1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 08, 2026, 12:27:15 PM
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Bihar News : पटना शहर में ऑटो रिक्शा परिचालन को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के लिए एक नई व्यवस्था लागू की जा रही है। क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार (आरटीए) ने बड़ा फैसला लेते हुए शहर में ऑटो के जोनल परमिट की संख्या 18 हजार से बढ़ाकर 22 हजार करने का निर्णय लिया है। इस फैसले से हजारों ऑटो चालकों को राहत मिलने की उम्मीद है और शहर के यातायात प्रबंधन में भी सुधार आएगा।
आरटीए की नई योजना के तहत कुल 22 हजार परमिट जारी किए जाएंगे। इनमें से 19,800 ऑटो को नियमित जोनल परमिट दिया जाएगा, जबकि 2,200 परमिट रिजर्व श्रेणी में रखे जाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि इससे ऑटो संचालन को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा और शहर में अनियमित रूप से चल रहे ऑटो की समस्या भी काफी हद तक खत्म होगी।
2014 के बाद फिर खुलेगा परमिट का रास्ता
पटना में शहरी क्षेत्र के लिए नए ऑटो परमिट जारी करने पर वर्ष 2014 से रोक लगी हुई थी। इस वजह से कई चालक ग्रामीण परमिट या बिना वैध दस्तावेजों के ही शहर में ऑटो चलाने को मजबूर थे। अब करीब एक दशक बाद इस पाबंदी को हटाने का फैसला लिया गया है, जिसे ऑटो चालकों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
नई व्यवस्था के तहत परमिट जारी करने की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है ताकि इसमें पारदर्शिता बनी रहे। आवेदन करने वाले हर ऑटो चालक को अपने जोन के तीन प्रमुख रूट चुनने का विकल्प मिलेगा। इसके बाद आरटीए सभी आवेदनों की समीक्षा करेगा और तय करेगा कि किस चालक को कौन सा रूट आवंटित किया जाए।
इस प्रक्रिया में उन चालकों को प्राथमिकता दी जाएगी जिनके पास पहले से पुराना परमिट है। इसके बाद नए आवेदकों को भी चरणबद्ध तरीके से परमिट दिए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि इससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या पक्षपात की संभावना काफी कम हो जाएगी।
क्यूआर कोड से होगी ऑटो की डिजिटल पहचान
इस बार जारी होने वाले परमिट को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जा रहा है। हर ऑटो पर एक विशेष क्यूआर कोड लगाया जाएगा। इस कोड को मोबाइल से स्कैन करते ही वाहन से जुड़ी पूरी जानकारी सामने आ जाएगी।
स्कैन करने पर वाहन मालिक का नाम, इंजन नंबर, चेसिस नंबर और ऑटो को आवंटित रूट की जानकारी मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देगी। इससे ट्रैफिक पुलिस के लिए यह पता लगाना बेहद आसान हो जाएगा कि कोई ऑटो निर्धारित रूट पर चल रहा है या नहीं।
अगर कोई ऑटो चालक अपने निर्धारित रूट के बाहर वाहन चलाता पाया गया, तो उसे तुरंत चिन्हित कर कार्रवाई की जा सकेगी। इस तकनीक के इस्तेमाल से यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने में भी मदद मिलेगी।
चोरी रोकने और सुरक्षा बढ़ाने में भी मदद
क्यूआर कोड आधारित प्रणाली का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि इससे ऑटो चोरी की घटनाओं पर भी लगाम लगाई जा सकेगी। वाहन की पूरी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज होने के कारण चोरी होने पर उसकी पहचान करना आसान होगा। यात्रियों के लिए भी यह व्यवस्था अधिक सुरक्षित मानी जा रही है। क्यूआर कोड स्कैन करके यात्री यह जान सकेंगे कि वे जिस ऑटो में सफर कर रहे हैं वह वैध है या नहीं।
जुर्माने से मिलेगी राहत
फिलहाल पटना की सड़कों पर बड़ी संख्या में ऐसे ऑटो चल रहे हैं जिनके पास शहरी परमिट नहीं है। कई चालक ग्रामीण परमिट के आधार पर ही शहर में वाहन चला रहे हैं। इस वजह से ट्रैफिक पुलिस की चेकिंग के दौरान उन्हें भारी जुर्माना भरना पड़ता है। नई जोनल परमिट व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे चालकों को वैध शहरी परमिट लेने का मौका मिलेगा। इससे उनका परिचालन पूरी तरह कानूनी हो जाएगा और बार-बार लगने वाले जुर्माने से भी राहत मिलेगी। बहरहाल इस पहल से न केवल ऑटो चालकों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, बल्कि पटना शहर में यातायात व्यवस्था को भी अधिक सुव्यवस्थित और अनुशासित बनाया जा सकेगा।