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"अगर मरना है तो अपनी मिट्टी पर..." मौत की सजा के बावजूद शेख हसीना का बड़ा ऐलान, दिसंबर 2026 में लौटेंगी बांग्लादेश

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि वह दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटेंगी और अदालत के सामने आत्मसमर्पण करेंगी। जानिए पूरा मामला।

"अगर मरना है तो अपनी मिट्टी पर..." मौत की सजा के बावजूद शेख हसीना का बड़ा ऐलान, दिसंबर 2026 में लौटेंगी बांग्लादेश
Tejpratap
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6 मिनट

ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने एक बड़ा और भावुक ऐलान करते हुए कहा है कि वह दिसंबर 2026 में भारत से बांग्लादेश लौटेंगी और वहां की अदालत के सामने आत्मसमर्पण करेंगी। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब बांग्लादेश की अदालत उन्हें गैरमौजूदगी में मौत की सजा सुना चुकी है और ढाका लगातार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। इसके बावजूद हसीना ने स्पष्ट कर दिया कि वह किसी भी कीमत पर अपने फैसले से पीछे नहीं हटेंगी।


रॉयटर्स को दिए गए लगभग एक घंटे के टेलीफोनिक इंटरव्यू में 78 वर्षीय शेख हसीना ने कहा कि उन्हें अपनी जान का खतरा है और उन्हें गिरफ्तार भी किया जा सकता है, लेकिन वह अपने देश लौटकर न्यायिक प्रक्रिया का सामना करेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि उनके साथ अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी बांग्लादेश वापस जाएंगे और अदालत के समक्ष पेश होंगे।


"अगर मौत भी आए तो अपनी मिट्टी पर आए"

शेख हसीना ने इंटरव्यू के दौरान भावुक अंदाज में कहा कि उन्हें यह अच्छी तरह पता है कि बांग्लादेश लौटने पर उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है या उनकी जान को खतरा हो सकता है। इसके बावजूद उनका मानना है कि उन्हें अपने देश वापस जाना ही होगा।

उन्होंने कहा कि यदि उनकी मृत्यु तय है तो वह चाहती हैं कि यह उनकी अपनी मातृभूमि में हो, जहां उनके माता-पिता दफन हैं और जहां उनके परिवार ने इतिहास के सबसे दर्दनाक क्षणों का सामना किया था। हसीना का दावा है कि इस समय अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर व्यापक स्तर पर अत्याचार और राजनीतिक दमन किया जा रहा है।


2024 के घटनाक्रम के बाद भारत आई थीं

गौरतलब है कि 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में बड़े राजनीतिक संकट और हिंसक छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा था। सत्ता परिवर्तन के बाद वह भारत आ गई थीं, जहां उन्हें शरण मिली। इसके बाद से वह भारत में रह रही हैं।

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बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद उनके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए। नवंबर 2025 में बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने 2024 के आंदोलन के दौरान कथित दमन और हिंसा से जुड़े मामलों में उनकी गैरमौजूदगी में सुनवाई करते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। हालांकि शेख हसीना लगातार इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज करती रही हैं।


अवामी लीग के नेता भी लौट सकते हैं

शेख हसीना ने संकेत दिया कि वह अकेले नहीं लौटेंगी। उनके अनुसार, अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी उनके साथ बांग्लादेश वापस जाएंगे और अदालत की प्रक्रिया का सामना करेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, संभावित रूप से उनके साथ लौटने वालों में बांग्लादेश के पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमा खान कमाल का नाम भी शामिल हो सकता है। उन्हें भी बांग्लादेश की अदालत ने मौत की सजा सुनाई है। ऐसे में यह वापसी केवल एक राजनीतिक फैसला नहीं बल्कि पूरे अवामी लीग नेतृत्व के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


प्रत्यर्पण को लेकर लगातार बना हुआ है विवाद

शेख हसीना की वापसी का बयान ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश लगातार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग करता रहा है। पहले मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार और अब प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी सरकार भारत से उन्हें वापस सौंपने की मांग कर चुकी है। हालांकि हसीना ने साफ कहा कि उनकी वापसी किसी विदेशी सरकार के दबाव या बातचीत का नतीजा नहीं होगी। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस विषय पर किसी भी देश से कोई चर्चा नहीं की है और वह अपनी इच्छा से बांग्लादेश लौटेंगी।


भारत का क्या है रुख?

भारत ने अब तक इस पूरे मामले में संतुलित रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल पहले ही कह चुके हैं कि भारत, बांग्लादेश की ओर से भेजे गए प्रत्यर्पण अनुरोध की समीक्षा कर रहा है। साथ ही भारत ने यह भी दोहराया है कि वह बांग्लादेश की मौजूदा सरकार के साथ रचनात्मक संवाद और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाए रखना चाहता है। दूसरी ओर, शेख हसीना ने यह स्पष्ट किया कि उन्हें किसी सरकार के भेजने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं अपने देश लौटेंगी और कानून के अनुसार अदालत के सामने पेश होंगी।


राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा

शेख हसीना के इस ऐलान ने बांग्लादेश और दक्षिण एशिया की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। एक तरफ उनके समर्थक इसे साहसिक फैसला बता रहे हैं, वहीं विरोधी दल इसे राजनीतिक रणनीति के रूप में देख रहे हैं। अब सबकी नजर दिसंबर 2026 पर टिकी है कि क्या शेख हसीना वास्तव में बांग्लादेश लौटती हैं और वहां की अदालत के सामने आत्मसमर्पण करती हैं या नहीं। उनकी संभावित वापसी आने वाले समय में बांग्लादेश की राजनीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।