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Bihar News: ₹98 करोड़ खर्च कर टूरिज्म हब में तब्दील होगा बिहार यह जिला, रोजगार की भी आएगी बाढ़

Bihar News: सहरसा में मत्स्यगंधा झील के विकास के लिए 98 करोड़ की परियोजना शुरू, CM नीतीश कुमार ने किया शिलान्यास। ग्लास ब्रिज, घाट, पार्किंग जैसी सुविधाएं, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बूस्ट..

Bihar News
प्रतीकात्मक
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
3 मिनट

Bihar News: सहरसा जिले की शांत जल राशि वाली मत्स्यगंधा झील अब पर्यटकों और श्रद्धालुओं का प्रमुख केंद्र बनेगी। बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत 98 करोड़ रुपये की लागत से इस झील के कायाकल्प का कार्य शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही पटना से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इसका शिलान्यास किया, तो स्थानीय विधायक डॉ. आलोक रंजन और डीएम दीपेश कुमार ने बुधवार को साइट पर जाकर कार्यारंभ की औपचारिक शुरुआत की। यह परियोजना झील को धार्मिक आस्था का प्रतीक बनाएगी और सहरसा को बिहार के पर्यटन मानचित्र पर चमकदार जगह दिलाएगी। केंद्र सरकार ने इसके लिए 97.61 करोड़ की मंजूरी दी है।


इस झील के किनारे 400 मीटर लंबा घाट, वृत्ताकार ग्लास ब्रिज और विशाल पार्किंग का निर्माण होगा जो राजगीर के मशहूर ग्लास ब्रिज की तर्ज पर बनेगा। बिहार का यह दूसरा ग्लास ब्रिज पर्यटकों के लिए रोमांच का केंद्र बनेगा। विधायक डॉ. आलोक रंजन ने बताया है कि यह प्रोजेक्ट चुनावी वादे को पूरा करने का हिस्सा है, जिसमें अनुभव केंद्र, शौचालय (शिशु देखभाल कक्ष सहित), स्मृति चिन्ह दुकानें, परावर्तन कुंड, संगीतमय फव्वारा, सेल्फी पॉइंट, भोजनालय, प्रशासनिक भवन, शहरी हाट, वृत्ताकार लॉन और भव्य मुख्य द्वार जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं। इससे यह झील आस्था का केंद्र भी बनेगी और राष्ट्रीय स्तर का पर्यटन स्थल भी।


इस परियोजना से सहरसा की स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई जान मिलेगी। हस्तशिल्प, होटल, परिवहन और गाइड जैसे क्षेत्रों में हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। डॉ. रंजन ने कहा कि यह सहरसा के सर्वांगीण विकास का प्रतीक है, जहां ग्रामीण युवाओं को स्किल ट्रेनिंग और बाजार से जोड़ा जाएगा। केंद्र के पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और PM नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए उन्होंने NDA सरकार की सराहना की।


यह पहल बिहार को पर्यटन हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। मत्स्यगंधा झील पहले स्थानीय स्तर पर सीमित थी, लेकिन अब यह देश-विदेश के सैलानियों को आकर्षित करेगी। कार्यान्वयन में पारदर्शिता और समयबद्धता पर जोर दिया जा रहा है, ताकि 2026 तक पूरा हो सके। सहरसा के निवासियों के लिए यह न सिर्फ आर्थिक उछाल लाएगा, बल्कि यहाँ की सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाई भी देगा।

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