Bihar News : बिहार के सहरसा जिले में मिड डे मील खाने के बाद बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों के बीमार पड़ने के मामले में अब पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस गंभीर घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने सहरसा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। साथ ही भागलपुर स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेट्री (एफएसएल) को भेजे गए भोजन के सैंपल की जांच रिपोर्ट भी अदालत में प्रस्तुत करने को कहा गया है।
यह मामला सहरसा जिले के महिषी प्रखंड स्थित बलुआहा राजकीय मध्य विद्यालय का है, जहां बीते 7 मई को मिड डे मील खाने के बाद अचानक बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी थी। कई छात्र-छात्राओं को पेट दर्द, उल्टी और चक्कर आने की शिकायत हुई थी। देखते ही देखते स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद यह चर्चा भी सामने आई थी कि मिड डे मील में मरा हुआ सांप मिला था, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पटना हाईकोर्ट की जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की। अदालत ने साफ कहा कि बच्चों की सेहत से जुड़ी ऐसी घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और इसकी गहन जांच जरूरी है। कोर्ट ने सहरसा के खाद्य आपूर्ति अधिकारी और अगमकुआं स्थित खाद्य विश्लेषक को भी अपनी-अपनी रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
इसके अलावा अदालत ने उस एनजीओ को भी मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है, जो स्कूल में मिड डे मील की आपूर्ति कर रहा था। कोर्ट ने भारतरत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर दलित उत्थान एवं शिक्षा समिति, बलुआहा चौक को भी केस में शामिल करने को कहा है। माना जा रहा है कि इसी संस्था के माध्यम से भोजन वितरण का काम किया जा रहा था।
हाईकोर्ट ने मिड डे मील योजना के निदेशक को भी पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। अदालत यह जानना चाहती है कि भोजन की गुणवत्ता जांचने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था की गई थी तथा इसमें कहीं लापरवाही तो नहीं बरती गई।
सुनवाई के दौरान सहरसा के जिलाधिकारी की ओर से कोर्ट को जानकारी दी गई कि इस घटना में कुल 189 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालांकि राहत की बात यह रही कि इलाज के बाद बच्चों की हालत में सुधार हुआ और उन्हें धीरे-धीरे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
गौरतलब है कि बिहार के करीब 68 हजार 795 सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत कक्षा आठ तक के विद्यार्थियों को स्कूल में भोजन उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में सहरसा की यह घटना पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 जून को होगी। माना जा रहा है कि अदालत की निगरानी में चल रही जांच के बाद इस पूरे प्रकरण में कई अहम खुलासे हो सकते हैं।





