MOTIHARI: पश्चिमी चंपारण से राजद के विधान पार्षद सौरभ कुमार को सत्र न्यायालय से महत्वपूर्ण राहत मिली है। तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश श्री प्रकाश ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उनकी सजा पर रोक लगा दी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद सौरभ कुमार की विधान परिषद की सदस्यता खत्म होने का खतरा टल गया है।
निचली अदालत ने दी थी सजा
बात दें कि 2019 के एक मामले में निचली अदालत ने 15 जून 2026 को सौरभ कुमार को विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए कुल चार वर्ष एक माह की जेल और 17 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ उन्होंने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। सत्र न्यायालय के इस आदेश के बाद फिलहाल सौरभ कुमार की बिहार विधान परिषद की सदस्यता पर मंडरा रहा संभावित संकट टल गया है।
सेशन कोर्ट ने रोक लगाई
विशेष न्यायाधीश श्री प्रकाश ने अपील पर सुनवाई के दौरान निचली अदालत की दोषसिद्धि पर अंतरिम रोक लगाते हुए सौरभ कुमार को राहत प्रदान की। इस आदेश से न केवल सजा पर रोक लगी है, बल्कि उनकी विधायी सदस्यता भी फिलहाल सुरक्षित रह गई है।
बच गई विधान परिषद की सदस्यता
गौरतलब है कि दो साल या उससे ज्यादा की सजा मिलने के बाद जन प्रतिनिधियों की सदन की सदस्यता खत्म करने का संवैधानिक प्रावधान है। ऐसे में सौरभ कुमार की सदस्यता कभी भी समाप्त की जा सकती थी। लेकिन सत्र न्यायालय के इस फैसले ने उस संभावित संकट को फिलहाल टाल दिया है।
मामला वर्ष 2019 का है। निचली अदालत ने 15 जून 2026 को सौरभ कुमार को दोषी करार देते हुए विभिन्न धाराओं में कुल चार वर्ष एक माह की कैद और 17 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान किया था। सजा के खिलाफ अपील दायर करने के बाद सत्र न्यायालय ने गुण-दोष के आधार पर आगे की सुनवाई तक दोषसिद्धि पर रोक लगा दी है।
राजद नेता सौरभ कुमार पश्चिमी चंपारण क्षेत्र से बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं। न्यायालय के इस आदेश से उनकी राजनीतिक और विधायी स्थिति में फिलहाल स्थिरता बनी हुई है। मामले की अगली सुनवाई सत्र न्यायालय में होगी, जहां अपील पर विस्तृत विचार किया जाएगा।





