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Patna Eid Namaz 2026 : बदली परंपरा: 20 साल में पहली बार ईद पर गांधी मैदान नहीं पहुंचे नीतीश कुमार, निशांत की एंट्री

पटना के गांधी मैदान में ईद की नमाज के दौरान पहली बार नीतीश कुमार नजर नहीं आए। उनकी जगह बेटे निशांत कुमार पहुंचे, सियासी संकेतों की चर्चा तेज।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 21, 2026, 8:10:50 AM

Patna Eid Namaz 2026 : बदली परंपरा: 20 साल में पहली बार ईद पर गांधी मैदान नहीं पहुंचे नीतीश कुमार, निशांत की एंट्री

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Patna Eid Namaz 2026 : बिहार की सियासत में बीते करीब दो दशकों में एक परंपरा सी बन चुकी थी कि ईद के मौके पर नीतीश कुमार खुद पटना के गांधी मैदान पहुंचते थे, नमाज के बाद लोगों से मुलाकात करते थे और उन्हें ईद की मुबारकबाद देते थे। लेकिन इस बार का नज़ारा अलग रहा। ईद जैसे बड़े पर्व पर मुख्यमंत्री का गांधी मैदान में मौजूद न होना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।


दरअसल, पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में ईद की नमाज बड़े पैमाने पर अदा की गई, जहां हजारों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग जुटे। हर साल की तरह इस बार भी प्रशासनिक तैयारियां पूरी थीं, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी और आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। लेकिन इस बार सबसे बड़ी गैर-मौजूदगी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की रही।


जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री की जगह उनके बेटे निशांत कुमार गांधी मैदान पहुंचे। वह ख़ास सिक्योरिटी के साथ वहां मौजूद रहे और कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक तौर पर उनकी उपस्थिति दर्ज की गई। यह पहली बार है जब लंबे समय बाद ईद के मौके पर मुख्यमंत्री खुद गांधी मैदान नहीं पहुंचे।


`हालांकि, इस बार सबसे ज्यादा ध्यान जिस बात ने खींचा, वह था मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अनुपस्थिति। आमतौर पर वह खुद गांधी मैदान पहुंचते थे, नमाज के बाद लोगों से मुलाकात करते और उन्हें ईद की शुभकामनाएं देते थे। उनकी यह परंपरा सामाजिक सौहार्द और राजनीतिक संदेश दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती रही है।


सूत्रों के मुताबिक, इस बार मुख्यमंत्री की जगह उनके बेटे निशांत कुमार गांधी मैदान पहुंचे। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उनकी मौजूदगी दर्ज की गई। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उन्होंने कार्यक्रम में भाग लिया और लोगों से मुलाकात भी की। यह पहली बार है जब लंबे समय बाद ईद जैसे बड़े पर्व पर मुख्यमंत्री खुद कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।


इस बदलाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। Janata Dal (United) (जेडीयू) से जुड़े एक नेता ने बताया कि यह फैसला अचानक नहीं, बल्कि सोच-समझकर लिया गया है। उनके अनुसार, निशांत कुमार की हाल ही में पार्टी में सक्रिय एंट्री हुई है और अब उन्हें धीरे-धीरे सार्वजनिक और राजनीतिक मंचों पर उतारा जा रहा है।


नेता का कहना है कि पार्टी नेतृत्व चाहता है कि निशांत कुमार को जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ने का मौका मिले, खासकर ऐसे बड़े आयोजनों के जरिए जहां जनसंपर्क का व्यापक अवसर मिलता है। ईद जैसे पर्व पर गांधी मैदान की मौजूदगी को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम जेडीयू के भीतर भविष्य की राजनीति की दिशा का संकेत भी हो सकता है। आने वाले समय में निशांत कुमार को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है, इसलिए उन्हें अभी से तैयार किया जा रहा है। हालांकि, पार्टी की ओर से इस पर आधिकारिक रूप से कोई बड़ा बयान सामने नहीं आया है।


वहीं, विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी एक महत्वपूर्ण संदेश देती है और इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। हालांकि, जेडीयू इसे एक सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया और नई पीढ़ी को आगे लाने की रणनीति बता रही है।


कुल मिलाकर, पटना की ईद नमाज इस बार केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने बिहार की सियासत में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि निशांत कुमार की भूमिका किस तरह विकसित होती है और जेडीयू की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।