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Tej Pratap Yadav: तेजप्रताप यादव का फूटा गुस्सा, "जयचंदों की साज़िश से निकाला गया, अब भाई वीरेंद्र पर क्या कार्रवाई होगी?"

Tej Pratap Yadav: राजद नेता तेजप्रताप यादव ने भाई वीरेंद्र और एक सचिव को लेकर पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने संगठन में अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।

Tej Pratap Yadav
तेजप्रताप यादव
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PRIYA DWIVEDI
3 मिनट

Tej Pratap Yadav: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव ने एक बार फिर अपनी ही पार्टी पर खुलकर हमला बोला है। इस बार उन्होंने पार्टी विधायक भाई वीरेंद्र द्वारा अनुसूचित जाति-जनजाति (SC-ST) समाज के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी और धमकी को लेकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।


दरअसल, तेजप्रताप यादव ने अपने X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर एक तीखा पोस्ट साझा करते हुए लिखा "क्या RJD अपने विधायक भाई वीरेंद्र पर भी कार्रवाई करेगी, जिन्होंने बाबा साहेब आंबेडकर के आदर्शों के उलट SC-ST समाज के खिलाफ शर्मनाक टिप्पणी की, जान से मारने की धमकी दी? मुझे तो जयचंदों की साज़िश के तहत पार्टी से बाहर कर दिया गया... अब देखना है कि बवाल करने वालों पर भी पार्टी उतनी ही सख्ती दिखाएगी या नहीं? संविधान का सम्मान भाषणों में नहीं, आचरण में दिखना चाहिए।"


तेजप्रताप यादव का यह बयान उस समय आया है जब पार्टी में संगठनात्मक अनुशासन और जातीय समरसता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने इस पूरे विवाद को केवल भाई वीरेंद्र तक सीमित नहीं रखा, बल्कि यह भी इशारा किया कि पार्टी में कुछ "जयचंदों" की साज़िश के चलते उन्हें ही बाहर कर दिया गया, जबकि अन्य विवादास्पद नेताओं के खिलाफ चुप्पी साधी गई।


तेजप्रताप का यह तीखा हमला सीधे तौर पर RJD के शीर्ष नेतृत्व, जिनमें उनके पिता और पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और भाई तेजस्वी यादव शामिल हैं की नीति और निर्णयों पर सवाल खड़ा करता है। यह बयान पार्टी के अंदर गहराते मतभेद और गुटबाजी की ओर भी इशारा करता है। भाई वीरेंद्र की कथित टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर भी नाराज़गी देखी जा रही है। दलित संगठनों और समाज के कई वर्गों ने इस बयान को संविधान विरोधी बताया है और माफी व कार्रवाई की मांग की है।


यह बयान आने वाले समय में RJD के भीतर खींचतान को और बढ़ा सकता है। तेजप्रताप यादव पहले भी कई बार पार्टी की कार्यशैली और कुछ नेताओं के व्यवहार को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजप्रताप की यह नाराज़गी लोकसभा चुनावों में हार और पार्टी में उनके घटते प्रभाव के कारण और भी तेज हो गई है।