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Bihar News : “डिप्टी सीएम के मंच पर सेक्स रैकेट आरोपी! कॉलेज उद्घाटन का VIDEO बना बिहार की नई सियासी चर्चा; VC बोले मुझे कुछ जानकारी नहीं

सुपौल के त्रिवेणीगंज डिग्री कॉलेज उद्घाटन समारोह का एक वीडियो वायरल होने के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है। मंच पर कथित सेक्स रैकेट आरोपी द्वारा डिप्टी सीएम विजेंद्र यादव और अन्य अतिथियों का स्वागत किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।

 बिहार सरकार के डिप्टी सीएम
डिप्टी सीएम के साथ दीप प्रज्ज्वलित करते हरा घेरा में आरोपी
© reporter
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

Bihar News : सुपौल के त्रिवेणीगंज में डिग्री कॉलेज का उद्घाटन होना था, लेकिन मंच पर जो दृश्य दिखा उसने शिक्षा, राजनीति और सरकारी प्रोटोकॉल—तीनों की ऐसी तैसी कर दी। सरकारी कार्यक्रम में डिप्टी सीएम के स्वागत के लिए फूल-माला लेकर खड़ा वह चेहरा अचानक चर्चा का केंद्र बन गया, जिस पर कभी सेक्स रैकेट चलाने के आरोप लगे थे और जो हाल ही में बेल पर बाहर आया बताया जा रहा है। अब सवाल यह है कि यह कॉलेज उद्घाटन था या राजनीतिक “मैनेजमेंट शो” का लाइव प्रदर्शन?


शनिवार 16 मई 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में बिहार सरकार के डिप्टी सीएम मुख्य अतिथि थे। मंच पर सांसद Dileshwar Kamat और बीएनएमयू के कुलपति Dr. B. S. Jha भी मौजूद थे। सब कुछ सरकारी गरिमा के अनुरूप चल रहा था, तभी मंच पर एक ऐसे शख्स की सक्रिय मौजूदगी दिखी, जिस पर पहले सेक्स रैकेट संचालन के गंभीर आरोप लग चुके हैं। वीडियो में वह न सिर्फ मंच पर दिखाई देता है, बल्कि बड़े सम्मान के साथ वीआईपी मेहमानों को माला पहनाकर स्वागत करता भी नजर आता है।


अब सोचिए, बिहार में सरकारी मंच तक आम आदमी की पहुंच मुश्किल होती है, लेकिन विवादित छवि वाले लोग सीधे डिप्टी सीएम तक माला लेकर पहुंच जा रहे हैं। आखिर यह “प्रोटोकॉल” किस विभाग से पास हुआ था? क्या आयोजकों ने अतिथियों की सूची बनाई थी या जो पहले माला लेकर पहुंच गया वही “स्वागत समिति” बन गया?


विडंबना देखिए कि जिस मंच पर क्षेत्र की पूर्व विधायक Veena Bharti को जगह नहीं मिली, उसी मंच पर विवादों से घिरे चेहरे आराम से घूमते दिखे। राजनीति में यह नया संदेश है क्या—“अनुभव नहीं, वायरल पहचान जरूरी है”?


कार्यक्रम के बाद जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, लोगों ने सवालों की झड़ी लगा दी। कोई कॉलेज प्रशासन को कोस रहा है, कोई जदयू नेताओं पर तंज कस रहा है, तो कोई पूछ रहा है कि क्या अब सरकारी समारोहों में “बैकग्राउंड वेरिफिकेशन” की जगह “पहचान है तो एंट्री है” वाला सिस्टम लागू हो चुका है?


सबसे दिलचस्प रहा बीएनएमयू के कुलपति प्रो. डॉ. बीएस झा का जवाब। उन्होंने हाथ जोड़ते हुए लगभग वही भाव दिया जो अक्सर विवादों में फंसे लोग देते हैं—“हमें क्या पता मंच पर कौन था?” कुलपति महोदय ने साफ कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से सिर्फ डिप्टी सीएम, सांसद और स्थानीय विधायक की उपस्थिति तय थी। बाकी कौन आया, किसने माला पहनाई, किसने मंच संभाला—यह स्थानीय आयोजकों का मामला है।


लेकिन सवाल यह है कि अगर मंच पर कौन बैठा है, इसकी जानकारी कुलपति को नहीं थी, तो फिर कार्यक्रम का नियंत्रण किसके हाथ में था? सरकारी आयोजन में सुरक्षा, प्रोटोकॉल और अतिथियों की सूची कोई मजाक नहीं होती। खासकर तब, जब मंच पर राज्य के उपमुख्यमंत्री मौजूद हों।


इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर बिहार की राजनीतिक संस्कृति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां शिक्षा के मंच पर भी राजनीति हावी दिखती है और राजनीति के मंच पर विवादित चेहरे। उद्घाटन कॉलेज का था, लेकिन चर्चा अब कॉलेज की पढ़ाई से ज्यादा मंच की “मेहमाननवाजी” पर हो रही है।


फिलहाल प्रशासन और जदयू की ओर से कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है। लेकिन सोशल मीडिया की अदालत में फैसला लगभग सुनाया जा चुका है। लोग पूछ रहे हैं—अगर यही सरकारी कार्यक्रमों का नया चेहरा है, तो फिर आम जनता मंच से दूर और विवादित लोग मंच के केंद्र में क्यों हैं?

रिपोर्टिंग
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रिपोर्टर

SANT SAROJ

FirstBihar संवाददाता