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जमुई स्टेशन पर गूंजी किलकारी, यात्रियों और स्वास्थ्य कर्मियों ने दिखाई इंसानियत की मिसाल

जमुई रेलवे स्टेशन पर प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर गर्भवती महिला ने सुरक्षित बच्चे को जन्म दिया। यात्रियों, रेलकर्मियों, आरपीएफ-जीआरपी और स्वास्थ्य विभाग की तत्परता से मां और नवजात की जान बचाई गई। इंसानियत और सहयोग की यह घटना लोगों के लिए मिसाल बन गई।

बिहार न्यूज
प्लेटफॉर्म पर बच्चे का जन्म
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

JAMUI: जमुई रेलवे स्टेशन बुधवार को उस समय मानवता, संवेदनशीलता और सामूहिक सहयोग की मिसाल बन गया, जब प्लेटफॉर्म संख्या एक पर एक गर्भवती महिला ने सुरक्षित रूप से बच्चे को जन्म दिया। नवजात की पहली किलकारी सुनते ही स्टेशन परिसर में मौजूद यात्रियों, रेलकर्मियों और पुलिस जवानों के चेहरों पर राहत और खुशी साफ झलकने लगी। यह घटना सिर्फ एक प्रसव की नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में इंसानियत और त्वरित सहयोग की ताकत को दिखाने वाली प्रेरणादायक तस्वीर बन गई।


जानकारी के अनुसार, शेखपुरा जिले के बहुआरा (चेबारा) गांव निवासी विक्की कुमार अपनी पत्नी काजल कुमारी  को लेकर जमुई से लखीसराय जिले के मननपुर (भंडारा) स्थित ससुराल जा रहे थे। वे स्वजनों के साथ जमुई रेलवे स्टेशन पहुंचे थे और ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान अचानक कोमल देवी को तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। महिला की स्थिति बिगड़ती देख प्लेटफॉर्म पर अफरा-तफरी मच गई, लेकिन वहां मौजूद महिला यात्रियों ने घबराने के बजाय साहस और संवेदनशीलता का परिचय दिया।


महिला यात्रियों ने तुरंत चादरों का घेरा बनाकर सुरक्षित प्रसव कराने में सहयोग किया। इसी बीच आरपीएफ और जीआरपी के जवान मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करते हुए तत्काल मलयपुर स्वास्थ्य केंद्र और एम्बुलेंस सेवा को सूचना दी। कुछ ही देर में मलयपुर स्वास्थ्य विभाग की डॉ. रेखा कुमारी, जीएनएम संध्या कुमारी और एएनएम प्रमिला कुमारी की टीम स्टेशन पहुंची और मां-बच्चे की प्राथमिक जांच की। चिकित्सकों ने बताया कि जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। बाद में दोनों को मलयपुर उप-स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उपचार के बाद एम्बुलेंस से घर भेज दिया गया।


बताया गया कि काजल कुमारी एक दिन पहले ही इलाज के लिए जमुई आई थीं, जहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन से डिलीवरी की बात कही थी। आर्थिक तंगी के कारण पति-पत्नी पैसे की व्यवस्था करने ससुराल जा रहे थे, लेकिन नियति को कुछ और मंजूर था और प्लेटफॉर्म पर ही बच्चे का जन्म हो गया। डॉ. रेखा कुमारी ने कहा कि ऐसे संवेदनशील समय में मां का साहस और सकारात्मक सोच सबसे बड़ा सहारा बनता है। उन्होंने कहा कि घबराने के बजाय धैर्य और मानसिक दृढ़ता से काम लेने पर जच्चा-बच्चा दोनों की जान सुरक्षित रखी जा सकती है।


इस घटना ने यह साबित कर दिया कि मुश्किल हालात में जब आम लोग, रेल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग एकजुट होकर काम करते हैं, तो इंसानियत सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आती है। यात्रियों ने इसे “ईश्वर का आशीर्वाद” बताते हुए सभी मददगार लोगों की जमकर सराहना की और नवजात के उज्जवल भविष्य की कामना की।

जमुई से धीरज कुमार सिंह

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