Patna High Court News: बिहार में जमानत मामलों के निपटारे में तेजी लाने और आरोपितों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए पटना हाई कोर्ट ने नई एसओपी जारी की है। इसके तहत राज्य की सभी अधीनस्थ अदालतों को जमानत और अग्रिम जमानत याचिकाओं का दाखिल होने की तारीख से यथासंभव दो महीने के भीतर निपटारा करने का निर्देश दिया गया है।
इस पहल का उद्देश्य जमानत मामलों में अनावश्यक देरी रोकना, जरूरी रिपोर्ट समय पर उपलब्ध कराना और लंबित याचिकाओं की निगरानी व जवाबदेही बढ़ाना है। यह एसओपी सुप्रीम कोर्ट के 12 सितंबर 2025 के फैसले के अनुपालन में जारी की गई है।
एसओपी के अनुसार, जमानत याचिकाओं की सुनवाई के दौरान अनावश्यक स्थगन यानी तारीख बढ़ाने से बचना होगा। केवल अधिवक्ताओं के अनुरोध पर सुनवाई स्थगित नहीं की जाएगी। असाधारण परिस्थितियों में ही अदालत अगली तारीख तय कर सकेगी। ऐसी स्थिति में पीठासीन अधिकारी को अपने आदेश में स्थगन का ठोस कारण दर्ज करना अनिवार्य होगा।
यदि कोई जमानत याचिका दो महीने से अधिक समय तक लंबित रहती है, तो संबंधित न्यायाधीश को आदेश पत्र में देरी का स्पष्ट कारण बताना होगा। इस व्यवस्था से लंबित मामलों की निगरानी मजबूत करने और समय पर सुनवाई सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है।
नई एसओपी के तहत जमानत याचिका दाखिल करने से पहले उसकी एक प्रति संबंधित लोक अभियोजक या जिला अभियोजन अधिकारी को उपलब्ध करानी होगी। इससे केस डायरी और अन्य जरूरी दस्तावेज मंगाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा सकेगी।
हाई कोर्ट ने जख्म रिपोर्ट (इंजरी रिपोर्ट), पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) रिपोर्ट और केस डायरी जैसे जरूरी दस्तावेज पांच दिनों के भीतर अदालत को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। समय बचाने के लिए केस डायरी की स्कैन प्रति व्हाट्सऐप या ईमेल के माध्यम से भेजने और दस्तावेजों को डिजिटल रूप में पेश करने की व्यवस्था भी की गई है। जमानत मामलों में जरूरी दस्तावेजों की उपलब्धता में देरी रोकने के लिए पुलिस और अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया है। इसके लिए डीएसपी स्तर के नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई है।
समय पर जरूरी रिपोर्ट और दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने वाले अधिकारियों के खिलाफ अदालत कठोर कार्रवाई कर सकती है। इस कदम का उद्देश्य पुलिस और अभियोजन पक्ष की ओर से होने वाली देरी पर अंकुश लगाना है, ताकि जमानत याचिकाओं की सुनवाई अनावश्यक रूप से प्रभावित न हो। एसओपी में हाई कोर्ट और जिला स्तर पर जमानत मामलों की नियमित निगरानी के लिए समर्पित डैशबोर्ड बनाने का सुझाव दिया गया है। इसके माध्यम से लंबित याचिकाओं को उनकी अवधि के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाएगा।
इन श्रेणियों में 30 दिन तक, 31 से 60 दिन, 61 से 90 दिन और 90 दिन से अधिक समय से लंबित याचिकाएं शामिल होंगी। 60 दिन से अधिक पुरानी या दो महीने की समयसीमा के करीब पहुंच चुकी याचिकाओं को प्राथमिकता से दिखाने के लिए लाल निशान से चिह्नित किया जाएगा। इसके अलावा, सभी अधीनस्थ अदालतों को जमानत मामलों का मासिक विवरण संबंधित जिला एवं सत्र न्यायाधीश को भेजना होगा।
पटना हाई कोर्ट की इस नई पहल से जमानत और अग्रिम जमानत याचिकाओं के निपटारे में तेजी लाने, अनावश्यक स्थगन पर रोक लगाने और पुलिस व अभियोजन से जरूरी दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत करने का प्रयास किया गया है। साथ ही, लंबित मामलों में देरी के कारण दर्ज करने और नियमित निगरानी की व्यवस्था से न्यायिक प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया गया है।




