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‘मृत भाई’ का दावा साबित नहीं कर सके अंचल अधिकारी प्रिंस राज, मृत्यु प्रमाण-पत्र न देने पर चयनमुक्त

सुपौल के निलंबित अंचल अधिकारी प्रिंस राज को अपने कथित मृत भाई धर्मेंद्र कुमार का मृत्यु प्रमाण-पत्र न देने पर चयनमुक्त कर दिया गया। विभाग ने अभिलेखों में गड़बड़ी और प्रमाण की कमी को गंभीर मानते हुए कार्रवाई की।

बिहार न्यूज
फर्जीवाड़ा पड़ गया भारी
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

PATNA: राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सुपौल सदर के निलंबित अंचल अधिकारी प्रिंस राज को चयनमुक्त करने का निर्णय उस समय लिया, जब वे ‘धर्मेंद्र कुमार’ नाम से जुड़े विवाद में अपने कथित मृत भाई का मृत्यु प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं कर सके। विभागीय संकल्प के अनुसार, यही बिंदु कार्रवाई का निर्णायक आधार बना।


विशेष निगरानी ईकाई, बिहार द्वारा दर्ज कांड के अनुसंधान में यह तथ्य सामने आया था कि धर्मेंद्र कुमार के नाम से 2004 में और प्रिंस राज के नाम से 2006 में अलग-अलग जन्मतिथि से माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के प्रमाण-पत्रों का उपयोग किया गया। विभाग द्वारा स्पष्टीकरण मांगे जाने पर राज ने अपने जवाब में कहा कि ‘धर्मेंद्र कुमार’ उनके सगे भाई थे, जिनका निधन हो चुका है और दोनों अलग-अलग कानूनी पहचान वाले व्यक्ति हैं।


विभाग ने इस दावे की पुष्टि हेतु मृत्यु प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। किंतु निर्धारित अवधि में न तो मृत्यु प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया गया और न ही मृत्यु की तिथि, स्थान एवं परिस्थितियों के संबंध में कोई आधिकारिक दस्तावेज उपलब्ध कराया गया। इसे विभाग ने गंभीर माना। इसके साथ ही वे वर्ष 2006 में उत्तीर्ण परीक्षा का आवश्यक कागजात नहीं दे पाए।


इसी बीच बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना ने संबंधित मामले में वर्ष 2006 के माध्यमिक परीक्षा के अंक-पत्र एवं प्रमाण-पत्र को रद्द करने की सूचना विभाग को दी। इससे शैक्षणिक अभिलेखों में गड़बड़ी की पुष्टि हो गई। पूरे प्रकरण पर विभाग ने बिहार लोक सेवा आयोग से मंतव्य मांगा। आयोग ने स्पष्ट किया कि निर्धारित प्रक्रिया पूर्ण करते हुए चयनमुक्त करने के बिंदु पर विभाग स्वतंत्र है। इसके बाद सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति से प्रिंस राज को चयनमुक्त करने का आदेश जारी कर दिया गया। उनका चयन 60 से 62 वीं बीपीएससी की परीक्षा से हुआ था।


विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि ‘मृत भाई’ के दावे के समर्थन में वैध मृत्यु प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया जाता, तो मामले की दिशा अलग हो सकती थी। किंतु प्रमाण के अभाव में विभाग ने उपलब्ध अभिलेखों और जांच प्रतिवेदन के आधार पर कड़ी कार्रवाई की है।


जारी संकल्प की प्रति बिहार राजपत्र में प्रकाशित की जाएगी तथा संबंधित कार्यालयों को प्रेषित की जा रही है। यह कार्रवाई सरकारी सेवा में अभिलेखों की सत्यता को लेकर सरकार के सख्त रुख का संकेत मानी जा रही है। वे ग्राम झिक्की, पोस्ट हिसार जिला मधुबनी के स्थायी निवासी हैं।

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