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New Voter Rules : नए वोटर बनने के नियम बदले? अब Form-6 में माता-पिता और दादा-दादी की वोटर डिटेल भी पूछी जा रही, जानिए पूरा मामला

देश में नए वोटर बनने की प्रक्रिया को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। चुनाव आयोग के ऑनलाइन Form-6 में माता-पिता और दादा-दादी की वोटर डिटेल से जुड़े नए विकल्प जोड़े गए हैं। जानिए क्या बदलेगा, किस पर पड़ेगा असर और पूरा विवाद क्या है।

New Voter Rules
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Tejpratap
Tejpratap
7 मिनट

New Voter Rules : देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) की प्रक्रिया के बाद नए मतदाता बनने की प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आया है। चुनाव आयोग के ऑनलाइन Form-6 में ऐसे नए कॉलम जोड़े गए हैं, जिनमें आवेदन करने वाले व्यक्ति से यह जानकारी मांगी जा रही है कि क्या उसका नाम, उसके माता-पिता या फिर दादा-दादी का नाम पिछले SIR के दौरान मतदाता सूची में दर्ज था या नहीं।

हालांकि यह बदलाव फिलहाल केवल ऑनलाइन पोर्टल पर दिखाई दे रहा है। वेबसाइट से डाउनलोड किए जाने वाले ऑफलाइन फॉर्म में अभी यह नया विकल्प मौजूद नहीं है। यही वजह है कि इस बदलाव को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी परिवार का नाम विशेष पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से हट चुका है तो क्या उनके बच्चों या नए मतदाताओं के नाम जोड़ने में कोई परेशानी होगी? फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से इस पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।

ऑनलाइन Form-6 में क्या बदला?

मतदाता सूची में पहली बार नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 के ऑनलाइन संस्करण में दो नए सेक्शन 'J' और 'K' जोड़े गए हैं। इन सेक्शनों में आवेदक से परिवार से जुड़ी जानकारी मांगी जा रही है।

आवेदक के सामने तीन विकल्प दिए गए हैं—

पहला विकल्प:
मेरा नाम पिछले SIR की मतदाता सूची में मौजूद है।

दूसरा विकल्प:
मेरे माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछले SIR की मतदाता सूची में दर्ज है।

तीसरा विकल्प:
न तो मेरा और न ही मेरे माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछले SIR की मतदाता सूची में था।

यदि कोई व्यक्ति पहला या दूसरा विकल्प चुनता है तो उसे संबंधित विधानसभा क्षेत्र, मतदान केंद्र और मतदाता सूची का क्रमांक (Serial Number) भी दर्ज करना होगा। जबकि तीसरा विकल्प चुनने पर फिलहाल अतिरिक्त जानकारी नहीं मांगी जा रही है।

तीसरे विकल्प को लेकर सबसे ज्यादा सवाल

सबसे ज्यादा चर्चा तीसरे विकल्प को लेकर हो रही है। चुनाव आयोग की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यदि कोई आवेदक यह विकल्प चुनता है तो उसके आवेदन की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी। हालांकि ऑनलाइन फॉर्म में इस कॉलम को अनिवार्य (Mandatory) नहीं बनाया गया है। यानी आवेदन बिना इस जानकारी के भी आगे बढ़ सकता है, लेकिन भविष्य में इसकी क्या भूमिका होगी, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

SIR के बाद लाखों नाम हटने से बढ़ी चिंता

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान देश के कई राज्यों में मतदाता सूची की बड़े स्तर पर जांच की गई। इस प्रक्रिया के बाद करीब 5.58 करोड़ मतदाताओं के नाम विभिन्न कारणों से मतदाता सूची से हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसी वजह से नए बदलाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जिन परिवारों के नाम पहले ही मतदाता सूची से हट चुके हैं, उनके नए मतदाताओं के आवेदन पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल इस विषय पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं है।

पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा विवाद

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले SIR की प्रक्रिया शुरू होने के बाद राजनीतिक विवाद भी काफी बढ़ गया था। रिपोर्टों के अनुसार राज्य में लगभग 27 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हट गए, जिसके कारण वे चुनाव में मतदान नहीं कर सके।इसी पृष्ठभूमि में ऑनलाइन Form-6 में किए गए नए बदलावों को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस भी तेज हो गई है।

किन राज्यों में दिख रहा नया विकल्प?

बताया जा रहा है कि यह नया विकल्प फिलहाल उन्हीं राज्यों के ऑनलाइन पोर्टल पर दिखाई दे रहा है, जहां वर्ष 2025-26 के दौरान विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी की गई है। दिलचस्प बात यह है कि बिहार, जहां सबसे पहले SIR कराया गया था, वहां यह नया विकल्प अभी दिखाई नहीं दे रहा है। वहीं असम में अभी SIR की प्रक्रिया लागू नहीं हुई है।

क्या चुनाव आयोग अपने स्तर पर बदल सकता है Form-6?

इस पूरे मामले का सबसे अहम कानूनी पहलू भी सामने आया है। विशेषज्ञों और पूर्व अधिकारियों का कहना है कि Form-6 में बदलाव करने का अधिकार सीधे चुनाव आयोग के पास नहीं है। Representation of the People Act, 1950 की धारा 28 के अनुसार चुनाव संबंधी नियमों में संशोधन करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। इसके लिए चुनाव आयोग से परामर्श लेने के बाद केंद्र सरकार को राजपत्र (Official Gazette) में अधिसूचना जारी करनी होती है।संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुसार भारत का प्रत्येक वयस्क नागरिक, जब तक वह कानून के तहत अयोग्य घोषित न हो, मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने का अधिकार रखता है।

कानून मंत्रालय की अधिसूचना जरूरी

पूर्व अधिकारियों का कहना है कि यदि Form-6 में किसी प्रकार का स्थायी संशोधन किया जाता है तो इसके लिए कानून मंत्रालय की अधिसूचना आवश्यक होती है। बिना विधिक प्रक्रिया पूरी किए चुनाव आयोग अपने स्तर पर फॉर्म में बदलाव नहीं कर सकता। एक अधिकारी ने यहां तक कहा कि आयोग अपने स्तर पर फॉर्म में "एक कॉमा तक नहीं जोड़ सकता", जब तक कि संबंधित नियमों में विधिवत संशोधन न किया जाए।

पहले भी हो चुका है संशोधन

यह पहली बार नहीं है जब Form-6 में बदलाव को लेकर चर्चा हो रही है। वर्ष 2021 में संसद ने कानून में संशोधन कर चुनाव आयोग को मतदाताओं से आधार संख्या प्राप्त करने का अधिकार दिया था। इसके बाद 17 फरवरी 2022 को केंद्र सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी की थी और उसके बाद ही संबंधित बदलाव लागू किए गए थे।

आगे क्या?

फिलहाल ऑनलाइन Form-6 में जोड़े गए नए विकल्पों को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। चुनाव आयोग ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि इन जानकारियों का उपयोग किस उद्देश्य से किया जाएगा और यदि किसी आवेदक के परिवार का नाम पिछली SIR मतदाता सूची में नहीं है तो उसके आवेदन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

ऐसे में जब तक चुनाव आयोग या कानून मंत्रालय की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी नहीं किए जाते, तब तक नए मतदाताओं के लिए यह बदलाव चर्चा और जिज्ञासा का विषय बना रहेगा। चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विशेषज्ञों की नजर अब आयोग के अगले आधिकारिक स्पष्टीकरण पर टिकी हुई है।