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बीजेपी कार्यालय में आजीविका दीदियों का हंगामा, बोलीं- भीड़ जुटाने में इस्तेमाल किया, 14 महीने से नहीं मिला मानदेय

पटना बीजेपी कार्यालय में नगर विकास मंत्री नीतीश मिश्रा से मिलने पहुंचीं शहरी आजीविका मिशन की महिलाओं ने 14 महीने से मानदेय नहीं मिलने और राजनीतिक कार्यक्रमों में भीड़ जुटाने के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगाया। महिलाओं ने सरकार से बकाया भुगतान की

बीजेपी कार्यालय में आजीविका दीदियों का हंगामा, बोलीं- भीड़ जुटाने में इस्तेमाल किया, 14 महीने से नहीं मिला मानदेय
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

PATNA: पटना स्थित बीजेपी कार्यालय में आयोजित सहयोग कार्यक्रम के दौरान शहरी आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की। महिलाओं ने आरोप लगाया कि उन्हें राजनीतिक कार्यक्रमों में भीड़ जुटाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था, जबकि पिछले 14 महीनों से उनका मानदेय तक नहीं दिया गया है। नगर विकास मंत्री नीतीश मिश्रा के समक्ष उन्होंने बकाया भुगतान और योजनाओं को पुनः शुरू करने की मांग उठाई।


पटना के बीजेपी कार्यालय में आयोजित सहयोग कार्यक्रम में गुरुवार को नगर विकास मंत्री नीतीश कुमार से मिलने पहुंची शहरी आजीविका मिशन की महिलाओं ने नेताओं की पोल खोल कर रख दिया। आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाएं कहने लगी की हमको राजनीतिक कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए कहा जाता था। सभी को बस भर-भर के महिलाओं को लाने के लिये कहा जाता था, लेकिन 14 महीने से हमलोगों को मानदेय नहीं मिला है। जिससे हमलोग काफी परेशान हैं। 


संगीता गुप्ता सीआईपी ने कहा कि नगर विकास मंत्री नीतीश मिश्रा से वेतन की मांग करने आए हैं. हम लोगों को 14 महीने से वेतन नहीं मिला है। पैसा नहीं रहने के कारण फिल्ड में जाने में परेशानी आ रही है। नीतीश मिश्रा का आवेदन दिये हैं.समूह बनाने का काम करते थे, वो योजना बंद हो गया है। यह बात मंत्री जी को भी पता है। हम लोग पूरी तरह से निष्क्रिय हो गये, हमलोगों का कोई वजूद नहीं रह गया है। इतना दुख होता है कि रोड पर जाते हैं तो हम लोगों की कोई पहचान नहीं है। दीदी लोग रास्ता में घेर रही है, बहुत हल्ला कर रही है, कहती है कि समूह बनाये हैं कि मजाक की है। अभी तक मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10-10 हजार रुपया सरकार की ओर से नहीं मिल पाया है। 


सीआईपी ने कहा कि चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी में हम महिलाएं वेतन के लिए कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। 3 हजार रुपया ही वेतन मिलता है, वो भी 14 महीने से नहीं मिल रहा है। समय से वेतन नहीं मिलने से भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि जो भी राजनीतिक कार्यक्रम होता है, उसमें महिलाओं की संख्या दिखाने के लिए हमलोगों का इस्तेमाल किया जाता है।


 कहा जाता है कि 5-5 बस भरकर महिलाओं को कार्यक्रम में शामिल कराइए आपलोगों का अच्छा होगा। सारी सीआरपी दीदियों को कहा जाता है कि 500 से हजार महिलाओं को लेकर आईए। भीड़ जुटाने के लिए दीदियों का इस्तेमाल राजनीतिक कार्यक्रम में किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जीविका और शहरी क्षेत्र में आजीविका समूह चल रहा है। इन दोनों के बीच सौतेलापन रवैय्या अपनाया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में हर तरह की सुविधा मिल रहा है लेकिन शहरी क्षेत्र में सारी सुविधाएं और योजनाओं को बंद कर दिया गया है। 

पटना से रजनीश रमण की रिपोर्ट

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