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BIHAR NEWS : राबड़ी देवी के ‘कंगन गिफ्ट’ पर बढ़ा सियासी घमासान, EOU-ED और आयकर विभाग से जांच की मांग; JDU नेता ने लोकायुक्त को भी भेजी शिकायत

BIHAR NEWS : राबड़ी देवी द्वारा भोजपुरी गायक छोटू छलिया को कथित तौर पर दिए गए कंगन को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कंगन की कीमत और प्रकृति को लेकर विरोधाभासी दाव

BIHAR NEWS : राबड़ी देवी के ‘कंगन गिफ्ट’ पर बढ़ा सियासी घमासान, EOU-ED और आयकर विभाग से जांच की मांग; JDU नेता ने लोकायुक्त को भी भेजी शिकायत
Tejpratap
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BIHAR NEWS : राष्ट्रीय जनता दल (RJD) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के जन्मदिन समारोह में भोजपुरी गायक राम शरण यादव उर्फ छोटू छलिया को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा कथित रूप से दिए गए कंगन का मामला अब राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के नेता सह सत्तारूढ़ दल के सचेतक और विधान पार्षद नीरज कुमार ने इस पूरे प्रकरण की जांच की मांग करते हुए आर्थिक अपराध इकाई (EOU), आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और लोकायुक्त को शिकायत भेजी है।


नीरज कुमार ने 13 जून को भेजे गए अपने आवेदन में कहा है कि- विभिन्न समाचार माध्यमों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह खबर व्यापक रूप से प्रसारित हुई कि लालू प्रसाद यादव के जन्मदिन समारोह के दौरान बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भोजपुरी गायक छोटू छलिया को एक बहुमूल्य कंगन उपहार में दिया था। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि स्वयं छोटू छलिया ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उन्हें राबड़ी देवी की ओर से यह कंगन मिला था।


इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब कंगन की वास्तविक प्रकृति और उसकी कीमत को लेकर अलग-अलग दावे सामने आने लगे। कुछ रिपोर्टों में इसे हीरे का कंगन बताया गया, जबकि बाद में राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि यह कोई हीरे का आभूषण नहीं था। इसी विरोधाभास को आधार बनाते हुए नीरज कुमार ने जांच की मांग उठाई है।


अपने आवेदन में उन्होंने कहा है कि यदि संबंधित कंगन वास्तव में हीरे या अन्य बहुमूल्य धातु एवं रत्नों से निर्मित है, तो उसकी खरीद, भुगतान के स्रोत, कर अनुपालन और वैध आय के स्रोत से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े होते हैं। वहीं यदि कंगन की प्रकृति और कीमत को लेकर भ्रामक जानकारी सार्वजनिक की गई है, तो उस पहलू की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।


शिकायत में आर्थिक अपराध इकाई से छह प्रमुख बिंदुओं पर जांच कराने की मांग की गई है। इनमें कंगन की वास्तविक प्रकृति और बाजार मूल्य का स्वतंत्र मूल्यांकन, खरीद बिल और भुगतान के स्रोत की जांच, आयकर अधिनियम 1961 के तहत कर देनदारी और आवश्यक प्रकटीकरण का सत्यापन, बेनामी लेन-देन (निषेध) अधिनियम 1988 के संभावित पहलुओं की पड़ताल, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 के तहत जांच की आवश्यकता तथा किसी भी प्रकार की अघोषित संपत्ति, कर चोरी या वित्तीय अनियमितता की जांच शामिल है।


नीरज कुमार ने अपने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि पूर्व में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार का नाम जमीन के बदले नौकरी मामले में सामने आ चुका है, जिसमें केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा कार्रवाई की गई थी। हालांकि, वर्तमान शिकायत सीधे तौर पर कंगन विवाद और उससे जुड़े वित्तीय पहलुओं की जांच की मांग पर केंद्रित है।


आवेदन के साथ संबंधित समाचार रिपोर्टों, वेब पोर्टल की खबरों, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य उपलब्ध दस्तावेजों को भी संलग्न किए जाने की बात कही गई है। शिकायत की प्रतिलिपि बिहार एवं झारखंड के प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त, प्रवर्तन निदेशालय के पटना क्षेत्रीय कार्यालय तथा बिहार लोकायुक्त को भी भेजी गई है।


इस बीच राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष इसे पारदर्शिता और जवाबदेही का मामला बता रहा है, जबकि आरजेडी नेताओं का कहना है कि इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए अनावश्यक रूप से उछाला जा रहा है।


फिलहाल आर्थिक अपराध इकाई, आयकर विभाग या प्रवर्तन निदेशालय की ओर से इस शिकायत पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं राबड़ी देवी और आरजेडी की तरफ से भी शिकायत को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसियां शिकायत पर क्या कदम उठाती हैं और क्या इस मामले में कोई औपचारिक जांच शुरू होती है या नहीं।