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बिहार के उद्योगपतियों को राहत, अब बिना नुकसान के वापस करें बंद फैक्ट्रियों की जमीन

बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (बियाडा) ने 'एक्जिट पॉलिसी-2025' लागू की है। इसके तहत उद्यमी 31 दिसंबर 2025 तक बंद पड़ी फैक्ट्री की जमीन वापस कर सकते हैं। शुल्क 10% से 20% तक होगा। भुगतान तीन किश्तों में होगा।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Feb 27, 2025, 12:57:18 PM

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बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) ने उद्योगपतियों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अगर किसी को औद्योगिक क्षेत्र में जमीन आवंटित हुई थी, लेकिन वहां उत्पादन शुरू नहीं हुआ या कारखाना बंद है, तो अब उद्यमी अपनी जमीन वापस कर सकते हैं। इसके लिए बियाडा ने नई 'एग्जिट पॉलिसी-2025' लागू की है। जमीन वापस करने के लिए 31 दिसंबर 2025 तक आवेदन किया जा सकता है। यह नीति पुरानी औद्योगिक इकाइयों के साथ-साथ हाल ही में आवंटित नई इकाइयों पर भी लागू होगी। बियाडा द्वारा वापस ली गई जमीन दूसरे उद्यमियों को आवंटित की जाएगी। 


एग्जिट पॉलिसी के तहत बंद औद्योगिक भूखंडों को वापस करने पर उद्यमियों को कुछ शुल्क देना होगा। बियाडा पहले अपना बकाया काटेगा और फिर शेष राशि उद्यमियों को वापस करेगा। शुल्क की दरें इस प्रकार तय की गई हैं। 1 से 3 साल तक बंद फैक्ट्री की जमीन पर 10% शुल्क, 3 से 5 साल तक बंद फैक्ट्री की जमीन पर 15% शुल्क और 5 साल से अधिक समय तक बंद फैक्ट्री की जमीन पर 20% शुल्क देना होगा।  जमीन वापस करने के बाद बियाडा उद्यमियों को चरणबद्ध तरीके से भुगतान करेगा। पहले चार महीने में कुल भुगतान का 40% वापस किया जाएगा। अगले चार महीने में 30% राशि दी जाएगी। शेष 30% राशि उद्यमियों को आठ महीने बाद दी जाएगी। 


बियाडा की 2022 भूमि आवंटन नीति के दायरे में आने वाली नई आवंटित इकाइयां भी इस नीति का लाभ ले सकती हैं। भूमि मद में भुगतान की गई कुल राशि का 10% शुल्क काटकर भुगतान किया जाएगा। आवेदन स्वीकृत होने के बाद उद्यमियों को तीन महीने के अंदर अपने निर्माण और मशीनें हटाकर जमीन खाली करनी होगी। अगर किसी उद्यमी ने अपनी जमीन किसी तीसरे पक्ष को हस्तांतरित कर दी है तो वह इस नीति का लाभ नहीं ले पाएगा। जिन उद्यमियों के खिलाफ कानूनी विवाद चल रहा है, उन्हें पहले अपने मामले वापस लेने होंगे। इसका लाभ केवल उन्हीं उद्योगपतियों को मिलेगा, जिनकी जमीन का आवंटन वैध है।


बियाडा का उद्देश्य उद्योगों को पुनर्जीवित करना और बेकार पड़े भूखंडों का समुचित उपयोग सुनिश्चित करना है। इस नीति से उन उद्यमियों को लाभ मिलेगा जो अब अपनी फैक्टरी चलाने में सक्षम नहीं हैं और अपनी जमीन वापस करना चाहते हैं।