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UPSC : UPSC परीक्षाओं में फेस ऑथेंटिकेशन लागू, आयोग ने जारी किया नोटिस; इन बातों का भी रखें ध्यान

UPSC : UPSC ने IAS, NDA, CDS परीक्षाओं में FACE AUTHENTICATION लागू किया। AI तकनीक से परीक्षा सुरक्षा बढ़ी, इम्पर्सनेशन और नकल पर अब रोक।

UPSC : UPSC परीक्षाओं में फेस ऑथेंटिकेशन लागू, आयोग ने जारी किया नोटिस; इन बातों का भी रखें ध्यान
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

UPSC : संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने अपनी परीक्षाओं की सुरक्षा और पारदर्शिता को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण और तकनीकी रूप से उन्नत कदम उठाया है। 10 जनवरी 2026 को आधिकारिक रूप से घोषित किए गए नए नोटिस के अनुसार, अब यूपीएससी की सभी भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों का परीक्षा केंद्रों पर ‘फेस ऑथेंटिकेशन’ किया जाएगा। यह कदम आयोग की परीक्षाओं में जालसाजी और 'इम्पर्सनेशन' जैसी घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।


उम्मीदवारों को अब केवल ई-एडमिट कार्ड और वैध फोटो आईडी दिखाने की आवश्यकता नहीं होगी। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की ‘लाइव फोटो’ ली जाएगी, जिसे एआई-सक्षम सिस्टम तुरंत उनके आवेदन फॉर्म में अपलोड की गई फोटो से मिलाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया से न केवल फर्जी अभ्यर्थियों की पहचान तेज और भरोसेमंद तरीके से हो सकेगी, बल्कि यह मैन्युअल जांच की तुलना में अधिक प्रभावी भी है।


यूपीएससी का कहना है कि इस नई व्यवस्था के तहत प्रवेश द्वार पर प्रक्रिया पूरी तरह सुव्यवस्थित होगी। अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर प्रवेश पाने के लिए विशेष कैमरों के सामने खड़ा होना होगा, जो उनकी लाइव फोटो खींचेंगे। इसके बाद डिजिटल सिस्टम तुरंत इस फोटो का मिलान कर वास्तविक अभ्यर्थी की पुष्टि करेगा। इस पूरी प्रक्रिया में औसतन केवल 8 से 10 सेकंड का समय लगेगा, जिससे लंबी कतारों और विलंब की समस्या से भी बचा जा सकेगा।


इस तकनीक का पायलट परीक्षण पहले ही गुरुग्राम के कुछ केंद्रों पर NDA और CDS II (सितंबर 2025) की परीक्षाओं में सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के सकारात्मक परिणामों के बाद अब इसे पूरे देश में अनिवार्य किया जा रहा है। यूपीएससी का यह कदम न केवल भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगा, बल्कि तकनीकी उन्नति के दृष्टिकोण से भी एक मील का पत्थर साबित होगा।


अभ्यर्थियों के लिए आयोग ने कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। सबसे पहले, आवेदन फॉर्म में अपलोड की गई फोटो हमेशा नवीनतम और स्पष्ट होनी चाहिए। पुरानी या धुंधली फोटो होने पर एआई सिस्टम को पहचान में कठिनाई हो सकती है। इसके अलावा, अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से कम से कम एक घंटा पहले पहुंचें, ताकि फेस ऑथेंटिकेशन और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो सके।


यूपीएससी ने यह भी स्पष्ट किया है कि फेस ऑथेंटिकेशन की प्रक्रिया के बावजूद अभ्यर्थियों को अपना एडमिट कार्ड का प्रिंटआउट और ओरिजनल फोटो आईडी कार्ड (जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड या वोटर आईडी) साथ लाना अनिवार्य रहेगा। यह कदम विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले वर्षों में कई बार अभ्यर्थियों की पहचान में गड़बड़ी और दूसरे के स्थान पर परीक्षा देने की घटनाएं सामने आई हैं।


यह नई तकनीक भारतीय प्रशासनिक सेवा की भर्ती प्रक्रिया में ईमानदारी और पारदर्शिता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी। एआई आधारित फेस ऑथेंटिकेशन प्रणाली न केवल परीक्षा केंद्रों पर नियंत्रण कड़ी करेगी, बल्कि भविष्य में अन्य उच्चस्तरीय परीक्षाओं में भी इसी तरह की तकनीक अपनाई जा सकती है।


अभ्यर्थियों के लिए यह कदम एक चेतावनी भी है कि अब किसी भी तरह की नकल या इम्पर्सनेशन की कोशिश फेल होगी। आयोग ने कहा है कि तकनीकी जांच से किसी भी असामान्य गतिविधि का तुरंत पता चल जाएगा और नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


इस प्रकार, यूपीएससी द्वारा फेस ऑथेंटिकेशन लागू करना भारतीय परीक्षा प्रणाली में सुरक्षा और पारदर्शिता को नए स्तर पर ले जाने वाला कदम है। यह तकनीकी उन्नति और डिजिटल India की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास भी माना जा रहा है। अब आगामी सिविल सेवा परीक्षा (IAS, IPS, IFS), NDA, CDS और अन्य प्रमुख भर्ती परीक्षाओं में यह नियम प्रभावी होगा।

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