Bihar Flood News: सारण जिले के दाउदपुर क्षेत्र में रविवार अहले सुबह दहा नदी का बांध टूटने से इमादपुर बिंटोलिया गांव में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई. पानी के तेज बहाव के कारण बांध टूटते ही नदी का पानी तेजी से गांव की ओर फैलने लगा. देखते ही देखते करीब 200 घर बाढ़ के पानी से घिर गए. कई घरों में पानी घुसने के बाद लोगों को अपना सामान बचाने के साथ सुरक्षित स्थान की तलाश करनी पड़ी. हालात बिगड़ने पर कई परिवार घर की छतों पर शरण लेने को मजबूर हो गए.
बाढ़ के पानी के बीच कई परिवार अपने मवेशियों के साथ फंसे हुए हैं. ग्रामीणों के अनुसार, दहा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और निचले इलाकों में पानी तेजी से फैल रहा है. ग्रामीणों को आशंका है कि अगर नदी का जलस्तर और बढ़ा तो आसपास के इलाकों में भी स्थिति गंभीर हो सकती है.
बांध टूटने से 300 बीघा फसल जलमग्न
दहा नदी का बांध टूटने से गांव और आसपास के इलाके में करीब 300 बीघा में लगी फसल पानी में डूब गई है. खेतों में पानी भरने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है. ग्रामीणों के अनुसार, इसी स्थान पर बांध टूटने की यह दूसरी घटना है. किसानों ने प्रशासन से पानी की निकासी और बांध की जल्द मरम्मत कराने की मांग की है.
मौके पर पहुंचे अधिकारी
बांध टूटने और गांव में पानी घुसने की सूचना मिलने के बाद सदर एसडीपीओ-दो प्रेमचंद्र सिंह और मांझी सीओ रोहित कुमार अग्रवाल मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने प्रभावित इलाके का जायजा लिया और स्थिति की जानकारी ली. एहतियात के तौर पर पुलिस बल की तैनाती की गई है. संबंधित कर्मियों को भी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं.
उड़ियानपुर में भी टूटा बांध
चेफुल पंचायत के उड़ियानपुर में शनिवार रात बांध टूटने की भी सूचना मिली है. यहां बांध की मरम्मत का काम शुरू किया गया है. प्रशासन की टीम प्रभावित इलाकों पर नजर रख रही है और जलस्तर की स्थिति की निगरानी की जा रही है. ग्रामीणों ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेज करने के साथ बांध की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है.
सारण में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों तक स्वास्थ्य और जरूरी सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं, जहां लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा रही है और जरूरत के अनुसार दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं.
प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बीमारियों की रोकथाम को लेकर भी निगरानी की जा रही है. प्रभावित लोगों को समय पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमों को सक्रिय रखा गया है.
बाढ़ प्रभावित इलाकों में पशुओं की सुरक्षा के लिए भी प्रशासन की ओर से व्यवस्था की गई है. प्रभावित क्षेत्रों से निकाले गए पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है. कैंप डीआरएम, सोनपुर और कैंप चिरांद में पशुओं के लिए आश्रय की व्यवस्था की गई है.
इन स्थानों पर पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराया जा रहा है. जरूरत के अनुसार पशुओं को दवाएं दी जा रही हैं और उनका स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जा रहा है. बाढ़ की स्थिति के बीच प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों के साथ उनके पशुधन की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है.
इसको लेकर छपरा के जिला अधिकारी ने बताया कि बांध टूटने के बाद करीब 35 ब्लॉकों में बाढ़ का पानी घुस गया है. इससे सबसे ज्यादा प्रभावित कृषि क्षेत्र हुए हैं, जहां बड़ी मात्रा में फसलें प्रभावित होने की आशंका है. जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग की पूरी टीम मौके पर तैनात है और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है. प्रशासन की कोशिश है कि जल्द से जल्द बांध की मरम्मत और पानी की रोकथाम का काम पूरा कर लिया जाए.





