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पुलिस कस्टडी में युवक के साथ बर्बरता पर हाई कोर्ट सख्त, SHO पर FIR दर्ज करने का आदेश; CID को केस सौंपने के निर्देश

Patna High Court: बक्सर के मुरार थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष कमल नयन पांडेय के खिलाफ पटना हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने जांच सीआईडी को सौंपने और डीजीपी से 30 दिनों में रिपोर्ट मांगी है।

Patna High Court
प्रतिकात्मक तस्वीर
© AI
Mukesh Srivastava
2 मिनट

Patna High Court: बिहार में कथित पुलिस उत्पीड़न के एक गंभीर मामले में पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए बक्सर के मुरार थाने के तत्कालीन थानाध्यक्ष कमल नयन पांडेय के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है। यह मामला एक युवक के साथ कथित बर्बर मारपीट और हिरासत में प्रताड़ना से जुड़ा है।


न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार की पीठ ने भोजपुर निवासी मनीष कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि जुलाई 2024 में दस्तावेज अपलोड कराने के दौरान मुरार थाना पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर बेरहमी से पीटा, जिससे उनकी दोनों टांगें टूट गईं। आरोप है कि घटना के बाद उन्होंने कई अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।


सुनवाई के दौरान पुलिस की ओर से दलील दी गई कि मनीष कुमार की टांगें बारिश के दौरान फिसलने से टूटी थीं। हालांकि कोर्ट ने एक्स-रे रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों का हवाला देते हुए इस दलील पर संदेह व्यक्त किया। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री गंभीर संज्ञेय अपराध की ओर संकेत करती है, इसलिए मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।


हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया कि तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाए और पूरे मामले की जांच सीआईडी को सौंपी जाए। साथ ही पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को 30 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो याचिकाकर्ता सीबीआई जांच की मांग को लेकर दोबारा न्यायालय का रुख कर सकता है।

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FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता