Anant Singh Expulsion : बिहार की राजनीति में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर एक बार फिर पुराने घटनाक्रम की चर्चा तेज हो गई है। मोकामा के विधायक अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद सियासी गलियारों में 2017 की यादें ताजा होने लगी हैं। उस वक्त जेडीयू ने अपने वरिष्ठ नेता शरद यादव और अली अनवर अंसारी के खिलाफ कार्रवाई की थी। दोनों ही नेताओं पर पार्टी के आधिकारिक रुख से अलग राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने का मामला सामने आया था। अब अनंत सिंह के मामले में भी पार्टी लाइन से अलग जाकर दूसरे उम्मीदवार का समर्थन करने का आरोप लगा है।
दोनों घटनाओं के बीच करीब नौ साल का अंतर है, लेकिन एक सवाल फिर चर्चा में है—क्या जेडीयू में पार्टी नेतृत्व के फैसले से अलग जाने वाले नेताओं के लिए कार्रवाई का रास्ता पहले भी इसी तरह अपनाया जाता रहा है? हालांकि, दोनों मामलों की राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन पार्टी अनुशासन और नेतृत्व के फैसले को लेकर इनकी तुलना की जा रही है।
दरअसल, 24 अक्टूबर 2026 को जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से अनंत सिंह और नीलम देवी के निष्कासन की कार्रवाई सामने आई। पार्टी ने अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा भी विधानसभा अध्यक्ष से की है। इस फैसले के बाद जेडीयू के पुराने विवादों का जिक्र शुरू हो गया है। इनमें सबसे प्रमुख नाम शरद यादव का है, जो कभी नीतीश कुमार के साथ पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा हुआ करते थे।
2017 में क्या हुआ था शरद यादव के साथ?
साल 2017 में बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ था। नीतीश कुमार ने महागठबंधन से अलग होकर भाजपा के साथ सरकार बनाने का फैसला किया था। उस समय शरद यादव जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं में शामिल थे। उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन करने के फैसले का विरोध किया था। शरद यादव ने राजद के राजनीतिक मंच पर जाकर अपनी असहमति भी जाहिर की थी।
यह विवाद केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। जेडीयू ने शरद यादव और अली अनवर अंसारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। मामला राज्यसभा की सदस्यता तक पहुंच गया। चार दिसंबर 2017 को दोनों की राज्यसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई। तत्कालीन राज्यसभा सभापति ने माना कि दोनों नेताओं का आचरण दल छोड़ने के समान था।
शरद यादव और अली अनवर ने इस फैसले को चुनौती देने के लिए कानूनी रास्ता भी अपनाया। उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उनकी सदस्यता बहाल नहीं हो सकी। इस घटनाक्रम ने जेडीयू के भीतर नेतृत्व और पार्टी के आधिकारिक फैसले के बीच टकराव को राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बना दिया। 12 जनवरी 2023 को शरद यादव का निधन हो गया, लेकिन 2017 का यह विवाद आज भी बिहार की राजनीति के अहम प्रसंगों में गिना जाता है।
अब अनंत सिंह पर कार्रवाई क्यों हुई?
अनंत सिंह के मामले में विवाद की वजह पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का विधान परिषद चुनाव बना। इस चुनाव में जेडीयू के अधिकृत उम्मीदवार नीरज कुमार मैदान में थे, जबकि जन सुराज पार्टी की ओर से अनुज सिंह उम्मीदवार थे। आरोप है कि अनंत सिंह ने अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार किया और नीरज कुमार के खिलाफ वोट देने की अपील की।
जेडीयू ने अपने फैसले के समर्थन में उस वीडियो का हवाला दिया है, जिसमें अनंत सिंह सार्वजनिक मंच से जन सुराज के उम्मीदवार के लिए वोट मांगते दिखाई देते हैं। पार्टी के मुताबिक, अनंत सिंह लगातार शीर्ष नेतृत्व की आलोचना कर रहे थे और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे। अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार को पार्टी ने अनुशासनहीनता माना।
24 अक्टूबर को कार्रवाई करते हुए पार्टी ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। साथ ही अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा भी की गई। अब इस मामले में आगे का फैसला विधानसभा अध्यक्ष और लागू संवैधानिक प्रावधानों के तहत होने वाली प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। पार्टी की अनुशंसा अपने आप सदस्यता समाप्त होने के बराबर नहीं है।





