ब्रेकिंग
पटना को किसने डूबोया ? डिप्टी CM का हुआ रेस्क्यू..हजारो लोग बने थे जल कैदी, 'नीतीश' की ऐसी बदनामी कभी नहीं हुई, गुस्साये CM ने बैठाई थी हाईलेवल कमेटी, अब एक साथ 3 इंजीनियर 'बाइज्जत' बरीपेपर लीक मामले में बड़ा एक्शन: IGIMS के आधा दर्जन MBBS छात्र सस्पेंड, हॉस्टल छोड़ने का आदेशबिहार में म्यूजिक कंपनी के डायरेक्टर के घर ED की रेड, करोड़ों की ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग का मामलाBihar News : विधायक बनते ही मैदान में उतरे प्रशांत किशोर! 11 अगस्त से बांकीपुर के हर वार्ड में जाएंगे, 3 महीने में बदलाव का बड़ा वादा"Bihar News : ईओ विमल कुमार हत्याकांड में बड़ा एक्शन! CM सम्राट चौधरी ने दिए स्पीडी ट्रायल के आदेश, पत्नी ने रखीं 5 बड़ी मांगेंपटना को किसने डूबोया ? डिप्टी CM का हुआ रेस्क्यू..हजारो लोग बने थे जल कैदी, 'नीतीश' की ऐसी बदनामी कभी नहीं हुई, गुस्साये CM ने बैठाई थी हाईलेवल कमेटी, अब एक साथ 3 इंजीनियर 'बाइज्जत' बरीपेपर लीक मामले में बड़ा एक्शन: IGIMS के आधा दर्जन MBBS छात्र सस्पेंड, हॉस्टल छोड़ने का आदेशबिहार में म्यूजिक कंपनी के डायरेक्टर के घर ED की रेड, करोड़ों की ठगी और मनी लॉन्ड्रिंग का मामलाBihar News : विधायक बनते ही मैदान में उतरे प्रशांत किशोर! 11 अगस्त से बांकीपुर के हर वार्ड में जाएंगे, 3 महीने में बदलाव का बड़ा वादा"Bihar News : ईओ विमल कुमार हत्याकांड में बड़ा एक्शन! CM सम्राट चौधरी ने दिए स्पीडी ट्रायल के आदेश, पत्नी ने रखीं 5 बड़ी मांगें

Bihar News : 11 साल बाद घूसकांड का फैसला! रिश्वत लेते पकड़े गए राष्ट्रीय बचत अधिकारी को 5 साल जेल, 20 हजार जुर्माना

सीतामढ़ी के चर्चित रिश्वतखोरी मामले में 11 साल बाद बड़ा फैसला आया है। विशेष निगरानी कोर्ट ने तत्कालीन राष्ट्रीय बचत कार्यपालक पदाधिकारी प्रदीप कुमार को दोषी मानते हुए 5 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अधिकारी पर महिला अभिकर्ता से रिश्वत मांगने

Bihar News : 11 साल बाद घूसकांड का फैसला! रिश्वत लेते पकड़े गए राष्ट्रीय बचत अधिकारी को 5 साल जेल, 20 हजार जुर्माना
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

Bihar News : भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में विशेष निगरानी कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सीतामढ़ी के तत्कालीन राष्ट्रीय बचत कार्यपालक पदाधिकारी प्रदीप कुमार को 11 साल पुराने रिश्वतखोरी के मामले में दोषी करार देते हुए पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही अदालत ने उन पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। विशेष निगरानी न्यायालय के न्यायाधीश दशरथ मिश्रा ने यह फैसला सुनाया। दोषी प्रदीप कुमार मूल रूप से नालंदा जिले के बिहारशरीफ के रहने वाले हैं। अदालत के इस फैसले के बाद भ्रष्टाचार के मामलों में लंबी सुनवाई के बावजूद दोषियों पर कार्रवाई का एक उदाहरण सामने आया है।

महिला अभिकर्ता से कमीशन चालू करने के लिए मांगी थी रिश्वत

यह मामला सीतामढ़ी जिले के बेला थाना क्षेत्र के मनपौर गांव से जुड़ा हुआ है। मामले की शुरुआत सुनील कुमार की शिकायत से हुई थी। उनकी बेटी प्रियंका कुमारी राष्ट्रीय बचत वित्त विभाग के अंतर्गत डाकघर की आरडी (Recurring Deposit) योजनाओं के लिए महिला प्रधान अभिकर्ता के तौर पर काम करती थीं।शिकायत के अनुसार, विभाग में हर महीने की पांच तारीख को अभिकर्ताओं की बैठक आयोजित की जाती थी। एक बैठक में अनुपस्थित रहने के बाद प्रियंका कुमारी का मासिक कमीशन बिना किसी स्पष्ट कारण के बंद कर दिया गया था। जब उन्होंने अपना कमीशन दोबारा शुरू कराने के लिए तत्कालीन राष्ट्रीय बचत कार्यपालक पदाधिकारी प्रदीप कुमार से संपर्क किया, तो आरोप था कि अधिकारी ने इसके बदले रिश्वत की मांग की।

निगरानी विभाग ने बिछाया था जाल

रिश्वत मांगने की शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले की जांच शुरू की। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद अधिकारियों ने कार्रवाई की योजना बनाई। 9 दिसंबर 2014 को निगरानी विभाग की टीम ने जाल बिछाया। इसी दौरान महिला अभिकर्ता से रिश्वत लेते हुए प्रदीप कुमार को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया गया था। गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया और न्यायालय में सुनवाई शुरू हुई।

11 साल चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आया फैसला

इस मामले की सुनवाई करीब 11 वर्षों तक चली। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद विशेष निगरानी कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर प्रदीप कुमार को दोषी माना। अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत उन्हें पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 20 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया।

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश

न्यायालय के इस फैसले को सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय बाद आए इस निर्णय से यह स्पष्ट हुआ है कि रिश्वतखोरी जैसे मामलों में आरोपी को कानून का सामना करना पड़ता है।निगरानी विभाग की कार्रवाई और कोर्ट के फैसले ने यह भी साबित किया है कि सरकारी पद का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रहती है, भले ही फैसला आने में समय लगे।सीतामढ़ी से जुड़े इस पुराने रिश्वत कांड में आए फैसले के बाद अब भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।