PM Awas Yojana Bihar: प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत घर बनाने वाले नए लाभुकों के लिए बिहार सरकार ने नियमों में अहम बदलाव किया है. अब आवास की स्वीकृति देने से पहले निर्माण स्थल की पूरी जानकारी दर्ज करनी होगी. जमीन की स्थिति के साथ उसकी चौहद्दी और नजरी नक्शा तैयार करना अनिवार्य होगा. इससे यह स्पष्ट रहेगा कि लाभुक को जिस जगह पर घर बनाने की मंजूरी मिली है, निर्माण उसी जमीन पर हो रहा है या नहीं.
ग्रामीण विकास विभाग ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में निर्माण स्थल से जुड़ी गड़बड़ियों और शिकायतों को रोकने के लिए यह व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया है. विभाग की ओर से जारी निर्देश के मुताबिक नए लाभुकों के आवास की स्वीकृति से पहले निर्माण वाली जमीन का स्पष्ट विवरण तैयार किया जाएगा. इसमें जमीन की स्थिति और चारों ओर की चौहद्दी दर्ज की जाएगी.
तैयार किए गए अभिलेख को संबंधित प्रखंड कार्यालय में सुरक्षित रखा जाएगा. साथ ही आवास सॉफ्ट पोर्टल पर भी इससे संबंधित जानकारी अपलोड करने की व्यवस्था की जाएगी. इस रिकॉर्ड के आधार पर आगे होने वाली जांच में यह आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि आवास का निर्माण स्वीकृत स्थल पर ही कराया जा रहा है या नहीं.
जियो टैगिंग के बाद भी सामने आ रही थीं गड़बड़ियां
विभागीय निर्देश में बताया गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत आमतौर पर लाभुक उसी स्थान पर घर का निर्माण करते हैं, जहां पहले जियो टैगिंग की जाती है. आवास निर्माण की अलग-अलग अवस्थाओं में किस्तों के भुगतान के लिए भी जियो टैगिंग की व्यवस्था है.
इसके बावजूद आवास योजनाओं की जांच के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें लाभुक जियो टैग किए गए स्थान से 25 मीटर के दायरे से बाहर जाकर घर का निर्माण करा रहे थे. कुछ मामलों में दूसरे व्यक्ति की जमीन पर भी आवास निर्माण किए जाने की शिकायत सामने आई है.
ऐसे मामलों में बाद में विवाद और शिकायत की स्थिति पैदा होती है. कई बार जिस मूल स्थल पर आवास स्वीकृत किया गया होता है, वहां निर्माण नहीं हो पाता. इसी तरह की गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए विभाग ने निर्माण स्थल का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार करने का फैसला लिया है.
नए लाभुकों के लिए नजरी नक्शा बनाना अनिवार्य
विभाग ने स्पष्ट किया है कि नए लाभुकों को आवास की स्वीकृति देने से पहले उस जमीन का नजरी नक्शा तैयार करना होगा, जिस पर घर बनाया जाना है. नक्शे में जमीन की स्थिति के साथ उसकी स्पष्ट चौहद्दी भी दर्ज करनी होगी.
इस अभिलेख को संबंधित कार्यालय में सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि भविष्य में किसी तरह की शिकायत या जांच होने पर निर्माण स्थल का मिलान किया जा सके. इससे यह भी पता चल सकेगा कि लाभुक ने उसी जमीन पर आवास बनाया है, जिसकी जानकारी स्वीकृति के समय दी गई थी.
प्रखंड स्तर पर शुरू हुई कार्रवाई
विभागीय निर्देश मिलने के बाद प्रखंड स्तर पर इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. प्रखंड विकास पदाधिकारी शारीक अहमद ने बताया कि विभाग के निर्देश के अनुसार कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य आवास योजना में स्थल से जुड़ी गड़बड़ियों को रोकना और लाभुकों के आवास निर्माण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना है. अब नए लाभुकों के मामले में जमीन की चौहद्दी, नजरी नक्शा और निर्माण स्थल की जानकारी पहले से दर्ज रहेगी, जिससे बाद की जांच में स्थिति स्पष्ट की जा सकेगी.





