढ़ने से जलयान सेवा भी मुश्किलों का सामना कर रही है। जलयान को नदी पार कराने में कई घंटे लग रहे हैं। पानी में रास्ता तैयार करने में काफी समय लग रहा है। इसके अलावा वाहनों को जलयान पर चढ़ाने के लिए भी बार-बार रास्ता बनाना पड़ रहा है।
जलयान प्रबंधन के अनुसार, कुल चार जलयान उपलब्ध हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में संचालित जलयान व्यावहारिक रूप से अपेक्षित लाभ नहीं दे पा रहा है। प्रबंधन ने जिला प्रशासन से किराया बढ़ाने का अनुरोध भी किया है।
कुछ समय पहले तक बरारी गंगा घाट से यात्रियों और वाहनों के लिए जलयान सेवा संचालित की जा रही थी। हालांकि, गंगा का जलस्तर बढ़ने, घाट पर जलयान लगाने में परेशानी, जलकुंभी के फैलाव और लंबे घुमावदार मार्ग के कारण संबंधित कंपनी ने सेवा बंद कर दी। इससे गंगा पार आवागमन के एक महत्वपूर्ण विकल्प पर फिलहाल विराम लग गया है। ऐसे में विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद लोगों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।
फिलहाल जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर पूर्व स्थित बाबूपुर घाट से एक मालवाहक स्टिमर का संचालन हो रहा है। इसमें करीब 500 यात्रियों के बैठने की क्षमता है। इसके अलावा करीब एक दर्जन बड़े वाहनों और कई छोटे वाहनों को भी इसमें लोड किया जा सकता है।
जानकारों के अनुसार, यदि विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद इसी तरह के स्टिमरों का इस्तेमाल आम यात्रियों और वाहनों के आवागमन के लिए किया जाए तो कम से कम चार अतिरिक्त स्टिमरों की जरूरत होगी। ये स्टिमर प्रतिदिन दो-दो फेरे लगाकर लोगों को गंगा के दोनों किनारों के बीच पहुंचा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा में बाढ़ का पानी अधिक रहने के बावजूद बड़े स्टिमरों का संचालन किया जा सकता है। ऐसे में बाबूपुर घाट को भागलपुर-नवगछिया के बीच वैकल्पिक आवागमन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।
हालांकि, इसके लिए सेतु बंद होने से पहले कई जरूरी तैयारियां पूरी करनी होंगी। इनमें उपयुक्त घाटों का चयन, पहुंच पथ की व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम और पर्याप्त संख्या में जलयानों की उपलब्धता प्रमुख हैं।
विक्रमशिला सेतु बंद होने से पहले यदि जिला प्रशासन वैकल्पिक मार्ग और जलयान सेवा की पर्याप्त व्यवस्था कर लेता है तो गंगा पार आवागमन की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। खासकर रोजाना आने-जाने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों, मरीजों और व्यापारियों के लिए सुचारु व्यवस्था बेहद जरूरी होगी।
फिलहाल भागलपुर और नवगछिया के लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं। सेतु बंद होने के बाद तैयार की जाने वाली वैकल्पिक व्यवस्था ही तय करेगी कि दोनों क्षेत्रों के बीच लाखों लोगों का दैनिक आवागमन कितनी आसानी से जारी रह सकेगा।





