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Bihar urban development : बिहार के बड़े शहरों की जर्जर संपर्क सड़कों का होगा कायाकल्प, डिप्टी CM सिन्हा ने दिए निर्देश; शिकायत के लिए बनेंगे कॉल सेंटर

बिहार के शहरी विकास को लेकर राज्य सरकार ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। उपमुख्यमंत्री सह नगर विकास एवं आवास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्य के बड़े शहरों में जर्जर हो चुकी संपर्क सड़कों की स्थिति सुधारने के सख्त निर्देश दिए हैं।

Bihar urban development : बिहार के बड़े शहरों की जर्जर संपर्क सड़कों का होगा कायाकल्प, डिप्टी CM सिन्हा ने दिए निर्देश; शिकायत के लिए बनेंगे कॉल सेंटर
Tejpratap
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Bihar urban development : बिहार के बड़े शहरों में जर्जर हो चुकी संपर्क सड़कों की हालत जल्द सुधरेगी। उपमुख्यमंत्री सह नगर विकास एवं आवास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि ऐसी सभी खराब संपर्क सड़कों को चिह्नित कर नगर निगम स्तर पर उनका निर्माण और मरम्मत सुनिश्चित की जाए। मंगलवार को विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों से कहा कि शहरी क्षेत्रों में संपर्क पथों की स्थिति संतोषजनक नहीं है, जिससे आम लोगों को रोजमर्रा की आवाजाही में परेशानी हो रही है। इसे प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया जाए।


उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के बड़े शहरों में मुख्य सड़कों के साथ-साथ मोहल्लों और कॉलोनियों को जोड़ने वाली संपर्क सड़कों की भूमिका बेहद अहम होती है। इन सड़कों की खराब स्थिति से न सिर्फ यातायात बाधित होता है, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली जर्जर सड़कों की सूची तैयार कर चरणबद्ध तरीके से उनका निर्माण कराया जाए, ताकि शहरों की यातायात व्यवस्था बेहतर हो सके।


समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री ने नियोजित 11 नए शहरों में चल रहे आधारभूत संरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) के कार्यों की भी समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इन नए शहरों में सड़क, जलापूर्ति, नाला, स्ट्रीट लाइट, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और अन्य मूलभूत सुविधाओं के कार्यों में तेजी लाई जाए। विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि नए शहरों को विकसित करने का उद्देश्य सिर्फ विस्तार नहीं, बल्कि लोगों को बेहतर शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके लिए सभी संबंधित एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा।


उपमुख्यमंत्री ने आम लोगों की शिकायतों और सुझावों को सीधे सरकार तक पहुंचाने के लिए एक नई व्यवस्था की घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति के बाद नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से एक समर्पित कॉल सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही शिकायत और सुझाव दर्ज कराने के लिए एक विशेष व्हाट्सएप नंबर भी जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से नागरिकों को अपनी समस्याएं दर्ज कराने में सहूलियत होगी और विभाग को फील्ड से सीधा फीडबैक मिलेगा।


उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि शिकायतों के निपटारे में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कॉल सेंटर और व्हाट्सएप पर आने वाली शिकायतों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और तय समय सीमा के भीतर उनका समाधान सुनिश्चित किया जाए। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए यह व्यवस्था बेहद जरूरी है।


बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभाग से जुड़े कानूनों और नियमों की भी समीक्षा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कई ऐसे कानून या नियम हैं, जो अब समय के अनुरूप नहीं हैं और जिनके कारण आम लोगों को बेवजह परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऐसे बेवजह के कानूनों और नियमों को चिन्हित कर उनमें संशोधन किया जाए और जरूरत के अनुसार नए कानूनों को शामिल किया जाए। उनका मानना है कि नियमों के सरलीकरण से न सिर्फ जनता को राहत मिलेगी, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।


उपमुख्यमंत्री ने एक अहम निर्देश देते हुए कहा कि सभी कार्यपालक पदाधिकारी, स्वच्छता पदाधिकारी और सिटी मैनेजर को 15 जनवरी तक सीयूजी (क्लोज्ड यूजर ग्रुप) नंबर जारी किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे विभागीय कामकाज में सहूलियत होगी और आम नागरिकों को भी अपने कार्यों के लिए संबंधित अधिकारियों से सीधे संपर्क करने में आसानी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए यह कदम आवश्यक है।


समीक्षा बैठक में विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार, अपर सचिव विजय प्रकाश मीणा, अपर सचिव मनोज कुमार सहित कई वरीय अधिकारी मौजूद थे। बैठक के दौरान अधिकारियों ने विभागीय योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी और उपमुख्यमंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन का भरोसा दिलाया।


कुल मिलाकर, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के इन निर्देशों से बिहार के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के सुधार की उम्मीद बढ़ गई है। जर्जर सड़कों का पुनर्निर्माण, नए शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर को गति, शिकायत निवारण की नई व्यवस्था और नियमों के सरलीकरण जैसे कदम शहरी विकास को नई दिशा देने वाले साबित हो सकते हैं।