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बिहार में टूट गई पुरानी धारणा: पिता की अर्थी को पांच बेटियों ने दिया कंधा, समाज को दे दिया बड़ा संदेश

Bihar News: वैशाली के नया टोला गांव में पांच बेटियों ने अपने पिता की अर्थी को कंधा देकर अंतिम संस्कार किया और समाज की रूढ़िवादी सोच को तोड़ते हुए बेटा-बेटी में भेदभाव न करने का संदेश दिया।

Bihar News
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Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bihar News: वैशाली समाज में अक्सर यह धारणा रही है कि पिता की अंतिम यात्रा में अर्थी को कंधा बेटा ही देता है। लेकिन वैशाली थाना क्षेत्र के नया टोला गांव में पांच बेटियों ने इस परंपरागत सोच को तोड़ते हुए अपने पिता के अंतिम संस्कार में कंधा देकर समाज को एक नई सीख दी है।


दरअसल, नया टोला निवासी तारिणी प्रसाद सिंह का निधन हो गया। उनके परिवार में पत्नी ललिता देवी और पांच बेटियां हैं, लेकिन कोई पुत्र नहीं है। ऐसे में अंतिम संस्कार को लेकर परिवार में असमंजस की स्थिति थी। लेकिन परिवार की पांचों बेटियों—पूनम सिंह, नीलम सिंह, माधुरी, माला और चांदनी ने आगे आकर अपने पिता की अर्थी को कंधा दिया और पूरे रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार संपन्न कराया।


इस भावुक दृश्य को देखकर गांव में मौजूद लोग भी भावुक हो गए। यह घटना अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। माधुरी सिंह ने कहा कि वे पांच बहनें हैं और कोई भाई नहीं है, इसलिए उन्होंने पिता को कंधा देने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि समाज में अक्सर लड़के को अधिक महत्व दिया जाता है और लड़कियों को कमजोर समझा जाता है, जबकि वास्तविकता यह है कि हर पुरुष को जन्म देने वाली एक महिला ही होती है।


उन्होंने आगे कहा कि एक बेटी मां का रूप लेकर जीवन देती है, इसलिए वह अपने पिता को कंधा क्यों नहीं दे सकती। उनके पिता ने हमेशा उन्हें पढ़ाया-लिखाया और उनकी जिम्मेदारियों को निभाया, इसलिए आज उन्होंने भी अपना कर्तव्य निभाया है।


माधुरी ने यह भी कहा कि इस कदम का उद्देश्य समाज में फैले लड़का-लड़की के भेदभाव को खत्म करना है। उनका संदेश है कि लड़कियां किसी भी रूप में कमजोर नहीं हैं और अगर उन्हें अवसर मिले तो वे हर जिम्मेदारी निभा सकती हैं। नया टोला की इन बेटियों ने यह साबित कर दिया कि बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं होता और कर्तव्य निभाने का जज्बा हो तो बेटियां भी किसी से कम नहीं होतीं।

रिपोर्टिंग
M

रिपोर्टर

Munna Khan

FirstBihar संवाददाता