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Bihar News: क्या फिर दोहराएगा 2018 का इतिहास? राबड़ी आवास विवाद ने बढ़ाई बिहार की सियासी गर्मी; घर के बाहर लाठी लेकर डटे कार्यकर्ता

राबड़ी आवास विवाद ने बिहार की राजनीति को फिर गरमा दिया है। सुरक्षा कटौती, बंगला खाली करने का नोटिस और लालू प्रसाद की वापसी से पहले राजद ने मोर्चा संभाल लिया है। जानिए पूरा मामला।

Lalu Yadav
Rabdi devi house
© File photo
Tejpratap
Tejpratap
5 मिनट

Lalu Yadav :  बिहार की राजनीति में एक बार फिर राबड़ी आवास चर्चा के केंद्र में है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। हालांकि राजद को उम्मीद थी कि वर्ष 2018 की तरह इस बार भी सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करेगी, लेकिन मौजूदा हालात में ऐसा होता नहीं दिख रहा है।


सरकार की ओर से न तो राबड़ी देवी को 10, सर्कुलर रोड स्थित पुराने सरकारी आवास में बने रहने की अनुमति मिलने के संकेत हैं और न ही सुरक्षा व्यवस्था में की गई कटौती को वापस लेने की कोई संभावना दिखाई दे रही है। ऐसे में राजद ने अपने स्तर पर मोर्चा संभाल लिया है।


इधर पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद के सिंगापुर से पटना लौटने की तैयारी के बीच राबड़ी आवास पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजद कार्यकर्ताओं को दो पालियों में तैनात किया गया है। सुबह से लेकर रात तक और रात से सुबह तक कार्यकर्ताओं की टीम आवास की निगरानी कर रही है। पार्टी नेताओं का भी रोजाना आवास पर जमावड़ा लग रहा है।


इस बीच लालू परिवार अब नए आवास में शिफ्ट होने की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार कर रहा है। रविवार को राबड़ी देवी ने कौटिल्य नगर स्थित उस मकान का निरीक्षण किया जहां निर्माण कार्य अभी जारी है। माना जा रहा है कि भविष्य में परिवार वहीं शिफ्ट हो सकता है।


दरअसल, विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राबड़ी देवी को पिछले वर्ष नवंबर में 39, हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास आवंटित किया गया था। इसके बावजूद वे अभी तक पुराने आवास में रह रही हैं। सरकार की ओर से तीसरी बार आवास खाली करने का नोटिस मिलने के बाद राबड़ी देवी ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि यदि सरकार चाहती है तो बलपूर्वक आवास खाली करा सकती है, लेकिन वे स्वेच्छा से वहां से नहीं जाएंगी।


इस मुद्दे पर राजद और सत्ता पक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। राजद नेताओं ने चेतावनी दी थी कि यदि दबाव बनाया गया तो पार्टी के सभी जनप्रतिनिधि अपने सरकारी आवास लौटा देंगे। वहीं सत्ता पक्ष ने भी पलटवार करते हुए कहा कि सरकारी आवास किसी की निजी संपत्ति नहीं होता और नियमों का पालन सभी को करना होगा।


इसी दौरान राज्य सुरक्षा समिति द्वारा लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और तेजप्रताप यादव की सुरक्षा व्यवस्था में कटौती किए जाने का फैसला भी राजनीतिक बहस का विषय बन गया। हालांकि तेजस्वी यादव, मीसा भारती और राजश्री यादव को अब भी सरकारी सुरक्षा उपलब्ध है।


राजद नेताओं का दावा है कि सुरक्षा कटौती का फैसला राजनीतिक भावना से प्रेरित है। पार्टी को वर्ष 2018 की घटना भी याद आ रही है, जब लालू प्रसाद की सुरक्षा में तैनात जवानों को वापस बुला लिया गया था। उस समय राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी। बाद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हस्तक्षेप के बाद सुरक्षा व्यवस्था बहाल कर दी गई थी।


फिलहाल राबड़ी आवास की सुरक्षा की जिम्मेदारी राजद के पूर्व विधायक दीनानाथ यादव को सौंपी गई है। उनके अनुसार पार्टी कार्यकर्ता किसी भी परिस्थिति में परिवार के साथ खड़े रहने को तैयार हैं। उन्होंने दावा किया कि कार्यकर्ता चौबीसों घंटे पहरा दे रहे हैं और जरूरत पड़ने पर संघर्ष के लिए भी तैयार हैं।


उधर रविवार को लालू प्रसाद ने दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पार्टी नेताओं और आवास पर तैनात कार्यकर्ताओं से बातचीत की। उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों को चुनौतीपूर्ण बताते हुए कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया और संयम के साथ राजनीतिक संघर्ष जारी रखने की अपील की।


राजनीतिक गलियारों में अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि लालू प्रसाद के पटना लौटने के बाद यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या राजद इस मुद्दे को बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप देता है।