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पटना में ट्रैफिक जाम खत्म करने को AI संभालेगा कमान, हादसे की पहचान से 10 मिनट में अस्पताल पहुंचेगी एंबुलेंस

पटना में ट्रैफिक जाम और सड़क हादसों से निपटने के लिए AI आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव है। AI 30-40 मिनट पहले जाम का अनुमान लगाएगा और हादसे में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एंबुलेंस को 10 मिनट में अस्पताल पहुंचाने में मदद करेगा।

बिहार न्यूज
हादसा होते ही AI देगा अलर्ट, बनेगा ग्रीन कॉरिडोर
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

PATNA: पटना को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने की तैयारी है। इसके जरिए संभावित जाम का 30 से 40 मिनट पहले पूर्वानुमान लगाया जाएगा और जरूरत के मुताबिक सिग्नल व डायवर्जन को स्वचालित रूप से लागू किया जा सकेगा। इमरजेंसी की स्थिति में ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एंबुलेंस को अधिकतम 10 मिनट में अस्पताल पहुंचाने की योजना है।


शनिवार को परिवहन विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल की अध्यक्षता में पटना की यातायात व्यवस्था को लेकर अहम बैठक हुई। इसमें विभागीय अधिकारियों के साथ ट्रैफिक मैनेजमेंट विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। बैठक में शहर की भौगोलिक संरचना, बढ़ती आबादी, वाहनों का दबाव, अतिक्रमण, ट्रैफिक नियमों और मौजूदा यातायात व्यवस्था की चुनौतियों पर चर्चा की गई।


इन इलाकों में जाम पर हुआ मंथन

बैठक में डाक बंगला, पटना रेलवे स्टेशन रोड, जीपीओ गोलंबर, एग्जीबिशन रोड, बोरिंग रोड, गांधी मैदान, पीएमसीएच, अशोक राजपथ, सगुना मोड़, अनीसाबाद और बेली रोड समेत प्रमुख इलाकों में लगने वाले जाम की समस्या पर विस्तार से चर्चा हुई। सड़क हादसों को कम करने और दुर्घटना के बाद त्वरित मदद पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।


कमांड सेंटर में जुड़ेगी AI की इंटेलिजेंस लेयर

पटना के एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के मौजूदा बुनियादी ढांचे का अधिकतम इस्तेमाल करते हुए उसके ऊपर एक नई ‘इंटेलिजेंस लेयर’ विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसमें AI, डेटा एनालिटिक्स और एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म की मदद से ट्रैफिक का रियल-टाइम विश्लेषण किया जाएगा। AI आधारित मॉडल संभावित ट्रैफिक लोड और जाम का 30-40 मिनट पहले अनुमान लगाएगा। इसके बाद जरूरत के अनुसार वाहनों को वैकल्पिक मार्गों पर डायवर्ट करने और ट्रैफिक सिग्नल में बदलाव की व्यवस्था की जा सकेगी।


ई-रिक्शा और ऑटो के लिए जियोफेंसिंग

योजना के तहत ई-रिक्शा और ऑटो के लिए जियोफेंसिंग, वर्चुअल स्टैंड और शेड्यूलिंग की व्यवस्था करने पर भी चर्चा हुई। रेलवे स्टेशन, बाजार और अन्य प्रमुख स्थानों पर वाहनों के अनियंत्रित ठहराव को नियंत्रित किया जाएगा। मेट्रो स्टेशनों के आसपास भीड़ और ड्रॉप-ऑफ व्यवस्था को बेहतर तरीके से मैनेज करने की योजना है।


इसके अलावा ट्रैफिक नियंत्रण में तैनात जवानों की उपस्थिति की निगरानी के लिए अटेंडेंस मॉनीटरिंग सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव है।


हादसा होते ही AI देगा अलर्ट, बनेगा ग्रीन कॉरिडोर

प्रस्तावित सिस्टम सड़क हादसों की AI के जरिए स्वत: पहचान कर सकेगा। हादसे की जानकारी मिलते ही नजदीकी एंबुलेंस को अलर्ट भेजा जाएगा। इसके बाद घायल को अस्पताल पहुंचाने के लिए सबसे उपयुक्त मार्ग की पहचान कर ग्रीन कॉरिडोर तैयार करने की व्यवस्था होगी। लक्ष्य है कि घायल को अधिकतम 10 मिनट में अस्पताल पहुंचाया जा सके।


अतिक्रमण और जलजमाव की भी होगी निगरानी

सड़क किनारे अनधिकृत पार्किंग की पहचान कर उसे नियंत्रित करने और सड़क की प्रभावी चौड़ाई बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। बारिश और जलजमाव की स्थिति में प्रभावित मार्गों की पहले से पहचान कर ट्रैफिक को वैकल्पिक रास्तों पर डायवर्ट करने की व्यवस्था विकसित करने का प्रस्ताव है, ताकि आपातकालीन सेवाओं पर असर न पड़े।


विशेषज्ञों ने पेश किया तकनीकी ड्राफ्ट

बैठक में सीआरआरआई के पूर्व निदेशक और आईआईटी बॉम्बे के पूर्व प्रोफेसर पीके सिकदर तथा आर्केडिस आईबीआई ग्रुप के इंडिया ऑपरेशंस के कंट्री हेड वेंकटा चुंदुरू मौजूद रहे। दोनों विशेषज्ञों ने पटना के ट्रैफिक मैनेजमेंट और संभावित समाधानों को लेकर तैयार तकनीकी ड्राफ्ट का प्रस्तुतीकरण किया।


बैठक में बीएसआरडीसीएल के प्रबंध निदेशक, पटना नगर आयुक्त, ट्रैफिक पुलिस अधीक्षक, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक, जिला प्रशासन, यातायात पुलिस और अन्य वरीय अधिकारी भी मौजूद रहे।

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