PATNA: निगरानी के 16 साल पुराने रिश्वत मामले में पटना की विशेष निगरानी कोर्ट ने वर्तमान में दलसिंहसराय के अनुमंडल शिक्षा पदाधिकारी विनोद कुमार विमल को दोषी करार दिया है। विशेष न्यायालय निगरानी, पटना के न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह ने 18 अगस्त 2026 को मामले में फैसला सुनाया।
यह मामला निगरानी थाना कांड संख्या 13/2010 और विशेष वाद संख्या 10/2010 से संबंधित है। आरोप के अनुसार, विनोद कुमार विमल ने स्कूल निरीक्षण के दौरान कैश बुक, साइट बुक सहित अन्य कागजात बिना जब्ती सूची बनाए जब्त कर लिए थे। इन दस्तावेजों को वापस करने और कार्रवाई नहीं करने के एवज में उन्होंने परिवादी से 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी।
मामले में निगरानी विभाग ने 10 फरवरी 2010 को 25 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया था। शिकायतकर्ता वैद्यनाथ पंडित प्रभाकर उस समय राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सरारी, प्रखंड मोहनपुर, समस्तीपुर में प्रभारी प्रधानाध्यापक थे।
दोनों धाराओं में 3-3 साल की सजा
अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत विनोद कुमार विमल को तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
वहीं, धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत भी तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा दी गई है। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर चार महीने के साधारण कारावास का प्रावधान है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
11 गवाहों की हुई गवाही
मामले में तत्कालीन अनुसंधानकर्ता मृत्युंजय कुमार चौधरी, पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना ने आरोप पत्र दाखिल किया था। अभियोजन की ओर से कुल 11 गवाहों की गवाही कराई गई।
बिहार सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक निगरानी, पटना विजय भानू ने मामले में प्रभावी पैरवी की। निगरानी विभाग की कार्रवाई और अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।





