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MLA Viral Video : “कानून गया तेल लेने?” विधायक फैसल रहमान के सामने मांगलिक कार्यक्रम बना ‘गोली शो’! VIDEO वायरल; अब पूछे जा रहे यह सवाल

बिहार में कानून का डर खत्म? ढाका विधायक के सामने कथित हर्ष फायरिंग का वीडियो वायरल होने के बाद राजनीति गरमा गई है। लोग पूछ रहे हैं—क्या कानून सिर्फ आम जनता के लिए है?

MLA Viral Video : “कानून गया तेल लेने?” विधायक फैसल रहमान के सामने मांगलिक कार्यक्रम बना ‘गोली शो’! VIDEO वायरल; अब पूछे जा रहे यह सवाल
Tejpratap
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4 मिनट

MLA Viral Video : बिहार के ढाका विधानसभा की राजनीति में इन दिनों “हर्ष फायरिंग संस्कृति” के नए अध्याय में प्रवेश करती दिख रही है। वैसे तो यह कानून की किताबों में हर्ष फायरिंग बंद है लेकिन नेताजी के सामने बंदूकें खुली रूप से घूम रही हैं। यह मामला राजद विधायक सह गैर सरकारी संकल्प समिति के सभापति  फैसल रहमान से जुड़ा है, जिनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कथित तौर पर उनके समर्थक खुलेआम अवैध हथियार लहराते और हर्ष फायरिंग करते नजर आ रहे हैं, जबकि विधायक जी पूरे कार्यक्रम में “लोकतांत्रिक मुस्कान” के साथ मौजूद दिखाई दे रहे हैं।


घटना 10 मई 2026 की बताई जा रही है, जब चिरैया के कठमलिया गांव में ए० रहमान चम्पारणी के मांगलिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। आम लोगों को लगा होगा कि यह कोई पारिवारिक समारोह होगा, लेकिन वीडियो देखने के बाद लोगों को एहसास हुआ कि शायद यह “हथियार प्रदर्शन प्रतियोगिता” का उद्घाटन समारोह था।


विडंबना देखिए कि एक तरफ उच्च न्यायालय लगातार हर्ष फायरिंग पर सख्त टिप्पणी कर रहा है, बिहार पुलिस भी ऐसे मामलों पर कार्रवाई के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ नेताजी के सामने ही समर्थक कानून को हवा में उड़ाते नजर आ रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार कानून हवा में उड़ाने के लिए गोली का भी इस्तेमाल हो गया।


सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर लोग तरह-तरह के तंज कस रहे हैं। कोई पूछ रहा है कि क्या अब बिहार में मांगलिक कार्यक्रमों का नया ट्रेंड “DJ + डांस + अवैध हथियार” हो गया है? तो कोई कह रहा है कि जब नेता जी खुद सामने बैठे हों तो समर्थकों का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर पहुंचना स्वाभाविक है।


सबसे दिलचस्प बात यह है कि बिहार पुलिस आम आदमी की बाइक से साइलेंसर हटवाने में जितनी तेजी दिखाती है, उतनी तेजी ऐसे वायरल वीडियो पर अक्सर दिखाई नहीं देती। आम युवक अगर पटाखा भी जोर से फोड़ दे तो थाने बुला लिया जाता है, लेकिन नेताजी के कार्यक्रम में गोली चल जाए तो जांच की गाड़ी पहले “वीडियो सत्यापन” के गड्ढे में फंसती है।


राजनीतिक गलियारों में भी इस वीडियो को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कानून का डर कहां है? क्या नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं? अगर वायरल वीडियो सही है तो क्या पुलिस स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगी या फिर किसी बड़े आदेश का इंतजार होगा?


लोग यह भी कह रहे हैं कि बिहार में अब विकास योजनाओं के साथ “गोलीबारी प्रबंधन” का भी प्रशिक्षण शुरू हो जाना चाहिए। क्योंकि जिस सहजता से समर्थक हथियार लहरा रहे थे, उसे देखकर ऐसा लग रहा था मानो यह सब पहले से तय कार्यक्रम का हिस्सा हो।


हालांकि अभी तक विधायक जी की ओर से इस वायरल वीडियो पर कोई स्पष्ट सफाई सामने नहीं आई है। लेकिन जनता सोशल मीडिया पर अपना फैसला सुना चुकी है। लोग पूछ रहे हैं कि जब जनप्रतिनिधियों के सामने ही कानून का मजाक उड़ाया जाएगा, तो फिर आम जनता से कानून पालन की उम्मीद कैसे की जाएगी?


फिलहाल वीडियो वायरल है, चर्चाएं गर्म हैं और प्रशासनिक खामोशी भी बहुत कुछ कह रही है। अब देखना यह है कि यह मामला भी दूसरे वायरल वीडियो की तरह कुछ दिनों में ठंडे बस्ते में चला जाएगा या फिर सचमुच कानून की बंदूक इस बार सत्ता की ओर भी घूमेगी।