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Bihar Cabinet : नीतीश मिश्रा की पढ़ाई सुन रह जाएंगे हैरान! हार्वर्ड से लेकर इंग्लैंड तक की डिग्रियां, फिर बने बिहार सरकार के मंत्री

बिहार की राजनीति में नीतीश मिश्रा अलग पहचान रखते हैं। हार्वर्ड समेत दुनिया के बड़े संस्थानों से पढ़ाई करने वाले यह नेता अब सम्राट चौधरी सरकार में अहम जिम्मेदारी संभालेंगे।

Bihar Cabinet : नीतीश मिश्रा की पढ़ाई सुन रह जाएंगे हैरान! हार्वर्ड से लेकर इंग्लैंड तक की डिग्रियां, फिर बने बिहार सरकार के मंत्री
Tejpratap
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Bihar Cabinet : बिहार की राजनीति में जहां अक्सर बाहुबल, जातीय समीकरण और सियासी वर्चस्व की चर्चा होती है, वहीं कुछ चेहरे ऐसे भी हैं जिन्होंने अपनी अलग पहचान शिक्षा और विजन के दम पर बनाई है। उन्हीं नेताओं में एक बड़ा नाम है नीतीश मिश्रा का। झंझारपुर से बीजेपी विधायक और अब सम्राट चौधरी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने नीतीश मिश्रा को बिहार की राजनीति का सबसे पढ़ा-लिखा और आधुनिक सोच वाला नेता माना जाता है। उनकी शैक्षणिक यात्रा किसी अंतरराष्ट्रीय स्कॉलर से कम नहीं दिखती।


नीतीश मिश्रा की शुरुआती पढ़ाई पटना के प्रतिष्ठित सेंट माइकल हाई स्कूल से हुई। पढ़ाई के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता भी उनमें बचपन से दिखाई देती थी। यही वजह रही कि वे स्कूल कैप्टन भी चुने गए। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन कॉलेज से इतिहास विषय में ऑनर्स की डिग्री हासिल की। साल 1994 में ग्रेजुएशन पूरा करने के दौरान उन्हें अकादमिक उत्कृष्टता के लिए कॉलेज का प्रतिष्ठित “क्रेस्ट अवॉर्ड” भी मिला।


राजनीति में आने से पहले ही उन्होंने यह साबित कर दिया था कि वे सिर्फ पारिवारिक विरासत के भरोसे आगे बढ़ने वाले नेता नहीं हैं। उन्होंने मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए देश और विदेश के बड़े संस्थानों का रुख किया। दिल्ली के FORE स्कूल ऑफ मैनेजमेंट और नीदरलैंड के मास्ट्रिच स्कूल ऑफ मैनेजमेंट से एमबीए की डिग्री हासिल कर उन्होंने खुद को वैश्विक दृष्टिकोण वाला नेता बनाया।


उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों की सबसे खास बात यह रही कि वे ब्रिटिश सरकार की प्रतिष्ठित “Chevening Scholarship” पाने वाले चुनिंदा भारतीयों में शामिल रहे। इसके तहत उन्होंने इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ हल से “ग्लोबल पॉलिटिकल इकोनॉमी” में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया। इसके बाद साल 2016 में उन्होंने दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित संस्थाओं में गिने जाने वाले हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के जॉन एफ. कैनेडी स्कूल से “इमर्जिंग लीडर्स प्रोग्राम” भी पूरा किया।


बिहार की राजनीति में अक्सर नेताओं की पहचान जाति या जनाधार से तय होती है, लेकिन नीतीश मिश्रा की पहचान एक ऐसे नेता की है जो प्रशासनिक सोच, विकास मॉडल और नीतिगत फैसलों के लिए जाने जाते हैं। वे बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्रा के बेटे जरूर हैं, लेकिन उन्होंने अपनी अलग राजनीतिक छवि बनाई है।


युवा राजनीति में उनकी पकड़ भी काफी मजबूत रही है। साल 2008 में उन्हें “MTV यूथ आइकॉन” सम्मान मिला था। इसके अलावा ब्रिटिश हाई कमीशन ने उन्हें भारत के 30 उभरते युवा नेताओं की सूची में शामिल किया था। यह उपलब्धि बताती है कि उनकी पहचान सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रही, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उन्हें एक प्रभावशाली युवा नेता माना गया।


मंत्री रहते हुए उन्होंने कई अहम नीतियों पर काम किया। उद्योग विभाग में रहते हुए बिहार के लिए “लैंड बैंक” की अवधारणा को मजबूत किया, ताकि निवेशकों को उद्योग लगाने में जमीन संबंधी दिक्कतों का सामना न करना पड़े। इसके साथ ही इथेनॉल पॉलिसी को आगे बढ़ाने में भी उनकी बड़ी भूमिका मानी जाती है। बिहार में उद्योग और निवेश को लेकर जो नई सोच विकसित हुई, उसमें उनकी मैनेजमेंट और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा का प्रभाव साफ दिखाई देता है।


अब एक बार फिर 7 मई 2026 को सम्राट चौधरी सरकार में उन्होंने मंत्री पद की शपथ ली है। इस बार उन्हें बिहार के नगर विकास एवं आवास और आईटी जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनकी आधुनिक सोच, वैश्विक शिक्षा और प्रशासनिक अनुभव बिहार को नई दिशा दे सकता है।नीतीश मिश्रा की कहानी इस बात का उदाहरण है कि बिहार की राजनीति अब सिर्फ परंपरागत समीकरणों तक सीमित नहीं रही। नई पीढ़ी के नेता शिक्षा, नीति और विजन के दम पर भी अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं।